{"_id":"5caa271cbdec222aaf37cf72","slug":"155465508116-utter-kashi-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"सामरिक महत्व की अग्रिम चौकियों तक सड़क पहुंचाए बिना कैसे होगी राष्ट्र की सुरक्षा?","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
सामरिक महत्व की अग्रिम चौकियों तक सड़क पहुंचाए बिना कैसे होगी राष्ट्र की सुरक्षा?
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उत्तरकाशी। लोकसभा चुनाव में राष्ट्रीय सुरक्षा और सेना का पराक्रम बड़ा मुद्दा बना हुआ है, लेकिन जिले में भारत-चीन सीमा पर सड़कों के अभाव में सैनिक मीलों पगडंडियां लांघ कर अग्रिम पोस्टों की चौकसी करने को मजबूर हैं। गंगोत्री नेशनल पार्क क्षेत्र में पगडंडियों की एप्रोच वाली अग्रिम भारतीय चौकियों तक सड़क पहुंचाने का प्रस्ताव बीते पांच सालों से उत्तरकाशी, देहरादून और दिल्ली के बीच फाइलों में ही घूम रहा है। फॉरेस्ट क्लीयरेंस की ऑन लाइन व्यवस्था और बदले फॉरमेट की वजह से अब पुराने आधे अधूरे प्रस्तावों को खारिज कर सुमला से थागला, मंडी से टीसांचकुला और त्रिपाणी से रंगमंच गाड तक कुल 40.66 किमी सड़क के प्रस्ताव नए सिरे से तैयार किए जाएंगे। हैरानी की बात है कि 34 किमी दूर भारतीय अग्रिम चौकी मुनिंगला दर्रे तक सड़क पहुंचाने का अभी तक कोई प्रस्ताव ही नहीं है।
थागला व टीसांचकुला के पार हमारे बार्डर के करीब चीन वर्षों पहले सतलुज के उद्गम होपगाड़ के पास अपने क्षेत्र में हवाई पट्टी और भारी वाहनों की आवाजाही लायक सड़क तैयार कर चुका है। अग्रिम भारतीय चौकियों को घेरने की चीन की सामरिक तैयारियों को देखते हुए मौजूदा सरकार के अस्तित्व में आते ही पीएम नरेंद्र मोदी ने सीमावर्ती क्षेत्र में सड़क इंफ्रास्ट्रक्चर मजबूत करने की घोषणा की थी। अन्य क्षेत्रों के अलावा उत्तरकाशी बार्डर की ओर भी कुछ सड़कें बनीं, लेकिन अभी यहां सुमला से थागला-एक 16.85 किमी, मंडी से टीसांचकुला 17.60 किमी और त्रिपाणी से रंगमंच गाड 6.21 किमी सड़क का प्रस्ताव अभी तक तैयार नहीं हो पाया है।
गंगोत्री नेशनल पार्क प्रशासन स्वीकार करता है कि पूर्व में अग्रिम सीमावर्ती चौकियों को जोड़ने के लिए पहले 56 किमी और फिर संशोधित करके 45.5 किमी का प्रस्ताव तैयार करके नेशनल वाइल्ड लाइफ बोर्ड को भेजा गया था। अब नए फॉरमेट और फॉरेस्ट क्लीयरेंस की ऑन लाइन व्यवस्था के कारण पूर्व में सर्वेक्षण की त्रुटियों को राज्य स्तर पर ठीक किया जा रहा है। नीलापाणी से मुनिंगला अग्रिम चौकी तक सड़क के लिए पार्क प्रशासन ने 81.60 हेक्टेयर जमीन के हस्तांतरण का ब्योरा तो तैयार कर लिया है, लेकिन इस सड़क का प्रस्ताव कहीं कागजों में भी नहीं है। ऐसे में भारतीय सीमा पर तैनात सुरक्षा बलों को नियमित पेट्रोलिंग में भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। सड़क स्वीकृति में हो रही लेटलतीफी को राष्ट्रीय सुरक्षा के लिहाज से गंभीर चूक माना जा रहा है।
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बार्डर की ओर बर्फ पिघलने के बाद अप्रैल में केंद्र से आ रहे विशेषज्ञ, केंद्रीय लोक निर्माण विभाग और पार्क प्रशासन सीमावर्ती क्षेत्र में प्रस्तावित 40.66 किमी सड़कों का संयुक्त निरीक्षण करेंगे। इसके बाद प्रस्ताव तैयार कर राज्य स्तर से नेशनल वाइल्ड लाइफ बोर्ड को भेजा जाएगा। भूमि हस्तांतरण की ऑन लाइन व्यवस्था और नए फॉरमेट के कारण पुराने प्रस्तावों को नए सिरे से तैयार करने में देरी हो रही है।
नंदावल्लभ शर्मा, उपनिदेशक गंगोत्री नेशनल पार्क उत्तरकाशी।
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थागला व टीसांचकुला के पार हमारे बार्डर के करीब चीन वर्षों पहले सतलुज के उद्गम होपगाड़ के पास अपने क्षेत्र में हवाई पट्टी और भारी वाहनों की आवाजाही लायक सड़क तैयार कर चुका है। अग्रिम भारतीय चौकियों को घेरने की चीन की सामरिक तैयारियों को देखते हुए मौजूदा सरकार के अस्तित्व में आते ही पीएम नरेंद्र मोदी ने सीमावर्ती क्षेत्र में सड़क इंफ्रास्ट्रक्चर मजबूत करने की घोषणा की थी। अन्य क्षेत्रों के अलावा उत्तरकाशी बार्डर की ओर भी कुछ सड़कें बनीं, लेकिन अभी यहां सुमला से थागला-एक 16.85 किमी, मंडी से टीसांचकुला 17.60 किमी और त्रिपाणी से रंगमंच गाड 6.21 किमी सड़क का प्रस्ताव अभी तक तैयार नहीं हो पाया है।
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गंगोत्री नेशनल पार्क प्रशासन स्वीकार करता है कि पूर्व में अग्रिम सीमावर्ती चौकियों को जोड़ने के लिए पहले 56 किमी और फिर संशोधित करके 45.5 किमी का प्रस्ताव तैयार करके नेशनल वाइल्ड लाइफ बोर्ड को भेजा गया था। अब नए फॉरमेट और फॉरेस्ट क्लीयरेंस की ऑन लाइन व्यवस्था के कारण पूर्व में सर्वेक्षण की त्रुटियों को राज्य स्तर पर ठीक किया जा रहा है। नीलापाणी से मुनिंगला अग्रिम चौकी तक सड़क के लिए पार्क प्रशासन ने 81.60 हेक्टेयर जमीन के हस्तांतरण का ब्योरा तो तैयार कर लिया है, लेकिन इस सड़क का प्रस्ताव कहीं कागजों में भी नहीं है। ऐसे में भारतीय सीमा पर तैनात सुरक्षा बलों को नियमित पेट्रोलिंग में भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। सड़क स्वीकृति में हो रही लेटलतीफी को राष्ट्रीय सुरक्षा के लिहाज से गंभीर चूक माना जा रहा है।
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बार्डर की ओर बर्फ पिघलने के बाद अप्रैल में केंद्र से आ रहे विशेषज्ञ, केंद्रीय लोक निर्माण विभाग और पार्क प्रशासन सीमावर्ती क्षेत्र में प्रस्तावित 40.66 किमी सड़कों का संयुक्त निरीक्षण करेंगे। इसके बाद प्रस्ताव तैयार कर राज्य स्तर से नेशनल वाइल्ड लाइफ बोर्ड को भेजा जाएगा। भूमि हस्तांतरण की ऑन लाइन व्यवस्था और नए फॉरमेट के कारण पुराने प्रस्तावों को नए सिरे से तैयार करने में देरी हो रही है।
नंदावल्लभ शर्मा, उपनिदेशक गंगोत्री नेशनल पार्क उत्तरकाशी।