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पिलंगगाड लघु जल विद्युत परियोजना के जल्द शुरु होने की उम्मीद
Updated Tue, 23 Jan 2018 10:21 PM IST
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उत्तरकाशी। जून 2013 की आपदा के समय से ही बंद पड़ी 2.25 मेगावाट की पिलंगगाड लघु जल विद्युत परियोजना से कुछ दिनों में विद्युत उत्पादन शुरू होने की उम्मीद है। परियोजना की ट्रेंच वियर साइट पर अभी काम अधूरा होने के बावजूद अस्थाई बांध बनाकर पावर चैनल तक पानी पहुंचाने का इंतजाम किया गया है। आजकल जल विद्युत निगम के अधिकारी मशीनों की टेस्टिंग कर रहे हैं।
जून 2013 में गंगा भागीरथी और इसकी सहायक नदी पिलंगगाड में आए उफान से परियोजना का हेड, पावर चैनल और टेल रेस चैनल के पाइप क्षतिग्रस्त हो गए थे। तभी से परियोजना ठप पड़ी है। इन 55 महीनों में परियोजना अपनी निर्माण लागत से ज्यादा की उत्पादन हानि झेल चुकी है। परियोजना की मरम्मत के लिए दक्ष कंपनी के चयन और डिजाइन में आंशिक बदलाव के चलते मरम्मत में विलंब हुआ। अब पावर चैनल और टेल रेस चैनल की मरम्मत का काम पूरा हो चुका है। हालांकि अभी हेड पर ट्रेंच वियर साइट का निर्माण अधूरा है, लेकिन अब और उत्पादन हानि से बचने के लिए जल विद्युत निगम ने यहां फिलहाल अस्थाई बांध तैयार कर पानी पावर चैनल तक पहुंचा दिया है।
ऑटोमेटिक वोल्टेज रेगुलेटर की टेस्टिंग के बाद अब जनरेटर, ट्रांसफार्मर, टरबाइन, विद्युत लाइन और लोड टेस्टिंग का परीक्षण कराया जा रहा है। परियोजना के इंजीनियरों की मदद के लिए चिन्यालीसौड़ से आई टेस्टिंग टीम मौके पर डटी है। दो टरबाइनों वाली इस परियोजना में एक टरबाइन के लिए 1.5 क्यूमेक्स पानी की जरूरत होती है। एक टरबाइन की टेस्टिंग हो चुकी है, जबकि दूसरी की टेस्टिंग पूरी होने के बाद दोनों टरबाइनों को जोड़कर लोड देने की तैयारी चल रही है।
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कोट.........
पिलंगगाड परियोजना से एक-दो दिन में विद्युत उत्पादन शुरू होने की संभावना है। लंबे समय से बंद पड़ी परियोजना के पावर हाउस में यदि कुछ अड़चन आई, तो निगम बाहर से विशेषज्ञ बुलाकर उनकी मदद से विद्युत उत्पादन शुरू करेगा।
जेके उपाध्याय, ईई लघु जल विद्युत निगम मनेरी।
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जून 2013 में गंगा भागीरथी और इसकी सहायक नदी पिलंगगाड में आए उफान से परियोजना का हेड, पावर चैनल और टेल रेस चैनल के पाइप क्षतिग्रस्त हो गए थे। तभी से परियोजना ठप पड़ी है। इन 55 महीनों में परियोजना अपनी निर्माण लागत से ज्यादा की उत्पादन हानि झेल चुकी है। परियोजना की मरम्मत के लिए दक्ष कंपनी के चयन और डिजाइन में आंशिक बदलाव के चलते मरम्मत में विलंब हुआ। अब पावर चैनल और टेल रेस चैनल की मरम्मत का काम पूरा हो चुका है। हालांकि अभी हेड पर ट्रेंच वियर साइट का निर्माण अधूरा है, लेकिन अब और उत्पादन हानि से बचने के लिए जल विद्युत निगम ने यहां फिलहाल अस्थाई बांध तैयार कर पानी पावर चैनल तक पहुंचा दिया है।
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ऑटोमेटिक वोल्टेज रेगुलेटर की टेस्टिंग के बाद अब जनरेटर, ट्रांसफार्मर, टरबाइन, विद्युत लाइन और लोड टेस्टिंग का परीक्षण कराया जा रहा है। परियोजना के इंजीनियरों की मदद के लिए चिन्यालीसौड़ से आई टेस्टिंग टीम मौके पर डटी है। दो टरबाइनों वाली इस परियोजना में एक टरबाइन के लिए 1.5 क्यूमेक्स पानी की जरूरत होती है। एक टरबाइन की टेस्टिंग हो चुकी है, जबकि दूसरी की टेस्टिंग पूरी होने के बाद दोनों टरबाइनों को जोड़कर लोड देने की तैयारी चल रही है।
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पिलंगगाड परियोजना से एक-दो दिन में विद्युत उत्पादन शुरू होने की संभावना है। लंबे समय से बंद पड़ी परियोजना के पावर हाउस में यदि कुछ अड़चन आई, तो निगम बाहर से विशेषज्ञ बुलाकर उनकी मदद से विद्युत उत्पादन शुरू करेगा।
जेके उपाध्याय, ईई लघु जल विद्युत निगम मनेरी।