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Uttarkashi News: सात करोड़ खर्च के बाद भी आराकोट–चीवां सड़क बदहाल
Tue, 27 Oct 2026 07:35 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, उत्तर काशी
संवाद न्यूज एजेंसी, उत्तर काशी
Updated Tue, 27 Oct 2026 07:35 PM IST
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गड्ढों से वाहन चालकों के साथ राहगीरों को आवाजाही में हो रही है दिक्कत
पुरोला। आराकोट–बंगाण क्षेत्र की महत्वपूर्ण आराकोट–चीवां मोटर मार्ग की बदहाल स्थिति ने सड़क निर्माण की गुणवत्ता और रखरखाव व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। करोड़ों रुपये खर्च होने के बावजूद सड़क जगह-जगह उखड़ी हुई है और बड़े-बड़े गड्ढे राहगीरों के लिए परेशानी का सबब बने हुए हैं। इस मामले में सामाजिक कार्यकर्ता एवं युवा नेता मनमोहन सिंह चौहान ने विभागीय कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए निष्पक्ष तकनीकी जांच की मांग की है।
चौहान ने बताया कि विभागीय जानकारी में सड़क निर्माण पर करीब 6.51 करोड़ रुपये खर्च किए जाने व पांच वर्षों के रखरखाव के लिए 69.09 लाख रुपये की व्यवस्था का उल्लेख है। ऐसे में सवाल उठता है कि इतनी बड़ी धनराशि के बावजूद सड़क की हालत खराब क्यों है और रखरखाव के लिए निर्धारित बजट का कितना उपयोग किया गया है।
उन्होंने मांग की कि सड़क निर्माण में प्रयुक्त सामग्री, कार्य की गुणवत्ता और निर्धारित मानकों की स्वतंत्र तकनीकी जांच कराई जाए। साथ ही रखरखाव के लिए स्वीकृत धनराशि, अब तक किए गए वास्तविक खर्च और संबंधित कार्यों का पूरा विवरण सार्वजनिक किया जाए। चौहान ने कहा कि सड़क की बदहाली का खामियाजा स्थानीय ग्रामीणों, विद्यार्थियों, मरीजों और वाहन चालकों को रोज भुगतना पड़ रहा है।
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खराब सड़क से आवागमन प्रभावित होने के साथ दुर्घटनाओं का खतरा भी बढ़ता है। उन्होंने क्षेत्रीय जनप्रतिनिधियों की चुप्पी पर सवाल उठाते हुए कहा कि जनता की बुनियादी समस्याओं पर ठोस कार्रवाई होनी चाहिए। उन्होंने संबंधित विभाग से मार्ग की हालत सुधारने और जांच में दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ कार्रवाई करने की मांग की।
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पुरोला। आराकोट–बंगाण क्षेत्र की महत्वपूर्ण आराकोट–चीवां मोटर मार्ग की बदहाल स्थिति ने सड़क निर्माण की गुणवत्ता और रखरखाव व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। करोड़ों रुपये खर्च होने के बावजूद सड़क जगह-जगह उखड़ी हुई है और बड़े-बड़े गड्ढे राहगीरों के लिए परेशानी का सबब बने हुए हैं। इस मामले में सामाजिक कार्यकर्ता एवं युवा नेता मनमोहन सिंह चौहान ने विभागीय कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए निष्पक्ष तकनीकी जांच की मांग की है।
चौहान ने बताया कि विभागीय जानकारी में सड़क निर्माण पर करीब 6.51 करोड़ रुपये खर्च किए जाने व पांच वर्षों के रखरखाव के लिए 69.09 लाख रुपये की व्यवस्था का उल्लेख है। ऐसे में सवाल उठता है कि इतनी बड़ी धनराशि के बावजूद सड़क की हालत खराब क्यों है और रखरखाव के लिए निर्धारित बजट का कितना उपयोग किया गया है।
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उन्होंने मांग की कि सड़क निर्माण में प्रयुक्त सामग्री, कार्य की गुणवत्ता और निर्धारित मानकों की स्वतंत्र तकनीकी जांच कराई जाए। साथ ही रखरखाव के लिए स्वीकृत धनराशि, अब तक किए गए वास्तविक खर्च और संबंधित कार्यों का पूरा विवरण सार्वजनिक किया जाए। चौहान ने कहा कि सड़क की बदहाली का खामियाजा स्थानीय ग्रामीणों, विद्यार्थियों, मरीजों और वाहन चालकों को रोज भुगतना पड़ रहा है।
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खराब सड़क से आवागमन प्रभावित होने के साथ दुर्घटनाओं का खतरा भी बढ़ता है। उन्होंने क्षेत्रीय जनप्रतिनिधियों की चुप्पी पर सवाल उठाते हुए कहा कि जनता की बुनियादी समस्याओं पर ठोस कार्रवाई होनी चाहिए। उन्होंने संबंधित विभाग से मार्ग की हालत सुधारने और जांच में दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ कार्रवाई करने की मांग की।