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आपसी सहमति से पोखरी गांव के लिए सड़क बनाने की कवायद में जुटा प्रशासन
Updated Wed, 14 Feb 2018 10:28 PM IST
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उत्तरकाशी। सड़क निर्माण को लेकर डांग-पोखरी गांवों के बीच पर्यावरण बनाम विकास की लड़ाई थमने का नाम नहीं ले रही है। जिला प्रशासन विवाद को आपसी सहमती से सुलझाने का प्रयास कर रहा है। इस संबंध में जिलाधिकारी डा. आशीष चौहान की ओर से ग्रीन चिपको डांग सत्याग्रह आंदोलन के सदस्यों के साथ बैठक भी की गई, लेकिन समस्या का समाधान नहीं निकल सका।
बुधवार को जिला सभागार में आयोजित बैठक में डीएम ने डांग के ग्रामीणों को पर्यावरण संरक्षण के साथ ही मानवीय पहलुओं को समझने की नसीहत दी। उन्होंने कहा कि कोर्ट के आदेशों एवं डांग द्वारा बनाई गई सड़क के तकनीकी तौर पर फेल होने के बाद निम बैंड से पोखरी तक सड़क बनाने का ही विकल्प बचा है। सड़क के लिए चीड़ के 293 पेड़ कट रहे हैं, जिसके बदले प्रशासन कई गुना अधिक मिश्रित प्रजाति के पेड़ लगाकर उनके पालन पोषण की जिम्मेदारी ले सकता है।
बैठक में डांग गांव के प्रतिनिधियों ने पेड़ काटने और ग्रामीणों द्वारा बनाई गई सड़क को तकनीकी तौर पर फेल करने पर विरोध जताया। उन्होंने लोनिवि द्वारा की गई जांच पर आपत्ति जताते हुए किसी अन्य निर्माण एजेंसी से दोबारा जांच कराने की मांग की। उन्होंने हिल रोड मैनुअल एवं इंडियन रोड कांग्रेस के नियमों का हवाला देते हुए बताया कि 800 मीटर तक की दूरी वाले गांवों को सड़क से जुड़ा हुआ माना जाता है। इस पर डीएम ने एडीएम पीएल शाह की अध्यक्षता वाली कमेटी को नियमों व आपत्तियों की दोबारा जांच कर जल्द रिपोर्ट देने के निर्देश दिए। इस मौके पर ग्रीन चिपको डांग सत्याग्रह आंदोलन के अभिषेक जगूड़ी, प्रताप गुसाईं, चतर सिंह, देवेंद्र गुसाईं, आनंद बिष्ट आदि मौजूद रहे।
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धरने पर डटे रहे ग्रामीण
सड़क निर्माण की मांग को लेकर कलक्ट्रेट में पोखरी के ग्रामीणों का धरना 22वें दिन भी जारी रहा। ग्रामीणों ने कहा कि सड़क का कार्य शुरू होने तक वे आंदोलन जारी रखेंगे। उन्होंने प्रशासन के प्रयासों पर भरोसा जताते हुए न्याय की गुहार लगाई। धरना देने वालों में पोखरी गांव की रामदेई देवी, गीता नेगी, सुशीला राणा, अनुपमा कैंतुरा, रजनी नेगी, नत्थी सिंह, देंवेद्री नेगी आदि शामिल रहे। उधर, निम बैंड के पास सड़क के विरोध में डांग के ग्रामीण 14वें दिन भी धरने पर डटे रहे। ग्रामीणों ने कहा कि वे निम बैंड से पेड़ों का कटान कर किसी सूरत में सड़क नहीं बनने देंगे। डांग गांव के ग्रामीणों द्वारा बनायी गई सड़क को ही आगे पोखरी गांव तक बढ़ाया जाए।
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बुधवार को जिला सभागार में आयोजित बैठक में डीएम ने डांग के ग्रामीणों को पर्यावरण संरक्षण के साथ ही मानवीय पहलुओं को समझने की नसीहत दी। उन्होंने कहा कि कोर्ट के आदेशों एवं डांग द्वारा बनाई गई सड़क के तकनीकी तौर पर फेल होने के बाद निम बैंड से पोखरी तक सड़क बनाने का ही विकल्प बचा है। सड़क के लिए चीड़ के 293 पेड़ कट रहे हैं, जिसके बदले प्रशासन कई गुना अधिक मिश्रित प्रजाति के पेड़ लगाकर उनके पालन पोषण की जिम्मेदारी ले सकता है।
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बैठक में डांग गांव के प्रतिनिधियों ने पेड़ काटने और ग्रामीणों द्वारा बनाई गई सड़क को तकनीकी तौर पर फेल करने पर विरोध जताया। उन्होंने लोनिवि द्वारा की गई जांच पर आपत्ति जताते हुए किसी अन्य निर्माण एजेंसी से दोबारा जांच कराने की मांग की। उन्होंने हिल रोड मैनुअल एवं इंडियन रोड कांग्रेस के नियमों का हवाला देते हुए बताया कि 800 मीटर तक की दूरी वाले गांवों को सड़क से जुड़ा हुआ माना जाता है। इस पर डीएम ने एडीएम पीएल शाह की अध्यक्षता वाली कमेटी को नियमों व आपत्तियों की दोबारा जांच कर जल्द रिपोर्ट देने के निर्देश दिए। इस मौके पर ग्रीन चिपको डांग सत्याग्रह आंदोलन के अभिषेक जगूड़ी, प्रताप गुसाईं, चतर सिंह, देवेंद्र गुसाईं, आनंद बिष्ट आदि मौजूद रहे।
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धरने पर डटे रहे ग्रामीण
सड़क निर्माण की मांग को लेकर कलक्ट्रेट में पोखरी के ग्रामीणों का धरना 22वें दिन भी जारी रहा। ग्रामीणों ने कहा कि सड़क का कार्य शुरू होने तक वे आंदोलन जारी रखेंगे। उन्होंने प्रशासन के प्रयासों पर भरोसा जताते हुए न्याय की गुहार लगाई। धरना देने वालों में पोखरी गांव की रामदेई देवी, गीता नेगी, सुशीला राणा, अनुपमा कैंतुरा, रजनी नेगी, नत्थी सिंह, देंवेद्री नेगी आदि शामिल रहे। उधर, निम बैंड के पास सड़क के विरोध में डांग के ग्रामीण 14वें दिन भी धरने पर डटे रहे। ग्रामीणों ने कहा कि वे निम बैंड से पेड़ों का कटान कर किसी सूरत में सड़क नहीं बनने देंगे। डांग गांव के ग्रामीणों द्वारा बनायी गई सड़क को ही आगे पोखरी गांव तक बढ़ाया जाए।