{"_id":"5c9cecdebdec2214411987f7","slug":"155378820912-utter-kashi-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"मंडी के अभाव में बिचौलियों के हाथों मेहनत की कमाई लुटाने को मजबूर हैं किसान","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
मंडी के अभाव में बिचौलियों के हाथों मेहनत की कमाई लुटाने को मजबूर हैं किसान
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
नौगांव (उत्तरकाशी)। खेती-बागवानी पर टिकी आजीविका वाले रवाईं घाटी के किसानों को क्षेत्र में एक अदद मंडी का इंतजार है। राज्य बनने के दो दशक बाद भी सरकार ने यहां मंडी की स्थापना नहीं की। वर्ष 2010 में तत्कालीन भाजपा सरकार ने नौगांव में मंडी समिति को स्वीकृति तो दी, लेकिन अभी तक मंडी नहीं खुली।
रवाईं घाटी के लोगों की आजीविका खेती-बागवानी पर टिकी है। बड़े किसान को स्वयं अपने उत्पाद मैदानी मंडियों तक पहुंचाकर मुनाफा कमाते हैं, लेकिन छोटे किसान बिचौलियों के माध्यम से अपने उत्पाद बेचने को मजबूर हैं। फल, सब्जी एवं नकदी फसलों के व्यवसायिक उत्पादन को देखते हुए क्षेत्र के किसान लंबे समय से रवाईं घाटी में मंडी स्थापित करने की मांग कर रहे हैं। वर्ष 2010 में तत्कालीन भाजपा सरकार ने नौगांव में मंडी समिति को स्वीकृति तो दी, लेकिन मंडी आज तक नहीं खुली। ऐसे में सरकार की किसानों की आय दोगुनी करने की घोषणा परवान नहीं चढ़ पा रही है और किसानों में रोष है।
किसान मेहनत कर खेती-बागवानी को आजीविका का जरिया बनाने को तैयार हैं, लेकिन विपणन की ठोस व्यवस्था के अभाव में किसानों को उनकी मेहनत का वाजिब दाम नहीं मिल पाता है। क्षेत्र में मंडी खोलकर विपणन के इंतजाम करके ही किसानों की आय में इजाफा किया जा सकता है।
विज्ञापन
जयेंद्र राणा, अध्यक्ष देवराणा घाटी फल एवं सब्जी उत्पादक एसोसिएशन नौगांव
विज्ञापन
रवाईं घाटी के लोगों की आजीविका खेती-बागवानी पर टिकी है। बड़े किसान को स्वयं अपने उत्पाद मैदानी मंडियों तक पहुंचाकर मुनाफा कमाते हैं, लेकिन छोटे किसान बिचौलियों के माध्यम से अपने उत्पाद बेचने को मजबूर हैं। फल, सब्जी एवं नकदी फसलों के व्यवसायिक उत्पादन को देखते हुए क्षेत्र के किसान लंबे समय से रवाईं घाटी में मंडी स्थापित करने की मांग कर रहे हैं। वर्ष 2010 में तत्कालीन भाजपा सरकार ने नौगांव में मंडी समिति को स्वीकृति तो दी, लेकिन मंडी आज तक नहीं खुली। ऐसे में सरकार की किसानों की आय दोगुनी करने की घोषणा परवान नहीं चढ़ पा रही है और किसानों में रोष है।
विज्ञापन
किसान मेहनत कर खेती-बागवानी को आजीविका का जरिया बनाने को तैयार हैं, लेकिन विपणन की ठोस व्यवस्था के अभाव में किसानों को उनकी मेहनत का वाजिब दाम नहीं मिल पाता है। क्षेत्र में मंडी खोलकर विपणन के इंतजाम करके ही किसानों की आय में इजाफा किया जा सकता है।
विज्ञापन
जयेंद्र राणा, अध्यक्ष देवराणा घाटी फल एवं सब्जी उत्पादक एसोसिएशन नौगांव