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मानव कल्याण के लिए ही हुई धर्म की स्थापना
Updated Tue, 10 Jul 2018 10:04 PM IST
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उत्तरकाशी। मानव कल्याण के लिए ही धर्म की स्थापना हुई है। हिंदू धर्म की रक्षा एवं विश्व में अपनी पहचान बनाए रखने के लिए गो, गंगा एवं संस्कृति के संरक्षण की दिशा में प्रभावी प्रयास करने की जरूरत है।
बाडाहाट क्षेत्र के आराध्य कंडार देवता की अगुवाई में मेन बाजार में चल रही श्रीमद्भागवत कथा के तीसरे दिन व्यास पीठ से कथावाचक पं. सुरेश चंद्र शास्त्री ने उक्त विचार व्यक्त किए। उन्होंने धर्म के प्रतीक गो व गंगा के क्षरण पर चिंता जताते हुए कहा कि नई पीढ़ी गो एवं गंगा का महत्व नहीं समझ रही है। उन्होंने श्रद्धालुओं से ईश्वर के बताए मार्ग पर चलने का आह्वान किया। इधर, कंडार देवता मंदिर परिसर में चल रही श्रीराम कथा के आठवें दिन व्यास प्रवेश भट्ट ने श्रद्धालुओं को राम वनवास का प्रसंग सुनाया। इस मौके पर प्रद्युम्न नौटियाल, सत्य नारायण नौटियाल, जगदीश प्रसाद, डा. अरविंद नौटियाल, आशुतोष भट्ट, विमला नौटियाल, शैला देवी आदि मौजूद रहे।
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बाडाहाट क्षेत्र के आराध्य कंडार देवता की अगुवाई में मेन बाजार में चल रही श्रीमद्भागवत कथा के तीसरे दिन व्यास पीठ से कथावाचक पं. सुरेश चंद्र शास्त्री ने उक्त विचार व्यक्त किए। उन्होंने धर्म के प्रतीक गो व गंगा के क्षरण पर चिंता जताते हुए कहा कि नई पीढ़ी गो एवं गंगा का महत्व नहीं समझ रही है। उन्होंने श्रद्धालुओं से ईश्वर के बताए मार्ग पर चलने का आह्वान किया। इधर, कंडार देवता मंदिर परिसर में चल रही श्रीराम कथा के आठवें दिन व्यास प्रवेश भट्ट ने श्रद्धालुओं को राम वनवास का प्रसंग सुनाया। इस मौके पर प्रद्युम्न नौटियाल, सत्य नारायण नौटियाल, जगदीश प्रसाद, डा. अरविंद नौटियाल, आशुतोष भट्ट, विमला नौटियाल, शैला देवी आदि मौजूद रहे।
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