{"_id":"5a26d4464f1c1b0d698c01e0","slug":"15124942817-utter-kashi-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"अब उतरकाशी में भी मिलेगी वाहन प्रदूषण जांच की सुविधा","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
अब उतरकाशी में भी मिलेगी वाहन प्रदूषण जांच की सुविधा
Updated Tue, 05 Dec 2017 10:45 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
उत्तरकाशी। परिवहन विभाग की पहल पर जिला मुख्यालय पर वाहन प्रदूषण जांच केंद्र का शुभारंभ किया गया। अब जनपदवासियों को वाहनों की प्रदूषण उत्सर्जन जांच के लिए ऋषिकेश, देहरादून के चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे। डीजल-पेट्रोल के वाहनों से फैल रहे प्रदूषण की रोकथाम के लिए यह कदम जरूरी माना जा रहा था।
वाहनों की बढ़ती तादात के साथ ही पहाड़ की आबोहवा पर भी प्रदूषण का खतरा मंडरा रहा है। जनपद में वाहनों की प्रदूषण उत्सर्जन जांच की व्यवस्था न होने के कारण बड़ी संख्या में वाहन धुआं उड़ाते घूम रहे हैं। परिवहन विभाग ने अभियान चलाकर इस पर नकेल कसने की कवायद शुरू कर दी है। ऐसे में लोगों को वाहन प्रदूषण जांच के लिए ऋषिकेश, देहरादून की दौड़ लगानी पड़ रही थी। इसे देखते हुए परिवहन विभाग ने जनपद में गंगा हिमालय पर्यावरण संरक्षण समिति को वाहन प्रदूषण जांच के लिए पंजीकृत किया है।
भटवाड़ी रोड स्थित च्वाइस कंप्यूटर सेंटर में जांच केंद्र का शुभारंभ करते हुए एआरटीओ कुलवंत चौहान ने बताया कि नए वाहनों को एक साल बाद तथा शेष वाहनों को हर छह माह बाद अपने वाहनों की प्रदूषण जांच कराने का नियम है। जांच प्रमाणपत्र न होने और प्रदूषण उत्सर्जन मानक से अधिक पाए जाने पर एक हजार रुपये जुर्माने का प्राविधान है। वाहनों की फिटनेस, ट्रांसफर आदि के लिए भी प्रदूषण जांच प्रमाणपत्र जरूरी होता है। चालू वित्तीय वर्ष में विभाग ने चेकिंग अभियान चलाकर मानक से अधिक प्रदूषण फैलाने वाले 270 वाहनों का चालान किया है। बीते माह ही प्रदूषण में 52 वाहनों का चालान हुआ। शुभारंभ मौके पर समिति के उपाध्यक्ष सीताराम झा सहित कई मौजूद थे।
विज्ञापन
उत्तरकाशी से पंकज गुप्ता।
विज्ञापन
वाहनों की बढ़ती तादात के साथ ही पहाड़ की आबोहवा पर भी प्रदूषण का खतरा मंडरा रहा है। जनपद में वाहनों की प्रदूषण उत्सर्जन जांच की व्यवस्था न होने के कारण बड़ी संख्या में वाहन धुआं उड़ाते घूम रहे हैं। परिवहन विभाग ने अभियान चलाकर इस पर नकेल कसने की कवायद शुरू कर दी है। ऐसे में लोगों को वाहन प्रदूषण जांच के लिए ऋषिकेश, देहरादून की दौड़ लगानी पड़ रही थी। इसे देखते हुए परिवहन विभाग ने जनपद में गंगा हिमालय पर्यावरण संरक्षण समिति को वाहन प्रदूषण जांच के लिए पंजीकृत किया है।
विज्ञापन
भटवाड़ी रोड स्थित च्वाइस कंप्यूटर सेंटर में जांच केंद्र का शुभारंभ करते हुए एआरटीओ कुलवंत चौहान ने बताया कि नए वाहनों को एक साल बाद तथा शेष वाहनों को हर छह माह बाद अपने वाहनों की प्रदूषण जांच कराने का नियम है। जांच प्रमाणपत्र न होने और प्रदूषण उत्सर्जन मानक से अधिक पाए जाने पर एक हजार रुपये जुर्माने का प्राविधान है। वाहनों की फिटनेस, ट्रांसफर आदि के लिए भी प्रदूषण जांच प्रमाणपत्र जरूरी होता है। चालू वित्तीय वर्ष में विभाग ने चेकिंग अभियान चलाकर मानक से अधिक प्रदूषण फैलाने वाले 270 वाहनों का चालान किया है। बीते माह ही प्रदूषण में 52 वाहनों का चालान हुआ। शुभारंभ मौके पर समिति के उपाध्यक्ष सीताराम झा सहित कई मौजूद थे।
विज्ञापन
उत्तरकाशी से पंकज गुप्ता।