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थम नहीं रहा कूड़ा डालने के खिलाफ आंदोलन
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उत्तरकाशी। हाईकोर्ट से स्टे के बाद भी कंसैण गांव के निकट कूड़ा निस्तारण केंद्र बनाए जाने से आशंकित ग्रामीणों ने मंगलवार से जल विद्युत निगम कार्यालय के समक्ष क्रमिक धरना आंदोलन शुरू कर दिया है। उन्होंने जल विद्युत निगम के उच्चाधिकारियों व ऊर्जा सचिव को ज्ञापन प्रेषित कर परियोजना के लिए अधिग्रहित जमीन कूड़ा निस्तारण केंद्र के लिए हस्तांतरित नहीं करने की मांग की है।
प्रशासन ने बीते आठ जनवरी को पुलिस बल की मदद से कंसैण गांव के निकट जल विद्युत निगम की जमीन पर भारी मात्रा में कूड़ा उड़ेल दिया। हालांकि इसके तुरंत बाद ग्रामीण हाईकोर्ट से स्टे ले आए, जिससे यहां कूड़ा उड़ेलना तो बंद हो गया, लेकिन यहां पूर्व में डाले गए टनों कूड़े से उठती दुर्गंध परेशानी का कारण बनी हुई है। इससे न सिर्फ कंसैण के ग्रामीणों को बल्कि गंगा भागीरथी के दूसरे छोर पर पुलिस लाईन में रहने वाले पुलिस के जवानों और उनके परिजनों को भी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। इस पर पुलिस अधिकारियों द्वारा भी आपत्ति दर्ज कराई जा चुकी है। इस बीच अंदरखाने जमीन को जल विद्युत निगम से हस्तांतरित कराकर यहां स्थायी डंपिंग जोन बनाने की सुगबुगाहट को देखते हुए कंसैण के ग्रामीणों ने फिर मोर्चा खोल दिया है।
मंगलवार को ग्रामीण जोशियाड़ा बैराज के निकट स्थित जल विद्युत निगम कार्यालय पहुंचे। यहां उन्होंने निगम के उच्चाधिकारियों व ऊर्जा सचिव को ज्ञापन प्रेषित कर परियोजना के लिए अधिग्रहित की गई जमीन कूड़ा डंपिंग के लिए हस्तांतरित नहीं करने की मांग की। उन्होंने कहा कि ग्रामीणों ने अपनी बेशकीमती खेती की जमीन राष्ट्रहित में परियोजना निर्माण के लिए कौड़ियों के भाव सरकार को दी। अब परियोजना निर्माण के बाद बची जमीन को यदि कूड़ा डंपिंग के लिए ट्रांसफर किया गया, तो ग्रामीण पुरजोर विरोध करेंगे। इस मौके पर कंसैण के प्रधान किशोर बिष्ट, संतोष नौटियाल, महावीर बिष्ट, राजेंद्र पंवार, शूरवीर बिष्ट, जितेंद्र पंवार, इंद्रदेव नौटियाल, जगदंबा देवी, सुलोचना देवी, कमली, राजेंद्री, सुशीला, कृष्णा आदि मौजूद थे।
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प्रशासन ने बीते आठ जनवरी को पुलिस बल की मदद से कंसैण गांव के निकट जल विद्युत निगम की जमीन पर भारी मात्रा में कूड़ा उड़ेल दिया। हालांकि इसके तुरंत बाद ग्रामीण हाईकोर्ट से स्टे ले आए, जिससे यहां कूड़ा उड़ेलना तो बंद हो गया, लेकिन यहां पूर्व में डाले गए टनों कूड़े से उठती दुर्गंध परेशानी का कारण बनी हुई है। इससे न सिर्फ कंसैण के ग्रामीणों को बल्कि गंगा भागीरथी के दूसरे छोर पर पुलिस लाईन में रहने वाले पुलिस के जवानों और उनके परिजनों को भी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। इस पर पुलिस अधिकारियों द्वारा भी आपत्ति दर्ज कराई जा चुकी है। इस बीच अंदरखाने जमीन को जल विद्युत निगम से हस्तांतरित कराकर यहां स्थायी डंपिंग जोन बनाने की सुगबुगाहट को देखते हुए कंसैण के ग्रामीणों ने फिर मोर्चा खोल दिया है।
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मंगलवार को ग्रामीण जोशियाड़ा बैराज के निकट स्थित जल विद्युत निगम कार्यालय पहुंचे। यहां उन्होंने निगम के उच्चाधिकारियों व ऊर्जा सचिव को ज्ञापन प्रेषित कर परियोजना के लिए अधिग्रहित की गई जमीन कूड़ा डंपिंग के लिए हस्तांतरित नहीं करने की मांग की। उन्होंने कहा कि ग्रामीणों ने अपनी बेशकीमती खेती की जमीन राष्ट्रहित में परियोजना निर्माण के लिए कौड़ियों के भाव सरकार को दी। अब परियोजना निर्माण के बाद बची जमीन को यदि कूड़ा डंपिंग के लिए ट्रांसफर किया गया, तो ग्रामीण पुरजोर विरोध करेंगे। इस मौके पर कंसैण के प्रधान किशोर बिष्ट, संतोष नौटियाल, महावीर बिष्ट, राजेंद्र पंवार, शूरवीर बिष्ट, जितेंद्र पंवार, इंद्रदेव नौटियाल, जगदंबा देवी, सुलोचना देवी, कमली, राजेंद्री, सुशीला, कृष्णा आदि मौजूद थे।
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