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विशेष पूजा-अर्चना के साथ अन्नपूर्णा मंदिर के कपाट खुले
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उत्तरकाशी। डोडीताल क्षेत्र स्थित मां अन्नपूर्णा मंदिर के कपाट शुक्रवार को श्रद्धालुओं के लिए खोल दिए गए। इस अवसर पर असी गंगा घाटी के ग्रामीणों ने देवी देवताओं की डोलियों के साथ पहुंचकर मां अन्नपूर्णा व भगवान गणेश से सुख समृद्धि की कामना की।
डोडीताल स्थित मां अन्नपूर्णा मंदिर के कपाट हर वर्ष शीतकाल के लिए छह माह तक बंद किए जाते हैं। जिन्हें बैसाख कृष्ण पक्ष चतुर्दशी के अवसर पर पुन: श्रद्धालुओं के लिए खोला जाता है। इसी क्रम में शुक्रवार को सुबह 9.15 बजे विशेष पूजा अर्चना के साथ मंदिर के कपाट खोले गए। इस अवसर पर सर्पनाथ देवता, नारायण देवता, नाग देवता, पांच पांडव देवता, दनवा देवता आदि देव डोलियों के साथ पहुंचे ग्रामीणों ने डोडीताल झील में स्नान कर मां अन्नपूर्णा व भगवान गणेश का आशीर्वाद लिया। आयोजन के अंत में दिल्ली निवासी अशोक कुमार गुप्ता द्वारा भव्य भंडारे का आयोजन किया गया।
मंदिर के पुजारी राधेश्याम खंडूड़ी ने बताया कि डोडीताल क्षेत्र में ही मां अन्नपूर्णा ने भगवान गणेश को जन्म दिया था, जिससे इस स्थान का स्थानीय ग्रामीणों के साथ ही पूूूरे देश भर के श्रद्धालुओं के मन में विशेष महत्व है। इस मौके पर संतोष खंडूड़ी, शंकरदयाल खंडूड़ी, सुंदर लाल, संगीता पंवार, राम नारायण खंडूड़ी, कमल सिंह रावत, बिजेंद्र सिंह, धमेंद्र सिंह, महावीर सिंह, गणेश सिंह आदि मौजूद रहे।
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डोडीताल स्थित मां अन्नपूर्णा मंदिर के कपाट हर वर्ष शीतकाल के लिए छह माह तक बंद किए जाते हैं। जिन्हें बैसाख कृष्ण पक्ष चतुर्दशी के अवसर पर पुन: श्रद्धालुओं के लिए खोला जाता है। इसी क्रम में शुक्रवार को सुबह 9.15 बजे विशेष पूजा अर्चना के साथ मंदिर के कपाट खोले गए। इस अवसर पर सर्पनाथ देवता, नारायण देवता, नाग देवता, पांच पांडव देवता, दनवा देवता आदि देव डोलियों के साथ पहुंचे ग्रामीणों ने डोडीताल झील में स्नान कर मां अन्नपूर्णा व भगवान गणेश का आशीर्वाद लिया। आयोजन के अंत में दिल्ली निवासी अशोक कुमार गुप्ता द्वारा भव्य भंडारे का आयोजन किया गया।
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मंदिर के पुजारी राधेश्याम खंडूड़ी ने बताया कि डोडीताल क्षेत्र में ही मां अन्नपूर्णा ने भगवान गणेश को जन्म दिया था, जिससे इस स्थान का स्थानीय ग्रामीणों के साथ ही पूूूरे देश भर के श्रद्धालुओं के मन में विशेष महत्व है। इस मौके पर संतोष खंडूड़ी, शंकरदयाल खंडूड़ी, सुंदर लाल, संगीता पंवार, राम नारायण खंडूड़ी, कमल सिंह रावत, बिजेंद्र सिंह, धमेंद्र सिंह, महावीर सिंह, गणेश सिंह आदि मौजूद रहे।
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