{"_id":"5bf2e4e3bdec2269af64a1bd","slug":"154264501210-utter-kashi-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"खस्ताहाल सड़कें बन रही हैं हादसे की वजह","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
खस्ताहाल सड़कें बन रही हैं हादसे की वजह
Updated Mon, 19 Nov 2018 09:59 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
उत्तरकाशी। डामटा में हुए बस हादसे को गुजरे 24 घंटे भी नहीं बीते थे कि नौगांव के निकट एक और सड़क हादसे में तीन लोगों की मौत हो गई। यही नहीं बीते तीन माह के भीतर जिले में हुई बड़ी सड़क दुर्घटनाओं में जान गंवाने वालों की संख्या 46 पहुंच गई है। भूस्खलन के कारण हुई भुक्की वाली घटना को छोड़ दें, तो शेष हादसों के पीछे खस्ताहाल सड़क और वाहन चालक की लापरवाही ही बड़ा कारण रही। इसके बावजूद शासन प्रशासन सड़क हादसों को रोकने का कोई ठोस कार्ययोजना नहीं बना रहे हैं।
रविवार को हुए बस हादसे के पीछे वाहन चालक द्वारा बस का स्टेयरिंग रॉड टूटने को कारण बताया जा रहा है, जबकि कई लोगों के अनुसार तेज रफ्तार व ड्राइवर की लापरवाही भी हादसे का कारण हो सकता है। वहीं हादसे वाले स्थान पर क्रैश बैरियर मौजूद नहीं था, जिससे सरकारी विभागों पर भी अंगुलियां उठ रही हैं। हालांकि घटना की जांच में जुटे अधिकारी अभी तक हादसे का स्पष्ट कारण बताने से परहेज कर रहे हैं। उधर, जिले में हुए पुराने हादसों को देखें तो अधिकांश के पीछे खस्ताहाल सड़कें, सुरक्षा इंतजामों की कमी, वाहन चालकों की लापरवाही व वाहनों में तकनीकी खराबी मुख्य कारण रहे हैं। हर बड़े हादसे के बाद शासन-प्रशासन द्वारा मजिस्ट्रीयल जांच के आदेश देकर इतिश्री कर दी जाती है। आलम यह है कि इस तरह की अधिकांश जांचें अभी तक पूरी नहीं हो पायी है, जो जांच पूरी भी हुई हैं तो इनमें दिए गए सुझावों के अनुरूप धरातल पर कार्रवाई का अभी इंतजार है।
कोट:
डामटा में दुर्घटनाग्रस्त हुई बस विपरीत दिशा में जाकर खाई में गिरी थी, जबकि उक्त स्थान पर सड़क की चौड़ाई करीब 30 फीट है। बस के स्टेयरिंग रॉड के टूटने की बात को तकनीकी तौर पर पुष्ट नहीं किया जा सकता, क्योंकि बस की फिटनेस आदि कागज पूरे हैं। हालांकि जांच पूरी होने के बाद ही घटना के असल कारणों का पता चलेगा। जिले में वाहन हादसों को रोकने के लिए नियमित तौर पर चेकिंग अभियान चलाया जा रहा है। यात्री वाहनों को भी बिना फिटनेस के परमिट नहीं दिया जाता है।
विज्ञापन
चक्रपाणि मिश्र, एआरटीओ उत्तरकाशी।
कोट:
डामटा में हुए बस हादसे की जांच की जा रही है। घटना के पीछे गलती पाए जाने पर संबंधित के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। एनएच, लोनिवि, बीआरओ आदि सड़क निर्माण विभागों को अपनी सड़कों की नियमित मरम्मत कराने तथा डेंजर जोन में सुरक्षा इंतजाम करने के निर्देश दिए गए हैं। परिवहन एवं पुलिस विभाग को नियमित चेकिंग अभियान चलाने के निर्देश भी दिए गए हैं। वाहन चालकों को सड़क सुरक्षा संबंधी नियमों के प्रति सजग रहने की जरूरत है। इसके लिए जागरूकता अभियान चलाए जा रहे हैं।
डा. आशीष चौहान, जिलाधिकारी उत्तरकाशी।
बॉक्स:
उत्तरकाशी जनपद में हुए बड़े सड़क हादसे-
1- 20 सितंबर 1995 को डबराणी के पास बस गंगा भागीरथी में गिरने से 70 लोगों की मौत
2- 9 जुलाई 2006 को नालूपाणी में बस गिरने से 22 लोगों की मौत
3- 3 जुलाई 2008 को नाकुरी के पास बस गिरने से 13 लोगों की मौत
4- 21 जुलाई 2008 को सुक्की टॉप के पास बस गिरने से 14 लोगों की मौत
5- 4 जुलाई 2009 को भटवाड़ी गंगनानी के बीच बस गंगा भागीरथी में गिरने से40 लोगों की मौत
6- 10 दिसंबर 2009 को नालूपाणी में टैक्सी वाहन गंगा भागीरथी में गिरनेसे 12 लोगों की मौत
7- 1 अगस्त 2010 को डबराणी के पास ट्रक खड्ड में गिरने से 27 कांवड़यात्रियों की मौत
8- 23 मई 2017 को गंगोत्री हाईवे पर नालूपाणी के पास बस गिरने से 26 लोगों की मौत
9- 4 जून 2017 को गंगोत्री हाईवे पर हेलगूगाड के निकट टैक्सी गंगाभागीरथी में गिरने से 12 लोगों की मौत
10- 3 सितंबर 2018 गंगोत्री हाईवे पर भुक्की के पास टैंपों ट्रैवलर गिरने से 14 की मौत
11- 5 अक्तूबर 2018 गंगोत्री हाईवे पर सुनगर के पास टैंपो ट्रैवलर गिरने से 10 यात्रियों की मौत
12- 15 अक्तूबर 2018 धरासू-जोगत मोटर मार्ग पर टैक्सी हादसे में 5 लोगों की मौत
13- 18 नवंबर 2018 डामटा के निकट यमुनोत्री हाईवे पर बस हादसे में 14 लोगों की मौत
(नोट: वर्ष 2017 से नवंबर 2018 तक जिले में छोटे-बड़े 35 सड़क हादसों में 132 लोगों की मौत हो चुकी है)
विज्ञापन
रविवार को हुए बस हादसे के पीछे वाहन चालक द्वारा बस का स्टेयरिंग रॉड टूटने को कारण बताया जा रहा है, जबकि कई लोगों के अनुसार तेज रफ्तार व ड्राइवर की लापरवाही भी हादसे का कारण हो सकता है। वहीं हादसे वाले स्थान पर क्रैश बैरियर मौजूद नहीं था, जिससे सरकारी विभागों पर भी अंगुलियां उठ रही हैं। हालांकि घटना की जांच में जुटे अधिकारी अभी तक हादसे का स्पष्ट कारण बताने से परहेज कर रहे हैं। उधर, जिले में हुए पुराने हादसों को देखें तो अधिकांश के पीछे खस्ताहाल सड़कें, सुरक्षा इंतजामों की कमी, वाहन चालकों की लापरवाही व वाहनों में तकनीकी खराबी मुख्य कारण रहे हैं। हर बड़े हादसे के बाद शासन-प्रशासन द्वारा मजिस्ट्रीयल जांच के आदेश देकर इतिश्री कर दी जाती है। आलम यह है कि इस तरह की अधिकांश जांचें अभी तक पूरी नहीं हो पायी है, जो जांच पूरी भी हुई हैं तो इनमें दिए गए सुझावों के अनुरूप धरातल पर कार्रवाई का अभी इंतजार है।
विज्ञापन
कोट:
डामटा में दुर्घटनाग्रस्त हुई बस विपरीत दिशा में जाकर खाई में गिरी थी, जबकि उक्त स्थान पर सड़क की चौड़ाई करीब 30 फीट है। बस के स्टेयरिंग रॉड के टूटने की बात को तकनीकी तौर पर पुष्ट नहीं किया जा सकता, क्योंकि बस की फिटनेस आदि कागज पूरे हैं। हालांकि जांच पूरी होने के बाद ही घटना के असल कारणों का पता चलेगा। जिले में वाहन हादसों को रोकने के लिए नियमित तौर पर चेकिंग अभियान चलाया जा रहा है। यात्री वाहनों को भी बिना फिटनेस के परमिट नहीं दिया जाता है।
विज्ञापन
चक्रपाणि मिश्र, एआरटीओ उत्तरकाशी।
कोट:
डामटा में हुए बस हादसे की जांच की जा रही है। घटना के पीछे गलती पाए जाने पर संबंधित के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। एनएच, लोनिवि, बीआरओ आदि सड़क निर्माण विभागों को अपनी सड़कों की नियमित मरम्मत कराने तथा डेंजर जोन में सुरक्षा इंतजाम करने के निर्देश दिए गए हैं। परिवहन एवं पुलिस विभाग को नियमित चेकिंग अभियान चलाने के निर्देश भी दिए गए हैं। वाहन चालकों को सड़क सुरक्षा संबंधी नियमों के प्रति सजग रहने की जरूरत है। इसके लिए जागरूकता अभियान चलाए जा रहे हैं।
डा. आशीष चौहान, जिलाधिकारी उत्तरकाशी।
बॉक्स:
उत्तरकाशी जनपद में हुए बड़े सड़क हादसे-
1- 20 सितंबर 1995 को डबराणी के पास बस गंगा भागीरथी में गिरने से 70 लोगों की मौत
2- 9 जुलाई 2006 को नालूपाणी में बस गिरने से 22 लोगों की मौत
3- 3 जुलाई 2008 को नाकुरी के पास बस गिरने से 13 लोगों की मौत
4- 21 जुलाई 2008 को सुक्की टॉप के पास बस गिरने से 14 लोगों की मौत
5- 4 जुलाई 2009 को भटवाड़ी गंगनानी के बीच बस गंगा भागीरथी में गिरने से40 लोगों की मौत
6- 10 दिसंबर 2009 को नालूपाणी में टैक्सी वाहन गंगा भागीरथी में गिरनेसे 12 लोगों की मौत
7- 1 अगस्त 2010 को डबराणी के पास ट्रक खड्ड में गिरने से 27 कांवड़यात्रियों की मौत
8- 23 मई 2017 को गंगोत्री हाईवे पर नालूपाणी के पास बस गिरने से 26 लोगों की मौत
9- 4 जून 2017 को गंगोत्री हाईवे पर हेलगूगाड के निकट टैक्सी गंगाभागीरथी में गिरने से 12 लोगों की मौत
10- 3 सितंबर 2018 गंगोत्री हाईवे पर भुक्की के पास टैंपों ट्रैवलर गिरने से 14 की मौत
11- 5 अक्तूबर 2018 गंगोत्री हाईवे पर सुनगर के पास टैंपो ट्रैवलर गिरने से 10 यात्रियों की मौत
12- 15 अक्तूबर 2018 धरासू-जोगत मोटर मार्ग पर टैक्सी हादसे में 5 लोगों की मौत
13- 18 नवंबर 2018 डामटा के निकट यमुनोत्री हाईवे पर बस हादसे में 14 लोगों की मौत
(नोट: वर्ष 2017 से नवंबर 2018 तक जिले में छोटे-बड़े 35 सड़क हादसों में 132 लोगों की मौत हो चुकी है)