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आपदा में बड़े नुकसान का संकेत दे रहे बेतरतीब निर्माण
Updated Sat, 09 Dec 2017 10:30 PM IST
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उत्तरकाशी। प्राकृतिक आपदाओं से घिरे नगर को प्रशासन की अनदेखी ने गंभीर स्थिति में खड़ा कर दिया है। बीते कुछ दशकों में हुई भूकंप, जलप्रलय व भूस्खलन की घटनाओं के बावजूद प्रशासन नियमों के विरुद्ध हो रहे निर्माण कार्यों के प्रति संवेदनशील नहीं है। जिससे भागीरथी किनारे, वरुणावत व नगर क्षेत्र के आसपास भारी तादात में बहुमंजिला भवनों का बेतरतीब निर्माण किया जा रहा है।
आपदा प्रबंधन विभाग के अनुसार वर्ष 1991 में 6.8 रिक्टर स्केल के भूकंप के अलावा वर्ष 2011 से वर्तमान समय तक जनपद में 38 से अधिक भूकंप के झटके महसूस किए जा चुके हैं। वर्ष 2003 में वरुणावत भूस्खलन, 2012 व 2013 में आई जलप्रलय के अलावा कई छोटी-बड़ी आपदाओं से नुकसान हो चुका है।
पर्यावरणविद सुरेश भाई ने कहा कि प्राकृतिक आपदाओं को देखते हुए वैज्ञानिकों व सरकारी एजेंसियों द्वारा पूरे हिमालयी क्षेत्र को अतिसंवेदनशील घोषित कर भवन निर्माण के लिए कई नियम बनाए गए थे। इसके विपरीत पहाड़ों में मैदानी डिजाइन के हिसाब से भवन व सड़कों का निर्माण कराया जा रहा है।
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कोट
संवेदनशील क्षेत्र होने की वजह से भवन निर्माण के लिए तय नियमों का सख्ती से पालन कराया जाएगा। अगर नियम तोड़ने के संबंध में शिकायत मिलती है, तो आरोपी के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। अतिक्रमण से निजात पाने के लिए प्रशासन द्वारा कुछ योजनाओं पर कार्य किया जा रहा है। जल्द ही इसका सकारात्मक असर देखने को मिलेगा।
- डा. आशीष चौहान, जिलाधिकारी।
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आपदा प्रबंधन विभाग के अनुसार वर्ष 1991 में 6.8 रिक्टर स्केल के भूकंप के अलावा वर्ष 2011 से वर्तमान समय तक जनपद में 38 से अधिक भूकंप के झटके महसूस किए जा चुके हैं। वर्ष 2003 में वरुणावत भूस्खलन, 2012 व 2013 में आई जलप्रलय के अलावा कई छोटी-बड़ी आपदाओं से नुकसान हो चुका है।
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पर्यावरणविद सुरेश भाई ने कहा कि प्राकृतिक आपदाओं को देखते हुए वैज्ञानिकों व सरकारी एजेंसियों द्वारा पूरे हिमालयी क्षेत्र को अतिसंवेदनशील घोषित कर भवन निर्माण के लिए कई नियम बनाए गए थे। इसके विपरीत पहाड़ों में मैदानी डिजाइन के हिसाब से भवन व सड़कों का निर्माण कराया जा रहा है।
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संवेदनशील क्षेत्र होने की वजह से भवन निर्माण के लिए तय नियमों का सख्ती से पालन कराया जाएगा। अगर नियम तोड़ने के संबंध में शिकायत मिलती है, तो आरोपी के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। अतिक्रमण से निजात पाने के लिए प्रशासन द्वारा कुछ योजनाओं पर कार्य किया जा रहा है। जल्द ही इसका सकारात्मक असर देखने को मिलेगा।
- डा. आशीष चौहान, जिलाधिकारी।