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सरकारी उपेक्षा का शिकार होकर रह गया उद्यान विभाग का रैथल फार्म
Updated Thu, 08 Feb 2018 10:33 PM IST
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उत्तरकाशी। कभी फलों से गुलजार रहने वाला 30 हेक्टेयर रैथल फार्म आज सरकारी उपेक्षा की दंश झेल रहा है। उद्यान की सिंचाई नहर और चहारदीवारी क्षतिग्रस्त हो चुकी है। सरकार किसानों की आय दोगुनी करने की भले ही घोषणा कर रही हो, लेकिन रैथल उद्यान में भागीरथी घाटी के किसानों की जरूरत के लिए पौध तैयार नहीं कर पा रही है। स्थिति यह है कि क्षेत्र के किसान फल पौधों के लिए हिमाचल पर निर्भर हैं।
जिला बनने से पहले 1957-58 में अस्तित्व में आए रैथल उद्यान में विभिन्न किस्म के फलों के बागीचे ही नहीं यहां मौन पालन, माली प्रशिक्षण, सब्जी की पौध उत्पादन तथा स्ट्राबेरी और आलू की खेती भी की जाती थी। ग्रुप वन के अधिकारी और प्रशिक्षित मालियों, सुपरवाइजर व काम करने के लिए अस्थाई मजदूर यहां काफी संख्या में रोजगार पाते थे। क्षेत्र में फल पौध की जरूरत के लिए यहां नर्सरियां थीं। आज सरकारी उपेक्षा के चलते फार्म की सिंचाई नहर दशकों से क्षतिग्रस्त पड़ी है। चहारदीवारी टूटने से यहां आवारा पशुओं का अड्डा बना हुआ है।
सहायक उद्यान अधिकारी एनके सिंह का कहना है कि सिंचाई व्यवस्था एवं नर्सरी के लिए 7.7 करोड़ का प्रस्ताव उच्चाधिकारियों को भेजा, लेकिन स्वीकृति नहीं मिल पाई। किसी तरह एक माली, चौकीदार और चार उपनल कर्मियों के भरोसे उद्यान को फाइलों में जिंदा रखा गया है। बरसात का पानी छत की टंकियों में जमा कर कुछ सेब, अखरोट की पौध तैयार की जा रही हैं। डीएम डा. आशीष चौहान का कहना है कि रैथल फार्म को पुनर्जीवित करने की कोशिश की जाएगी।
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जिला बनने से पहले 1957-58 में अस्तित्व में आए रैथल उद्यान में विभिन्न किस्म के फलों के बागीचे ही नहीं यहां मौन पालन, माली प्रशिक्षण, सब्जी की पौध उत्पादन तथा स्ट्राबेरी और आलू की खेती भी की जाती थी। ग्रुप वन के अधिकारी और प्रशिक्षित मालियों, सुपरवाइजर व काम करने के लिए अस्थाई मजदूर यहां काफी संख्या में रोजगार पाते थे। क्षेत्र में फल पौध की जरूरत के लिए यहां नर्सरियां थीं। आज सरकारी उपेक्षा के चलते फार्म की सिंचाई नहर दशकों से क्षतिग्रस्त पड़ी है। चहारदीवारी टूटने से यहां आवारा पशुओं का अड्डा बना हुआ है।
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सहायक उद्यान अधिकारी एनके सिंह का कहना है कि सिंचाई व्यवस्था एवं नर्सरी के लिए 7.7 करोड़ का प्रस्ताव उच्चाधिकारियों को भेजा, लेकिन स्वीकृति नहीं मिल पाई। किसी तरह एक माली, चौकीदार और चार उपनल कर्मियों के भरोसे उद्यान को फाइलों में जिंदा रखा गया है। बरसात का पानी छत की टंकियों में जमा कर कुछ सेब, अखरोट की पौध तैयार की जा रही हैं। डीएम डा. आशीष चौहान का कहना है कि रैथल फार्म को पुनर्जीवित करने की कोशिश की जाएगी।
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