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नदियों ने बदला वास्तविक स्वरूप : शेखर पाठक

Wed, 09 Jul 2014 05:32 AM IST
Uttar Kashi
Uttar Kashi Updated Wed, 09 Jul 2014 05:32 AM IST
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पुरोला। अस्कोट-आराकोट पदयात्रा का 45वें दिन समापन हो गया है। 1150 किमी की इस पद यात्रा में अभियान दल के सदस्यों ने पहाड़ी क्षेत्र के महत्वपूर्ण बिंदुओं का अध्ययन किया।
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अस्कोट से आराकोट दस वर्ष बाद चली पद यात्रा का मंगलवार को जीआईसी आराकोट में समापन हो गया। दल के प्रमुख डा. शेखर पाठक ने पद यात्रा के अनुभव साझा करते हुए कहा कि पहाड़ में नदियों ने अपना वास्तविक स्वरूप खो दिया है। नदियों के वास्तविक स्वरूप का अध्ययन किए बिना माईक्रो हाईडिल आदि अन्य विकास के कार्य किए जा रहे हैं, जिससे दैवी आपदाएं आ रही हैं। डा. नवीन जुयाल, गिरजा पांडेय ने बताया कि जड़ी-बूटियों के अवैध विदोहन के कारण बदलते सामाजिक परिवेश से आने वाले समय में उत्तराखंड को नुकसान उठाना पड़ सकता है। इस मौके पर मूर्तिकार राकेश रावत की ओर से निर्मित श्रीदेव सुमन की मूर्ति एवं साहित्यकार महावीर रवांल्टा की पुस्तक ‘सपनों के सात फेरे’ का लोकार्पण भी किया गया। इस अवसर पर उमा भट्ट, कर्नल डीएस डिमरी, कमल जोशी, प्रकाश उपाध्याय, सुरेंद्र पुरी, चंदन डांगी आदि मौजूद रहे।
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