{"_id":"5a7896c34f1c1b88268b8abc","slug":"151785256715-utter-kashi-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"अनापति प्रमाणपत्र के लिए फर्जी हस्ताक्षर कराने का आरोप","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
अनापति प्रमाणपत्र के लिए फर्जी हस्ताक्षर कराने का आरोप
Updated Mon, 05 Feb 2018 11:09 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
पुरोला। जखोल सांकरी क्षेत्र के ग्रामीणों ने निर्माणाधीन बिजली परियोजना के लिए वन भूमि हस्तांतरण के लिए ग्रामीणों के फर्जी हस्ताक्षर कराने का आरोप लगाते हुए डीएम से मामले की जांच की मांग की है।
मोरी की घुयां घाटी में सतलुज जल विद्युत निगम की ओर से 44 मेगावाट की जखोल-सांकरी बिजली परियोजना का निर्माण कराया जा रहा है। इसके लिए निगम ने 24.317 हेक्टेयर आरक्षित वन भूमि का चयन किया है। इसके हस्तांतरण के लिए ग्रामीणों की अनापत्ति जरूरी है, लेकिन पुश्तैनी चरागाह एवं हक हकूक से जुड़ी होने के कारण ग्रामीण इसके लिए राजी नहीं है। क्षेत्र के गुलाब सिंह, राजेंद्र सिंह, सोबन सिंह, प्रेम सिंह, रामशरण, प्रताप सिंह ने बताया कि कुछ दिन पूर्व निगम के अधिकारियों ने जखोल गांव में एक कार्यक्रम आयोजित किया। इसमें ग्रामीणों को सिलाई मशीनें देने की बात कहते हुए खाली रजिस्टर पर हस्ताक्षर कराए गए, लेकिन मशीन वगैरह कुछ नहीं दिया। आरोप है कि निगम इन हस्ताक्षरों का प्रयोग आरक्षित वन भूमि हस्तांतरण के अनापत्ति प्रमाणपत्र में करने की साजिश रच रहा है। उन्होंने इस संबंध में डीएम को ज्ञापन प्रेषित कर मामले की जांच तथा दोषियों के विरुद्ध कार्रवाई की मांग की है। सतलुज जल विद्युत निगम के जेके महाजन ने बताया कि निगम द्वारा प्रस्तावित वन भूमि पर कोई आदिवासी कृषि तो नहीं कर रहा या फिर यहां किसी का कब्जा तो नहीं है, इसकी जानकारी जुटाने के लिए बैठक बुलाई गई थी। फर्जी ढंग से हस्ताक्षर कराने के आरोप बेबुनियाद है।
विज्ञापन
मोरी की घुयां घाटी में सतलुज जल विद्युत निगम की ओर से 44 मेगावाट की जखोल-सांकरी बिजली परियोजना का निर्माण कराया जा रहा है। इसके लिए निगम ने 24.317 हेक्टेयर आरक्षित वन भूमि का चयन किया है। इसके हस्तांतरण के लिए ग्रामीणों की अनापत्ति जरूरी है, लेकिन पुश्तैनी चरागाह एवं हक हकूक से जुड़ी होने के कारण ग्रामीण इसके लिए राजी नहीं है। क्षेत्र के गुलाब सिंह, राजेंद्र सिंह, सोबन सिंह, प्रेम सिंह, रामशरण, प्रताप सिंह ने बताया कि कुछ दिन पूर्व निगम के अधिकारियों ने जखोल गांव में एक कार्यक्रम आयोजित किया। इसमें ग्रामीणों को सिलाई मशीनें देने की बात कहते हुए खाली रजिस्टर पर हस्ताक्षर कराए गए, लेकिन मशीन वगैरह कुछ नहीं दिया। आरोप है कि निगम इन हस्ताक्षरों का प्रयोग आरक्षित वन भूमि हस्तांतरण के अनापत्ति प्रमाणपत्र में करने की साजिश रच रहा है। उन्होंने इस संबंध में डीएम को ज्ञापन प्रेषित कर मामले की जांच तथा दोषियों के विरुद्ध कार्रवाई की मांग की है। सतलुज जल विद्युत निगम के जेके महाजन ने बताया कि निगम द्वारा प्रस्तावित वन भूमि पर कोई आदिवासी कृषि तो नहीं कर रहा या फिर यहां किसी का कब्जा तो नहीं है, इसकी जानकारी जुटाने के लिए बैठक बुलाई गई थी। फर्जी ढंग से हस्ताक्षर कराने के आरोप बेबुनियाद है।
विज्ञापन