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जिले ने शहीद तो बहुत दिए, लेकिन शहादत के सम्मान में नहीं बना कोई स्मारक
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उत्तरकाशी। जिले ने शहीद तो बहुत दिए, लेकिन यहां सरकारी तंत्र शहीदों की शहादत को उचित सम्मान देने में नाकाम है। अब तक जिले के 12 जवान देश की रक्षा में शहीद हो चुके हैं। इसके बावजूद अभी तक उनकी स्मृति में जनपद में एक अदद शहीद स्मारक तक नहीं बन पाया है।
वर्ष 1971 में भारत-पाक युद्ध में शहीद हुए पटारा गांव निवासी गार्ड्समैन सुंदर सिंह का फोटो भी उनकी शहादत के 47 साल बाद उपलब्ध हो पाया। करीब 15 वर्ष पूर्व जिला मुख्यालय पर लोनिवि निरीक्षण भवन के पीछे शहीद पार्क का निर्माण कराया गया। जिसे बाद में बारातघर और अब सीवर ट्रीटमेंट प्लांट में बदल दिया गया। इसके बाद तिलोथ पुल के निकट शहीद स्मारक एवं पार्क बनाया गया, जो वर्ष 2012 में गंगा भागीरथी बाढ़ में तबाह हो गया। तब से अभी तक जनपद में कहीं शहीद स्मारक या शहीद पार्क का निर्माण नहीं कराया जा सका है।
पूर्व सैनिक संगठन के संरक्षक मेजर (सेनि) आरएस जमनाल, अध्यक्ष मुरारी सिंह पोखरियाल का कहना है कि शहीदों को सम्मान के साथ ही लोगों में सेना के प्रति सम्मान और देशभक्ति की भावना मजबूत करने के उद्देश्य से शहीद स्मारकों का निर्माण किया जाता है। उन्होंने कहा कि शहीद स्मारक बनाने के लिए निरंतर शासन-प्रशासन से संपर्क किया जा रहा है। अब जोशियाड़ा बैराज के किनारे शहीद पार्क के लिए जमीन उपलब्ध करायी गई है।
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यह जवान हुए हैं अभी तक शहीद
उत्तरकाशी। पटारा गांव निवासी गार्ड्समैन सुंदर सिंह वर्ष 1971 के भारत-पाक युद्ध में शहीद हुए थे। इनके अलावा ऑपरेशन रक्षक में लदाड़ी गांव निवासी मुरारी लाल, धरासू गांव के मोहन लाल, पोखरियालगांव के हमीर सिंह पोखरियाल, गमरी भूटाणू के दिनेश कुमार एवं मोरी के राकेश चौहान, कारगिल युद्ध में सर्प चिन्यालीसौड़ के सेना के दिनेश चंद कुमाईं एवं पोल गांव बड़कोट निवासी आईटीबीपी के आशाराम जगूड़ी, ऑपरेशन पराक्रम में सर्प चिन्यालीसौड़ के अर्जुन सिंह परमार, ऑपरेशन रेहनु में खालसी चिन्यालीसौड़ के सेना मेडल एवं शौर्य चक्र विजेता अतोल सिंह पंवार, ऑपरेशन हिफाजत में बंद्राणी भटवाड़ी के विपिन शाह ने भी देश के लिए अपने प्राण न्योछावर कर दिए। अब पुलवामा कश्मीर में हुए आतंकी हमले में बनकोट चिन्यालीसौड़ के मोहन लाल रतूड़ी शहीद हुए हैं।
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वर्ष 1971 में भारत-पाक युद्ध में शहीद हुए पटारा गांव निवासी गार्ड्समैन सुंदर सिंह का फोटो भी उनकी शहादत के 47 साल बाद उपलब्ध हो पाया। करीब 15 वर्ष पूर्व जिला मुख्यालय पर लोनिवि निरीक्षण भवन के पीछे शहीद पार्क का निर्माण कराया गया। जिसे बाद में बारातघर और अब सीवर ट्रीटमेंट प्लांट में बदल दिया गया। इसके बाद तिलोथ पुल के निकट शहीद स्मारक एवं पार्क बनाया गया, जो वर्ष 2012 में गंगा भागीरथी बाढ़ में तबाह हो गया। तब से अभी तक जनपद में कहीं शहीद स्मारक या शहीद पार्क का निर्माण नहीं कराया जा सका है।
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पूर्व सैनिक संगठन के संरक्षक मेजर (सेनि) आरएस जमनाल, अध्यक्ष मुरारी सिंह पोखरियाल का कहना है कि शहीदों को सम्मान के साथ ही लोगों में सेना के प्रति सम्मान और देशभक्ति की भावना मजबूत करने के उद्देश्य से शहीद स्मारकों का निर्माण किया जाता है। उन्होंने कहा कि शहीद स्मारक बनाने के लिए निरंतर शासन-प्रशासन से संपर्क किया जा रहा है। अब जोशियाड़ा बैराज के किनारे शहीद पार्क के लिए जमीन उपलब्ध करायी गई है।
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यह जवान हुए हैं अभी तक शहीद
उत्तरकाशी। पटारा गांव निवासी गार्ड्समैन सुंदर सिंह वर्ष 1971 के भारत-पाक युद्ध में शहीद हुए थे। इनके अलावा ऑपरेशन रक्षक में लदाड़ी गांव निवासी मुरारी लाल, धरासू गांव के मोहन लाल, पोखरियालगांव के हमीर सिंह पोखरियाल, गमरी भूटाणू के दिनेश कुमार एवं मोरी के राकेश चौहान, कारगिल युद्ध में सर्प चिन्यालीसौड़ के सेना के दिनेश चंद कुमाईं एवं पोल गांव बड़कोट निवासी आईटीबीपी के आशाराम जगूड़ी, ऑपरेशन पराक्रम में सर्प चिन्यालीसौड़ के अर्जुन सिंह परमार, ऑपरेशन रेहनु में खालसी चिन्यालीसौड़ के सेना मेडल एवं शौर्य चक्र विजेता अतोल सिंह पंवार, ऑपरेशन हिफाजत में बंद्राणी भटवाड़ी के विपिन शाह ने भी देश के लिए अपने प्राण न्योछावर कर दिए। अब पुलवामा कश्मीर में हुए आतंकी हमले में बनकोट चिन्यालीसौड़ के मोहन लाल रतूड़ी शहीद हुए हैं।