{"_id":"5cf6a365bdec2207073c6783","slug":"155966755210-utter-kashi-news17","type":"story","status":"publish","title_hn":"बीज बम अभियान से दिया पर्यावरण संरक्षण का संदेश","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
बीज बम अभियान से दिया पर्यावरण संरक्षण का संदेश
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
उत्तरकाशी। पर्यावरण संरक्षण के नाम पर मात्र पौधरोपण तक सिमट रही संस्थाओं के बीच द्वारिका सेमवाल ने बीज बम अभियान की शुरूआत कर संतुलित पर्यावरण तंत्र का मॉडल पेश किया है। अपने इस अभियान में जरिए वह जंगलों के अलावा वन्य जीवों के संरक्षण व ग्रामीणों के अधिकार व स्वरोजगार का भी मुद्दा उठा रहे हैं।
कमद गांव में 1994 में बाढ़ से जंगल बर्बाद होने और फिर गांव पर भूधंसाव का खतरा पैदा हो गया था। इस दौरान कई पर्यावरणविदों ने ग्रामीणों को पर्यावरण के प्रति जागरूक किया। इससे प्रेरित होकर खीमानंद सेमवाल व रूप देई ने कक्षा 12 में पढ़ने वाले अपने बेटे द्वारिका सेमवाल को इस मुहिम से जुड़ने के लिए प्रोत्साहित किया, जिसके बाद द्वारिका ने गांव में ही नर्सरी तैयार की। इस दौरान उनकी मुलाकात हेस्को संस्था के डा. अनिल जोशी से हुई। इनसे प्रेरित होकर उन्होंने वर्ष 2004, 2007, 2008 व 2012 में साइकिल से देशभर में यात्राकर लोगों को पर्यावरण संरक्षण के प्रति प्रेरित किया। वर्ष 2018 में उन्होंने बीज बम अभियान की शुरूआत की, जिसके तहत मिट्टी व गोबर की गेंद में विभिन्न प्रजातियों के बीजों को रखकर वनों तथा भूस्खलन प्रभावित क्षेत्रों में डाला गया। प्रदेश के 100 से अधिक स्कूलों व 70 ग्राम पंचायतों को अभियान से जोड़कर विभिन्न क्षेत्रों में एक लाख से अधिक बीज बम फैंके।
द्वारिका सेमवाल ने कहा कि पर्यावरण को बचाने के लिए जंगलों में फलदार पेड़ लगाने की जरूरत है। ताकि वन्यजीवों को जंगलों में ही भोजन मिल सके। वहीं ग्रामीणों को वन अधिकार दिए जाने चाहिए। उन्होंने ग्रीन बोनस सरकार व अधिकारियों के बदले सीधे ग्रामीणों को देने की भी वकालत की, जिसके तहत पर्यावरण संरक्षण करने वाले ग्रामीण को ही सरकार आर्थिक मदद मुहैया कराए।
विज्ञापन
विज्ञापन
कमद गांव में 1994 में बाढ़ से जंगल बर्बाद होने और फिर गांव पर भूधंसाव का खतरा पैदा हो गया था। इस दौरान कई पर्यावरणविदों ने ग्रामीणों को पर्यावरण के प्रति जागरूक किया। इससे प्रेरित होकर खीमानंद सेमवाल व रूप देई ने कक्षा 12 में पढ़ने वाले अपने बेटे द्वारिका सेमवाल को इस मुहिम से जुड़ने के लिए प्रोत्साहित किया, जिसके बाद द्वारिका ने गांव में ही नर्सरी तैयार की। इस दौरान उनकी मुलाकात हेस्को संस्था के डा. अनिल जोशी से हुई। इनसे प्रेरित होकर उन्होंने वर्ष 2004, 2007, 2008 व 2012 में साइकिल से देशभर में यात्राकर लोगों को पर्यावरण संरक्षण के प्रति प्रेरित किया। वर्ष 2018 में उन्होंने बीज बम अभियान की शुरूआत की, जिसके तहत मिट्टी व गोबर की गेंद में विभिन्न प्रजातियों के बीजों को रखकर वनों तथा भूस्खलन प्रभावित क्षेत्रों में डाला गया। प्रदेश के 100 से अधिक स्कूलों व 70 ग्राम पंचायतों को अभियान से जोड़कर विभिन्न क्षेत्रों में एक लाख से अधिक बीज बम फैंके।
विज्ञापन
द्वारिका सेमवाल ने कहा कि पर्यावरण को बचाने के लिए जंगलों में फलदार पेड़ लगाने की जरूरत है। ताकि वन्यजीवों को जंगलों में ही भोजन मिल सके। वहीं ग्रामीणों को वन अधिकार दिए जाने चाहिए। उन्होंने ग्रीन बोनस सरकार व अधिकारियों के बदले सीधे ग्रामीणों को देने की भी वकालत की, जिसके तहत पर्यावरण संरक्षण करने वाले ग्रामीण को ही सरकार आर्थिक मदद मुहैया कराए।
विज्ञापन