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ट्रॉलियों की तारों पर झूल रही हैं जानें
Updated Mon, 08 Oct 2018 10:00 PM IST
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उत्तरकाशी। विषम भौगोलिक परिस्थितियों वाले सीमांत जनपद में आज भी सरकार सुरक्षित आवाजाही के इंतजाम नहीं कर पायी है। जिले में आपदा से पुल-पुलिया बहने के कारण नौ स्थानों पर ग्रामीण नदियों के आरपार तार के सहारे झूल रही ट्रॉलियों के सहारे आवाजाही करने को मजबूर हैं। जर्जर ट्रॉलियों में अंगुलियां कटने जैसे हादसे आम हैं, जबकि मोरी के सांद्रा सल्ला गांव में ट्रॉली से गिरने के कारण एक बच्ची की मौत हो चुकी है।
पहाड़ी जनपद उत्तरकाशी में गंगा, यमुना एवं टौंस जैसी बड़ी नदियों के साथ ही सहायक नदियों व गाड-गदेरों की भरमार है। जिले के अधिकांश गांवों तक पहुंचने के लिए इन गाड-गदेरों को पार कर जाना पड़ता है। इन्हें सुरक्षित ढंग से पार करने के लिए पक्की पुलियाओं की जरूरत है, लेकिन दूरस्थ क्षेत्रों में लकड़ी के अस्थायी पुलों के सहारे जोखिम भरी आवाजाही चल रही है। ये अस्थायी पुल भी हर साल बरसात में गाड-गदेरों में उफान आने पर बह जाते हैं। पानी कम होने पर ग्रामीण स्वयं ही गिरे पड़े पेड़ों के सहारे अस्थायी पुलिया का निर्माण कर किसी तरह काम चला रहे हैं, जबकि सरकारी तंत्र की ओर से जनपद में नौ स्थानों पर ट्रालियां लगाकर आवाजाही की व्यवस्था की गई है।
जिले में मोरी प्रखंड के सावणी, भंक्वाड़, कलाप, नूराणू, सांद्रा सल्ला, लिवाड़ी, नौगांव प्रखंड के खरादी, भटवाड़ी के नौलुणा एवं चामकोट गांव के ग्रामीण ट्रालियों के सहारे आवाजाही करने को मजबूर हैं। देखरेख के अभाव में अधिकांश ट्रालियां भी जर्जर हालत में हैं। रस्सी के सहारे ट्राली खींचते समय चोटिल होने की घटनाएं आम हैं, जबकि बीते सात जुलाई को मोरी प्रखंड के सांद्रा सल्ला गांव में ट्राली के तार में उलझकर गिरने से एक छह साल की बच्ची की टौंस नदी में बहने से मौत हो चुकी है। इसके बावजूद सरकार सुध लेने को राजी नहीं। सरकार से सुरक्षित रास्तों की मांग कर थक चुके ग्रामीण अब इसे नियति मानकर ट्रालियों के सहारे जान जोखिम में डालकर आवाजाही करने को मजबूर हैं।
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ज्यादा दूरी तय करने से बचने को जोखिम में डाल रहे जान
उत्तरकाशी। मोरा गांव के निकट जंगल में दशकों से गुर्जर परिवार निवास करते हैं। मोरा गांव से ब्लाक मुख्यालय तक आवाजाही के लिए टौंस नदी पर मोटर पुल बना हुआ है। इस रास्ते मोरी बाजार पहुंचने के लिए करीब ढाई किमी अतिरिक्त दूरी तय करने की परेशानी से बचने के लिए गुर्जरों ने अपने डेरे के पास से ही बिजली का तार टौंस नदी के आरपार पिलर बनाकर बांध के इस पर गरारी के सहारे नदी पार करने की कामचलाऊ व्यवस्था बनायी हुई है।
वर्षों से चल रही इस व्यवस्था से पूर्व में कभी कोई हादसा नहीं हुआ, लेकिन रविवार को तार टूटने से हुए हादसे में एक युवती की मौत ने इस काम चलाऊ व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। थानाध्यक्ष दीप कुमार ने स्वीकारा कि इस तरह तार बांध कर नदी पार करने की व्यवस्था पूरी तरह अवैध है। उन्होंने कहा कि यह व्यवस्था जंगलात की जमीन पर बनायी है और वन विभाग को ही इसके खिलाफ कार्रवाई करनी चाहिए।
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पहाड़ी जनपद उत्तरकाशी में गंगा, यमुना एवं टौंस जैसी बड़ी नदियों के साथ ही सहायक नदियों व गाड-गदेरों की भरमार है। जिले के अधिकांश गांवों तक पहुंचने के लिए इन गाड-गदेरों को पार कर जाना पड़ता है। इन्हें सुरक्षित ढंग से पार करने के लिए पक्की पुलियाओं की जरूरत है, लेकिन दूरस्थ क्षेत्रों में लकड़ी के अस्थायी पुलों के सहारे जोखिम भरी आवाजाही चल रही है। ये अस्थायी पुल भी हर साल बरसात में गाड-गदेरों में उफान आने पर बह जाते हैं। पानी कम होने पर ग्रामीण स्वयं ही गिरे पड़े पेड़ों के सहारे अस्थायी पुलिया का निर्माण कर किसी तरह काम चला रहे हैं, जबकि सरकारी तंत्र की ओर से जनपद में नौ स्थानों पर ट्रालियां लगाकर आवाजाही की व्यवस्था की गई है।
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जिले में मोरी प्रखंड के सावणी, भंक्वाड़, कलाप, नूराणू, सांद्रा सल्ला, लिवाड़ी, नौगांव प्रखंड के खरादी, भटवाड़ी के नौलुणा एवं चामकोट गांव के ग्रामीण ट्रालियों के सहारे आवाजाही करने को मजबूर हैं। देखरेख के अभाव में अधिकांश ट्रालियां भी जर्जर हालत में हैं। रस्सी के सहारे ट्राली खींचते समय चोटिल होने की घटनाएं आम हैं, जबकि बीते सात जुलाई को मोरी प्रखंड के सांद्रा सल्ला गांव में ट्राली के तार में उलझकर गिरने से एक छह साल की बच्ची की टौंस नदी में बहने से मौत हो चुकी है। इसके बावजूद सरकार सुध लेने को राजी नहीं। सरकार से सुरक्षित रास्तों की मांग कर थक चुके ग्रामीण अब इसे नियति मानकर ट्रालियों के सहारे जान जोखिम में डालकर आवाजाही करने को मजबूर हैं।
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उत्तरकाशी। मोरा गांव के निकट जंगल में दशकों से गुर्जर परिवार निवास करते हैं। मोरा गांव से ब्लाक मुख्यालय तक आवाजाही के लिए टौंस नदी पर मोटर पुल बना हुआ है। इस रास्ते मोरी बाजार पहुंचने के लिए करीब ढाई किमी अतिरिक्त दूरी तय करने की परेशानी से बचने के लिए गुर्जरों ने अपने डेरे के पास से ही बिजली का तार टौंस नदी के आरपार पिलर बनाकर बांध के इस पर गरारी के सहारे नदी पार करने की कामचलाऊ व्यवस्था बनायी हुई है।
वर्षों से चल रही इस व्यवस्था से पूर्व में कभी कोई हादसा नहीं हुआ, लेकिन रविवार को तार टूटने से हुए हादसे में एक युवती की मौत ने इस काम चलाऊ व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। थानाध्यक्ष दीप कुमार ने स्वीकारा कि इस तरह तार बांध कर नदी पार करने की व्यवस्था पूरी तरह अवैध है। उन्होंने कहा कि यह व्यवस्था जंगलात की जमीन पर बनायी है और वन विभाग को ही इसके खिलाफ कार्रवाई करनी चाहिए।