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खतरा बना जोशियाड़ा बैराज गेट की मरम्मत का काम
Uttar Kashi
Updated Sun, 10 Nov 2013 05:42 AM IST
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उत्तरकाशी। जल विद्युत निगम ने मनेरी भाली स्टेज टू के जोशियाड़ा बैराज के गेटों से हो रहा रिसाव रोकने की कवायद शुरू की गई लेकिन शाम होते ही मरम्मत कार्य बंद करना पड़ा। झील के बढ़ते जलस्तर से डिडसारी गांव के अस्थायी पैदल रास्ते क्षतिग्रस्त हो गए जिससे तिलोथ पावर हाउस में विद्युत उत्पादन शुरू करना पड़ा।
एक तो ठंड के चलते भागीरथी में पानी की कमी और ऊपर से बाढ़ में स्पिल वे क्षतिग्रस्त होने से जोशियाड़ा बैराज के गेटों से हो रहे रिसाव के कारण 304 मेगावाट की मनेरी भाली स्टेज टू परियोजना को उत्पादन हानि का सामना करना पड़ रहा था। इस परियोजना से वर्तमान में महज 20 मेगावाट उत्पादन हो रहा है। निगम प्रबंधन ने शनिवार की सुबह 11 बजे जोशियाड़ा जलाशय खाली कर बैराज गेटों के नीचे रेत भरे कट्टे डालकर रिसाव रोकने के उपाय शुरू किए। नदी के पानी से काम बाधित न हो इसलिए 90 मेगावाट की मनेरी भाली प्रथम चरण के तिलोथ विद्युतगृह की तीनों टरबाइनें बंद कर मनेरी बैराज में ही भागीरथी का पानी रोक दिया गया। शाम होते होते जलाशय का जलस्तर इतना बढ़ गया कि डिडसारी गांव को खतरा होने लगा। शाम पांच बजे आनन-फानन में सुरंग में पानी छोड़कर तिलोथ विद्युत गृह में टरबाइनें चालू करनी पड़ीं। पानी छूटने के साथ ही जोशियाड़ा बैराज गेटों की मरम्मत का कार्य भी ठप हो गया।
इंसेट
कोट..........
बाढ़ से जोशियाड़ा बैराज गेटों के स्पिल वे को भारी नुकसान पहुंचा है, जिससे रिसाव हो रहा है। इसे रोकने के लिए शनिवार को जलाशय खाली कर यहां स्टील प्लेटों की वैल्डिंग और रेत भरे कट्टे लगाकर उपाय किए जा रहे हैं। एक नंबर गेट की मरम्मत हो गई है, लेकिन दूसरे गेट पर अभी उपाय नहीं हो पाए हैं। - विनोद भाकुनी, ईई जोशियाड़ा बैराज।
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कोट..........
जोशियाड़ा बैराज गेट की मरम्मत के लिए तिलोथ विद्युतगृह में उत्पादन बंद कर मनेरी बैराज जलाशय में पानी रोका गया था, जिससे वहां खतरा बढ़ गया था। शाम पांच बजे दो टरबाइनें चलाकर उत्पादन शुरू कर लिया गया है। - केके जायसवाल, ईई तिलोथ पावर हाउस।
कूदते फांदते पहुंचे गांव
शनिवार को मनेरी झील में खतरे की हद तक पानी भरे जाने से हमारे गांव के लिए नदी किनारे बनाए गए अस्थायी पैदल रास्ते क्षतिग्रस्त हो गए। रात के अंधेरे में ग्रामीणों को जंगल के रास्तों से कूदते फांदते हुए गांव पहुंचना पड़ा। झील में जल भराव से यहां कटाव का खतरा भी पैदा हो गया है। - विजय राणा, निवर्तमान प्रधान डिडसारी गांव।
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एक तो ठंड के चलते भागीरथी में पानी की कमी और ऊपर से बाढ़ में स्पिल वे क्षतिग्रस्त होने से जोशियाड़ा बैराज के गेटों से हो रहे रिसाव के कारण 304 मेगावाट की मनेरी भाली स्टेज टू परियोजना को उत्पादन हानि का सामना करना पड़ रहा था। इस परियोजना से वर्तमान में महज 20 मेगावाट उत्पादन हो रहा है। निगम प्रबंधन ने शनिवार की सुबह 11 बजे जोशियाड़ा जलाशय खाली कर बैराज गेटों के नीचे रेत भरे कट्टे डालकर रिसाव रोकने के उपाय शुरू किए। नदी के पानी से काम बाधित न हो इसलिए 90 मेगावाट की मनेरी भाली प्रथम चरण के तिलोथ विद्युतगृह की तीनों टरबाइनें बंद कर मनेरी बैराज में ही भागीरथी का पानी रोक दिया गया। शाम होते होते जलाशय का जलस्तर इतना बढ़ गया कि डिडसारी गांव को खतरा होने लगा। शाम पांच बजे आनन-फानन में सुरंग में पानी छोड़कर तिलोथ विद्युत गृह में टरबाइनें चालू करनी पड़ीं। पानी छूटने के साथ ही जोशियाड़ा बैराज गेटों की मरम्मत का कार्य भी ठप हो गया।
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बाढ़ से जोशियाड़ा बैराज गेटों के स्पिल वे को भारी नुकसान पहुंचा है, जिससे रिसाव हो रहा है। इसे रोकने के लिए शनिवार को जलाशय खाली कर यहां स्टील प्लेटों की वैल्डिंग और रेत भरे कट्टे लगाकर उपाय किए जा रहे हैं। एक नंबर गेट की मरम्मत हो गई है, लेकिन दूसरे गेट पर अभी उपाय नहीं हो पाए हैं। - विनोद भाकुनी, ईई जोशियाड़ा बैराज।
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जोशियाड़ा बैराज गेट की मरम्मत के लिए तिलोथ विद्युतगृह में उत्पादन बंद कर मनेरी बैराज जलाशय में पानी रोका गया था, जिससे वहां खतरा बढ़ गया था। शाम पांच बजे दो टरबाइनें चलाकर उत्पादन शुरू कर लिया गया है। - केके जायसवाल, ईई तिलोथ पावर हाउस।
कूदते फांदते पहुंचे गांव
शनिवार को मनेरी झील में खतरे की हद तक पानी भरे जाने से हमारे गांव के लिए नदी किनारे बनाए गए अस्थायी पैदल रास्ते क्षतिग्रस्त हो गए। रात के अंधेरे में ग्रामीणों को जंगल के रास्तों से कूदते फांदते हुए गांव पहुंचना पड़ा। झील में जल भराव से यहां कटाव का खतरा भी पैदा हो गया है। - विजय राणा, निवर्तमान प्रधान डिडसारी गांव।