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Uttarkashi News: 26 साल बाद जगी 42 गांव के लोगों को हक मिलने की उम्मीद
Tue, 15 Oct 2024 05:40 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, उत्तर काशी
संवाद न्यूज एजेंसी, उत्तर काशी
Updated Tue, 15 Oct 2024 05:40 PM IST
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उत्तरकाशी। गोविंद वन्य जीव विहार के अंतर्गत आने वाले मोरी ब्लॉक के 42 गांवों को अपने हक-हकूक मिलने की उम्मीद करीब 26 वर्षाें बाद जगने लगी है। इस संबंध में ग्रामीणों की मांग पर 12 बिंदुओं पर जिलाधिकारी ने केंद्र सरकार सहित वन मंत्री और प्रमुख वन संरक्षक को पत्र लिखकर जल्द कार्रवाई की मांग की है।
गैंचवाण गांव निवासी जगदीश रांगड़, राजपाल रावत, भगत रावत, मोहन रंवाल्टा, दिनेश रावत, प्रदीप नेगी, रणवीर राणा ने बताया कि वर्ष 1998 में मोरी विकासखंड के सांकरी, सुपीन, रूपीन रेंज के अंतर्गत आने वाले 42 गांवों को गोविंद वन्य जीव विहार में शामिल किया गया। राष्ट्रीय पार्क में शामिल होने के बाद से ग्रामीण अपने जल-जंगल और जमीन जैसी मूलभूत सुविधाओं के हक-हकूक बंद हो गए।
इससे आज भी क्षेत्र के कई गांव ऐसे हैं, जो कि सड़क और संचार जैसी सुविधाओं से नहीं जुड़ पाए हैं। जंगल से वह लकड़ी नहीं ले पाते। वहीं, ग्रामीणों को जो मूलभूत हक है, वह भी उन्हें फ्री ग्रांट के रूप में नहीं मिल पाता। वहीं, क्षेत्र में केदारकांठा, हरकीदून जैसे पर्यटक स्थल हैं, लेकिन कड़े नियमों के कारण वहां पर भी उम्मीद के अनुरूप पर्यटक नहीं पहुंच पा रहे हैं। इसलिए इस संबंध में ग्रामीणों ने डीएम से मुलाकात कर 12 बिंदुओं पर उन्हें उनके हक-हकूक दिलवाने की मांग की।
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वहीं, प्रदेश सरकार से मांग की है कि जल्द ही इस पर कार्रवाई के लिए केंद्र सरकार से पत्राचार किया जाए। इस संबंध में डीएम ने प्रमुख वन संरक्षक को पत्र लिखकर कार्रवाई का अनुरोध किया है। साथ ही प्रतिलिपि वन मंत्री राज्य सरकार और केंद्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु मंत्री को भी प्रेषित किया है। पुरोला विधायक दुर्गेश्वर लाल का कहना है कि इस संबंध में किसी प्रकार की कार्रवाई शासन स्तर पर नहीं हुई है। इस संबंध में वन मंत्री ही सही जवाब दे सकते हैं।
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गैंचवाण गांव निवासी जगदीश रांगड़, राजपाल रावत, भगत रावत, मोहन रंवाल्टा, दिनेश रावत, प्रदीप नेगी, रणवीर राणा ने बताया कि वर्ष 1998 में मोरी विकासखंड के सांकरी, सुपीन, रूपीन रेंज के अंतर्गत आने वाले 42 गांवों को गोविंद वन्य जीव विहार में शामिल किया गया। राष्ट्रीय पार्क में शामिल होने के बाद से ग्रामीण अपने जल-जंगल और जमीन जैसी मूलभूत सुविधाओं के हक-हकूक बंद हो गए।
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इससे आज भी क्षेत्र के कई गांव ऐसे हैं, जो कि सड़क और संचार जैसी सुविधाओं से नहीं जुड़ पाए हैं। जंगल से वह लकड़ी नहीं ले पाते। वहीं, ग्रामीणों को जो मूलभूत हक है, वह भी उन्हें फ्री ग्रांट के रूप में नहीं मिल पाता। वहीं, क्षेत्र में केदारकांठा, हरकीदून जैसे पर्यटक स्थल हैं, लेकिन कड़े नियमों के कारण वहां पर भी उम्मीद के अनुरूप पर्यटक नहीं पहुंच पा रहे हैं। इसलिए इस संबंध में ग्रामीणों ने डीएम से मुलाकात कर 12 बिंदुओं पर उन्हें उनके हक-हकूक दिलवाने की मांग की।
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वहीं, प्रदेश सरकार से मांग की है कि जल्द ही इस पर कार्रवाई के लिए केंद्र सरकार से पत्राचार किया जाए। इस संबंध में डीएम ने प्रमुख वन संरक्षक को पत्र लिखकर कार्रवाई का अनुरोध किया है। साथ ही प्रतिलिपि वन मंत्री राज्य सरकार और केंद्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु मंत्री को भी प्रेषित किया है। पुरोला विधायक दुर्गेश्वर लाल का कहना है कि इस संबंध में किसी प्रकार की कार्रवाई शासन स्तर पर नहीं हुई है। इस संबंध में वन मंत्री ही सही जवाब दे सकते हैं।