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संग्रह अमीनों को नायब तहसीलदार पदों पर सीधी पदोन्नति के खिलाफ भूलेख संवर्गीय कर्मचारियों ने खोला मोर्चा
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उत्तरकाशी। उत्तराखंड भूलेख संवर्गीय कर्मचारी महासंघ ने नायब तहसीलदार के पदों पर संग्रह अमीनों के लिए छह प्रतिशत पदोन्नति कोटा नियत करने के निर्णय पर रोष जताया है। उन्होंने मंत्रीमंडलीय उपसमिति के अध्यक्ष काबीना मंत्री यशपाल आर्य को ज्ञापन प्रेषित कर उक्त निर्णय को न्याय विरुद्ध बताते हुए प्रभावित संवर्गों को सुनवाई का अवसर देने की मांग की है। साथ ही महासंघ ने इस निर्णय के खिलाफ आंदोलन की रणनीति तय करने के लिए दो जून को देहरादून में महासंघ की बैठक आहूत की है।
महासंघ के प्रांतीय अध्यक्ष धीरेंद्र कुमाईं एवं महासचिव विजयपाल मेहता ने बताया कि बीते 28 मई को मंत्री मंडलीय उपसमिति ने बिना पोषक संवर्ग के प्रतिनिधियों को सुनवाई का अवसर दिए नायब तहसीलदार पदों पर संग्रह अमीनों के लिए छह प्रतिशत पदोन्नति कोटा नियत करने का निर्णय लिया है। उन्होंने कहा कि शैक्षिक योग्यता में कमतर होने के साथ ही कम ग्रेड वेतन और बिना किसी प्रशिक्षण के संग्रह अमीनों को नायब तहसीलदार के पदों पर सीधी पदोन्नति दिया जाना न्याय विरुद्ध और भूलेख संवर्ग के कर्मचारियों के हितों के खिलाफ है। उन्होंने बताया कि स्नातक योग्यता के साथ एक वर्ष तीन माह के प्रशिक्षण के बाद राजस्व उपनिरीक्षक पद पर नियुक्ति पाने वाले कर्मचारियों को लंबी सेवाओं के बाद पहले तीन माह के प्रशिक्षण उपरांत राजस्व निरीक्षक पद पर पदोन्नति और फिर लंबी सेवाओं के बाद नायब तहसीलदार पदों पद पदोन्नति का प्रावधान है। जबकि इसके उलट इंटरमीडिएट शैक्षिक योग्यता के साथ बिना किसी प्रशिक्षण के संग्रह अमीन बने कार्मिकों को सीधे नायब तहसीलदार बनाया जाना किसी भी स्थिति में न्याय संगत नहीं है।
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महासंघ के प्रांतीय अध्यक्ष धीरेंद्र कुमाईं एवं महासचिव विजयपाल मेहता ने बताया कि बीते 28 मई को मंत्री मंडलीय उपसमिति ने बिना पोषक संवर्ग के प्रतिनिधियों को सुनवाई का अवसर दिए नायब तहसीलदार पदों पर संग्रह अमीनों के लिए छह प्रतिशत पदोन्नति कोटा नियत करने का निर्णय लिया है। उन्होंने कहा कि शैक्षिक योग्यता में कमतर होने के साथ ही कम ग्रेड वेतन और बिना किसी प्रशिक्षण के संग्रह अमीनों को नायब तहसीलदार के पदों पर सीधी पदोन्नति दिया जाना न्याय विरुद्ध और भूलेख संवर्ग के कर्मचारियों के हितों के खिलाफ है। उन्होंने बताया कि स्नातक योग्यता के साथ एक वर्ष तीन माह के प्रशिक्षण के बाद राजस्व उपनिरीक्षक पद पर नियुक्ति पाने वाले कर्मचारियों को लंबी सेवाओं के बाद पहले तीन माह के प्रशिक्षण उपरांत राजस्व निरीक्षक पद पर पदोन्नति और फिर लंबी सेवाओं के बाद नायब तहसीलदार पदों पद पदोन्नति का प्रावधान है। जबकि इसके उलट इंटरमीडिएट शैक्षिक योग्यता के साथ बिना किसी प्रशिक्षण के संग्रह अमीन बने कार्मिकों को सीधे नायब तहसीलदार बनाया जाना किसी भी स्थिति में न्याय संगत नहीं है।
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