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प्राचीन काल से ही योगी साधकों के आकर्षण का केंद्र रहा है गंगा का उद्गम उतरकाशी

Wed, 20 Jun 2018 10:56 PM IST
Updated Wed, 20 Jun 2018 10:56 PM IST
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प्राचीन काल से ही योगी साधकों के आकर्षण का केंद्र रहा है गंगा का उद्गम उतरकाशी
उत्तरकाशी। प्राचीनकाल से ही गंगा का उद्गम उत्तरकाशी योगियों और तपस्वियों के आकर्षण का केंद्र रहा है। यहां कई प्रख्यात संतों ने योग साधना की और आज देश-दुनियां में लोगों को योग से निरोग होने के गुर सिखा रहे हैं।
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शिवानंद योग वेदांत केंद्र नेताला में साधकों को योग के गुर सिखाने वाले स्वामी हरिओमानंद बताते हैं कि प्राचीन काल में भगवान परशुराम, जमदग्नि ऋषि, चौरंगी नाथ, मार्कण्डेय, पाराशर ऋषि, उदालक, नचिकेता आदि कई ऋषि मुनियों ने उत्तरकाशी में गंगा के उद्गम तक पहुंचकर तपस्या की है। उजेली उत्तरकाशी से लेकर गंगोत्री तपोवन क्षेत्र में स्वामी रामानंद अवधूत, तपोवन स्वामी, चिन्मयानंद स्वामी, हिमालय ट्रस्ट के स्वामी राम, महर्षि आश्रम के संस्थापक महेश योगी, स्वामी विष्णुदेवानंद, योग गुरु स्वामी रामदेव आदि प्रख्यात संतों ने साधना की और यहां से निकलकर जनकल्याण के कार्य किए। काशी विश्वनाथ मंदिर के महंत योग शिरोमणि अजय पुरी का कहना है कि जनपद के युवा बीते एक दशक से योग प्रशिक्षण प्राप्त कर अब देश-दुनिया में योग के प्रचार-प्रसार में जुटे हैं।
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स्वामी विष्णुदेवानंद ने विदेशों तक पहुंचाया योग
भारत से बाहर विदेशों में योग की अलख जगाने वाले स्वामी विष्णुदेवानंद ने वर्ष 1940 के दशक में तेखला उत्तरकाशी में योग साधना की थी। फिर अपने गुरु स्वामी शिवानंद के निर्देश पर उन्होंने विदेशों में जाकर योग का प्रचार-प्रसार किया। वर्ष 1950 में उन्होंने कनाडा में अंतरराष्ट्रीय शिवानंद योग वेदांत केंद्र की स्थापना की। वर्तमान में केंद्र का विस्तार भारत के विभिन्न राज्यों के साथ ही दुनिया के तीन दर्जन से ज्यादा देशों में हो चुका है। उन्होंने अपनी तपस्थली उत्तरकाशी में भी वर्ष 1991 में शिवानंद कुटीर नेताला की स्थापना की। जहां से हर साल बड़ी संख्या में योग प्रशिक्षक तैयार हो रहे हैं।
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योग को बढ़ावा देने में जुटे कृष्णानंद
बौंगा निवासी पेशे से शिक्षक कृष्णानंद बिजल्वाण ने वर्ष 2004 में अंतरराष्ट्रीय शिवानंद योग वेदांत केंद्र नेताला से योग शिरोमणि का कोर्स किया। इसके बाद से वे देश-दुनिया में योग को बढ़ावा देने में जुटे हैं। उन्होंने स्विट्जरलैंड, फ्रांस, हॉलेंड, जर्मनी, चैक रिपब्लिक, इजराइल, बेल्जियम आदि देशों तक पहुंचकर योग का प्रचार-प्रसार किया। वर्ष 2015 में बिजल्वाण ने योग आचार्य का प्रशिक्षण किया और अब योग के महत्व को देखते हुए अपनी बेटी अमृता को भी योग शिरोमणि का कोर्स करा रहे हैं।

देशी-विदेशी साधकों को योग के गुर सिखा रहे पीयूष
कोटबंगला निवासी पीयूष बनूनी ने वर्ष 2011 में त्रिवेंद्रम स्थित केंद्र से योग शिरोमणि एवं योग आचार्य का कोर्स किया। इसके बाद से वे निरंतर योग के प्रचार-प्रसार में जुटे हैं। पीयूष बताते हैं कि भागदौड़ भरी तनावपूर्ण जिंदगी में योग प्रत्येक व्यक्ति के लिए जरूरी है। देश-विदेश में योग सिखाने के साथ ही पीयूष ने कोटबंगला स्थित अपने पारंपरिक घर को भी योग केंद्र में परिवर्तित कर दिया है। हर साल बड़ी संख्या में देशी-विदेशी साधक यहां पहुंचकर योग के गुर सीखते हैं।


योग के क्षेत्र में अच्छा रोजगार पा रहे हैं युवा
गांव के पास शिवानंद कुटीर योग प्रशिक्षण केंद्र होने का लाभ लेकर नेताला के नवीन राणा व सिरोर के विजय महर एवं यशपाल रावत भी योग को बढ़ावा देने में जुटे हैं। नवीन इस समय नेताला में ही योग प्रशिक्षण केंद्र चला रहे हैं, जबकि विजय शिवानंद आश्रम के दिल्ली स्थित केंद्र के निदेशक हैं और यशपाल भी त्रिवेंद्रम केंद्र में योग प्रशिक्षक के तौर पर कार्य कर रहे हैं। इनके अलावा अभिषेक भट्ट, शेखर नैथानी आदि दर्जनों युवा भी योग गुरु बनकर योग के प्रचार-प्रसार में जुटे हैं।
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