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गैरसैंण में राजधानी के विरोध में आगे आए पेंशनर्स
Updated Tue, 06 Feb 2018 10:32 PM IST
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उत्तरकाशी। सेवानिवृत्त राजकीय पेंशनर्स संगठन ने गैरसैंण को उत्तराखंड की स्थाई राजधानी बनाने का विरोध किया है। उन्होंने गैरसैंण राजधानी की पैरवी करने वालों पर स्वार्थसिद्धि का आरोप लगाते हुए देहरादून में ही राजधानी को उत्तराखंड के हित में बताया।
सोमवार को जिला मुख्यालय पर हुई सेवानिवृत्त कर्मचारियों की बैठक में राजधानी मुद्दे पर चर्चा की गई। उन्होंने कहा कि भाजपा एवं कांग्रेस सरकारें गैरसैंण राजधानी के मुद्दे पर राजनीतिक रोटियां सेकती रही हैं। यहां राजधानी के नाम पर सरकारी बजट का दुरुपयोग किया जा रहा है। भौगोलिक स्थिति और उत्तराखंड के आर्थिक हालात को देखते हुए अब गैरसैंण में राजधानी बनाने का कोई औचित्य नहीं है। कुछ लोग अपने निजी एवं राजनीतिक स्वार्थ साधने के लिए राजधानी मुद्दे पर आंदोलन खड़े कर रहे हैं। उन्होंने मुख्यमंत्री को ज्ञापन प्रेषित कर देहरादून को ही स्थाई राजधानी घोषित करने की मांग की। इस मौके पर संगठन के जिलाध्यक्ष तेजेंद्र बिष्ट, चिरंजी प्रसाद जोशी, बुद्धि सिंह कुमाईं, देवी प्रसाद नौटियाल, चिरंजी लाल, बृषोदर चमोली, राम नारायण बिजल्वाण, सत्यनारायण रतूड़ी, अतर सिंह आदि मौजूद रहे।
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सोमवार को जिला मुख्यालय पर हुई सेवानिवृत्त कर्मचारियों की बैठक में राजधानी मुद्दे पर चर्चा की गई। उन्होंने कहा कि भाजपा एवं कांग्रेस सरकारें गैरसैंण राजधानी के मुद्दे पर राजनीतिक रोटियां सेकती रही हैं। यहां राजधानी के नाम पर सरकारी बजट का दुरुपयोग किया जा रहा है। भौगोलिक स्थिति और उत्तराखंड के आर्थिक हालात को देखते हुए अब गैरसैंण में राजधानी बनाने का कोई औचित्य नहीं है। कुछ लोग अपने निजी एवं राजनीतिक स्वार्थ साधने के लिए राजधानी मुद्दे पर आंदोलन खड़े कर रहे हैं। उन्होंने मुख्यमंत्री को ज्ञापन प्रेषित कर देहरादून को ही स्थाई राजधानी घोषित करने की मांग की। इस मौके पर संगठन के जिलाध्यक्ष तेजेंद्र बिष्ट, चिरंजी प्रसाद जोशी, बुद्धि सिंह कुमाईं, देवी प्रसाद नौटियाल, चिरंजी लाल, बृषोदर चमोली, राम नारायण बिजल्वाण, सत्यनारायण रतूड़ी, अतर सिंह आदि मौजूद रहे।
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