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Uttarkashi News: छोटी सी चूक पड़ सकती है जान पर भारी
Wed, 25 Mar 2026 06:23 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, उत्तर काशी
संवाद न्यूज एजेंसी, उत्तर काशी
Updated Wed, 25 Mar 2026 06:23 PM IST
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आपदा से टूट गया था पिलंग गांव का पैदल रास्ता, आठ माह बाद भी नहीं हुई आवाजाही
आपदा मद से बजट आवंटित किया गया पर नहीं हो पाई कोई कार्रवाई
उत्तरकाशी। भटवाड़ी विकासखंड के दूरस्थ गांव पिलंग का आपदा में क्षतिग्रस्त पैदल मार्ग आठ माह बाद भी नहीं बन पाया है। इससे ग्रामीण क्षतिग्रस्त मार्गों पर जान जोखिम में डालकर आवाजाही कर रहे हैं। स्थिति यह है कि छोटी सी चूक से व्यक्ति खाई में गिर सकता है। ग्रामीणों का कहना है कि खंड विकास कार्यालय को इसके लिए आपदा मद से बजट भी आवंटित किया गया लेकिन उस पर किसी प्रकार की कार्रवाई नहीं हो रही है।
स्थानीय निवासी चंदन सिंह राणा ने बताया कि पिलंग गांव के लोग आज भी करीब 10 से 12 किमी की पैदल दूरी तय कर गांव पहुंचते हैं। गांव के लिए सड़क निर्माण शुरू तो किया गया लेकिन वह भी वर्षों से अधर में ही लटका है। इससे ग्रामीणों की मुख्य आवाजाही का मात्र एक ही पैदल मार्ग है लेकिन वह भी गत वर्ष की आपदा के दौरान जगह-जगह क्षतिग्रस्त होने के कारण उस पर आवाजाही में खतरा बना है।
ग्रामीणों को आवश्यक सामग्री गांव तक पहुंचाने में परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि अगर गांव में कोई बीमार हो जाए तो उसे भी मुख्य सड़क तक पहुंचाने के लिए मार्ग नहीं बचा हुआ है। ग्रामीण क्षतिग्रस्त मार्गों पर घास और पेड़ों के सहारे आवाजाही करने को मजबूर हैं। ग्रामीणों की मांग पर जिला प्रशासन की ओर से आपदा मद के तहत खंड विकास कार्यालय को करीब पांच लाख की धनराशि अवमुक्त की थी लेकिन आपदा के आठ माह बीतने के बाद भी क्षतिग्रस्त पैदल मार्ग का निर्माण शुरू नहीं हो पाया है।
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खंड विकास अधिकारी अमित ममगाईं का कहना है कि वहां पर कुछ विवाद होने के कारण कार्य रुका था लेकिन अब इसका वर्क ऑडर कर दिया गया है। जल्द ही मार्ग का निर्माण शुरू किया जाएगा।
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आपदा मद से बजट आवंटित किया गया पर नहीं हो पाई कोई कार्रवाई
उत्तरकाशी। भटवाड़ी विकासखंड के दूरस्थ गांव पिलंग का आपदा में क्षतिग्रस्त पैदल मार्ग आठ माह बाद भी नहीं बन पाया है। इससे ग्रामीण क्षतिग्रस्त मार्गों पर जान जोखिम में डालकर आवाजाही कर रहे हैं। स्थिति यह है कि छोटी सी चूक से व्यक्ति खाई में गिर सकता है। ग्रामीणों का कहना है कि खंड विकास कार्यालय को इसके लिए आपदा मद से बजट भी आवंटित किया गया लेकिन उस पर किसी प्रकार की कार्रवाई नहीं हो रही है।
स्थानीय निवासी चंदन सिंह राणा ने बताया कि पिलंग गांव के लोग आज भी करीब 10 से 12 किमी की पैदल दूरी तय कर गांव पहुंचते हैं। गांव के लिए सड़क निर्माण शुरू तो किया गया लेकिन वह भी वर्षों से अधर में ही लटका है। इससे ग्रामीणों की मुख्य आवाजाही का मात्र एक ही पैदल मार्ग है लेकिन वह भी गत वर्ष की आपदा के दौरान जगह-जगह क्षतिग्रस्त होने के कारण उस पर आवाजाही में खतरा बना है।
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ग्रामीणों को आवश्यक सामग्री गांव तक पहुंचाने में परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि अगर गांव में कोई बीमार हो जाए तो उसे भी मुख्य सड़क तक पहुंचाने के लिए मार्ग नहीं बचा हुआ है। ग्रामीण क्षतिग्रस्त मार्गों पर घास और पेड़ों के सहारे आवाजाही करने को मजबूर हैं। ग्रामीणों की मांग पर जिला प्रशासन की ओर से आपदा मद के तहत खंड विकास कार्यालय को करीब पांच लाख की धनराशि अवमुक्त की थी लेकिन आपदा के आठ माह बीतने के बाद भी क्षतिग्रस्त पैदल मार्ग का निर्माण शुरू नहीं हो पाया है।
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खंड विकास अधिकारी अमित ममगाईं का कहना है कि वहां पर कुछ विवाद होने के कारण कार्य रुका था लेकिन अब इसका वर्क ऑडर कर दिया गया है। जल्द ही मार्ग का निर्माण शुरू किया जाएगा।