{"_id":"5ba672f0867a557f587895fc","slug":"15376350366-utter-kashi-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"सरकारी सिस्टम ने नहीं दिया साथ तो ग्रामीणों ने स्वयं ही तैयार कर डाली पुलिया","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
सरकारी सिस्टम ने नहीं दिया साथ तो ग्रामीणों ने स्वयं ही तैयार कर डाली पुलिया
Updated Sat, 22 Sep 2018 10:20 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
उत्तरकाशी। सरकारी सिस्टम ने साथ नहीं दिया तो अगोड़ा और दंदालका के ग्रामीणों ने छानियों में फंसे अपने मवेशियों को निकालने के लिए श्रमदान कर घट्टूगाड़ में अस्थायी पुलिया बना डाली। पुलिया बनाकर ग्रामीण अपने मवेशियों को मोरापड़ा, मोरसुना एवं सिल्याण छानियों से सुरक्षित गांव लौट आए हैं।
वर्ष 2012 में असी गंगा में आई बाढ़ में घट्टूगाड़ में बना जिला पंचायत का पैदल पुल बह गया था, जिससे मोरापड़ा, मोरसुना एवं सिल्याण की छानियां अलग-थलग पड़ गई थीं। साथ ही अगोड़ा से दयारा जाने वाला ट्रैक भी अवरुद्ध हो गया था। जिला पंचायत ने तीन साल तक अस्थायी पुलिया तैयार करने पर लाखों रुपये खर्च किया, लेकिन हर साल बरसात में पानी बढ़ने पर यह व्यवस्था धराशायी होती रही। बीते दो साल से जिला पंचायत ने भी यहां पुलिया बनाने की जहमत नहीं उठाई। हालांकि प्रशासन ने यहां एक ट्राली लगाकर आवाजाही की व्यवस्था की है, लेकिन इससे मवेशियों को लाना ले जाना संभव नहीं है। ऐसे में बीते जुलाई से अगोड़ा और दंदालका गांव के करीब 40 परिवार अपने डेढ़ सौ से अधिक मवेशियों के साथ छानियों में ही फंसे हुए थे।
बीते छह साल में कांग्रेस और भाजपा सरकार के साथ ही यहां प्रशासन के जिम्मेदार अधिकारियों से गुहार लगाने के बाद भी पुलिया नहीं बनने से ग्रामीण सरकारी सिस्टम से खासे खिन्न हैं। अब ठंड बढ़ने के साथ छानियों में मवेशियों के लिए समस्या खड़ी होने पर ग्रामीणों ने स्वयं ही पुलिया बनाने का निर्णय लिया। बृहस्पतिवार को दोनों गांवों के ग्रामीण घट्टूसौड़ में एकत्र हुए। यहां उन्होंने असी गंगा के किनारे पत्थर चिनकर एबटमेंट तैयार किया और पास ही जंगल में गिरे पड़े पेड़ों की सहायता से दो दिन के भीतर पुलिया का निर्माण कर डाला। इस पुलिया के रास्ते ग्रामीण अपने मवेशियों को सुरक्षित गांव निकाल लाए हैं।
विज्ञापन
सरकारी सिस्टम से उठ रहा है ग्रामीणों का विश्वास
अगस्त 2012 में असी गंगा की बाढ़ में इस घाटी में आधा दर्जन पुल धराशायी हुए थे। सरकार ने जंगारा, डिगिला, सेकू एवं संगमचट्टी में तो पुलों का निर्माण कराया, लेकिन ग्रामीणों की जरूरत वाली घट्टूगाड़ पुलिया की सुध नहीं ली। अगोड़ा गांव निवासी संजय पंवार, सुमन पंवार आदि का कहना है कि ग्रामीणों के साथ ही डोडीताल क्षेत्र की सैर पर पहुंचने वाले पर्यटकों को भी खासी दिक्कत हो रही है, लेकिन प्रशासन इस पर ध्यान नहीं दे रहा है।
अस्थायी पुलिया बनाने में इनका रहा अहम योगदान
घट्टूसौड़ में अस्थायी पुलिया तैयार करने में अगोड़ा गांव के जयेंद्र रावत, प्रकाश पंवार, उप्पी रावत, विरोचन रावत, अवतार, जगमोहन, कमल सिंह, भाग्यान सिंह, अर्जुन, जिबू लाल, विनीता देवी, जगदंबा देवी तथा दंदालका के धर्म सिंह, दलवीर सिंह, चंदन सिंह, इंद्रदेव पंवार, उर्मिला देवी, वीना देवी, देवेंद्री देवी आदि करीब तीन दर्जन ग्रामीणों ने श्रमदान किया।
विज्ञापन
वर्ष 2012 में असी गंगा में आई बाढ़ में घट्टूगाड़ में बना जिला पंचायत का पैदल पुल बह गया था, जिससे मोरापड़ा, मोरसुना एवं सिल्याण की छानियां अलग-थलग पड़ गई थीं। साथ ही अगोड़ा से दयारा जाने वाला ट्रैक भी अवरुद्ध हो गया था। जिला पंचायत ने तीन साल तक अस्थायी पुलिया तैयार करने पर लाखों रुपये खर्च किया, लेकिन हर साल बरसात में पानी बढ़ने पर यह व्यवस्था धराशायी होती रही। बीते दो साल से जिला पंचायत ने भी यहां पुलिया बनाने की जहमत नहीं उठाई। हालांकि प्रशासन ने यहां एक ट्राली लगाकर आवाजाही की व्यवस्था की है, लेकिन इससे मवेशियों को लाना ले जाना संभव नहीं है। ऐसे में बीते जुलाई से अगोड़ा और दंदालका गांव के करीब 40 परिवार अपने डेढ़ सौ से अधिक मवेशियों के साथ छानियों में ही फंसे हुए थे।
विज्ञापन
बीते छह साल में कांग्रेस और भाजपा सरकार के साथ ही यहां प्रशासन के जिम्मेदार अधिकारियों से गुहार लगाने के बाद भी पुलिया नहीं बनने से ग्रामीण सरकारी सिस्टम से खासे खिन्न हैं। अब ठंड बढ़ने के साथ छानियों में मवेशियों के लिए समस्या खड़ी होने पर ग्रामीणों ने स्वयं ही पुलिया बनाने का निर्णय लिया। बृहस्पतिवार को दोनों गांवों के ग्रामीण घट्टूसौड़ में एकत्र हुए। यहां उन्होंने असी गंगा के किनारे पत्थर चिनकर एबटमेंट तैयार किया और पास ही जंगल में गिरे पड़े पेड़ों की सहायता से दो दिन के भीतर पुलिया का निर्माण कर डाला। इस पुलिया के रास्ते ग्रामीण अपने मवेशियों को सुरक्षित गांव निकाल लाए हैं।
विज्ञापन
सरकारी सिस्टम से उठ रहा है ग्रामीणों का विश्वास
अगस्त 2012 में असी गंगा की बाढ़ में इस घाटी में आधा दर्जन पुल धराशायी हुए थे। सरकार ने जंगारा, डिगिला, सेकू एवं संगमचट्टी में तो पुलों का निर्माण कराया, लेकिन ग्रामीणों की जरूरत वाली घट्टूगाड़ पुलिया की सुध नहीं ली। अगोड़ा गांव निवासी संजय पंवार, सुमन पंवार आदि का कहना है कि ग्रामीणों के साथ ही डोडीताल क्षेत्र की सैर पर पहुंचने वाले पर्यटकों को भी खासी दिक्कत हो रही है, लेकिन प्रशासन इस पर ध्यान नहीं दे रहा है।
अस्थायी पुलिया बनाने में इनका रहा अहम योगदान
घट्टूसौड़ में अस्थायी पुलिया तैयार करने में अगोड़ा गांव के जयेंद्र रावत, प्रकाश पंवार, उप्पी रावत, विरोचन रावत, अवतार, जगमोहन, कमल सिंह, भाग्यान सिंह, अर्जुन, जिबू लाल, विनीता देवी, जगदंबा देवी तथा दंदालका के धर्म सिंह, दलवीर सिंह, चंदन सिंह, इंद्रदेव पंवार, उर्मिला देवी, वीना देवी, देवेंद्री देवी आदि करीब तीन दर्जन ग्रामीणों ने श्रमदान किया।