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पांडव यज्ञ के तहत संग्राली के ग्रामीणों ने की वारुणी यात्रा
Updated Tue, 20 Feb 2018 10:36 PM IST
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उत्तरकाशी। गांव की खुशहाली एवं सुख समृद्धि के लिए संग्राली गांव में तीन दिवसीय पांडव यज्ञ शुरू हुआ। धार्मिक अनुष्ठान के तहत ग्रामीणों ने कंडार देवता की अगुवाई में पांडव पश्वाओं के साथ पंचकोसी वारुणी यात्रा संपन्न की।
वरुणावत शीर्ष पर स्थित संग्राली गांव में सोमवार रात से पांडव यज्ञ शुरू हुआ। पांडव पश्वाओं ने अस्त्र-शस्त्रों की पूजा की। गांव की थात पर देर रात तक नृत्य किया। मंगलवार को क्षेत्र के आराध्य कंडार देवता की डोली की अगुवाई में ग्रामीण पांडव पश्वों के साथ पंचकोसी वारुणी यात्रा पर निकले। संग्राली से पाटा, बग्यालगांव, लक्षेश्वर होते हुए धार्मिक यात्रा मणिकर्णिका घाट पहुंची। गंगा स्नान के साथ विशेष पूजा-अर्चना की गई। इसके बाद यात्रा बसूंगा के अखंडेश्वर, साल्ड के जगन्नाथ एवं अष्टभुजा देवी, ज्ञाणजा में ज्ञानेश्वर, व्यास कुंड तथा वरुणावत शीघ्र पर शिखरेश्वर एवं विमलेश्वर महादेव मंदिर होते हुए संग्राली गांव पहुंची। संग्राली गांव निवासी ज्योति प्रसाद नैथानी, कीर्तिमणी नौटियाल एवं शिवानंद भट्ट ने बताया कि क्षेत्र की खुशहाली व सुख-समृद्धि के लिए पांडव यज्ञ का आयोजन किया जाता है। इस मौके पर विजय लाल नैथानी, बुद्धि प्रसाद, लक्ष्मी प्रसाद, प्रेम वल्लभ नैथानी, दशरथ प्रसाद भट्ट, चंद्रमोहन भट्ट, गिरीश नैथानी, मदनलाल, केदारी देवी, सर्वेश्वरी देवी आदि मौजूद रहे।
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वरुणावत शीर्ष पर स्थित संग्राली गांव में सोमवार रात से पांडव यज्ञ शुरू हुआ। पांडव पश्वाओं ने अस्त्र-शस्त्रों की पूजा की। गांव की थात पर देर रात तक नृत्य किया। मंगलवार को क्षेत्र के आराध्य कंडार देवता की डोली की अगुवाई में ग्रामीण पांडव पश्वों के साथ पंचकोसी वारुणी यात्रा पर निकले। संग्राली से पाटा, बग्यालगांव, लक्षेश्वर होते हुए धार्मिक यात्रा मणिकर्णिका घाट पहुंची। गंगा स्नान के साथ विशेष पूजा-अर्चना की गई। इसके बाद यात्रा बसूंगा के अखंडेश्वर, साल्ड के जगन्नाथ एवं अष्टभुजा देवी, ज्ञाणजा में ज्ञानेश्वर, व्यास कुंड तथा वरुणावत शीघ्र पर शिखरेश्वर एवं विमलेश्वर महादेव मंदिर होते हुए संग्राली गांव पहुंची। संग्राली गांव निवासी ज्योति प्रसाद नैथानी, कीर्तिमणी नौटियाल एवं शिवानंद भट्ट ने बताया कि क्षेत्र की खुशहाली व सुख-समृद्धि के लिए पांडव यज्ञ का आयोजन किया जाता है। इस मौके पर विजय लाल नैथानी, बुद्धि प्रसाद, लक्ष्मी प्रसाद, प्रेम वल्लभ नैथानी, दशरथ प्रसाद भट्ट, चंद्रमोहन भट्ट, गिरीश नैथानी, मदनलाल, केदारी देवी, सर्वेश्वरी देवी आदि मौजूद रहे।
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