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नमामि गंगे परियोजना को गंगा के उद्गम क्षेत्र में ही लगा झटका
Updated Fri, 17 Nov 2017 11:02 PM IST
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उत्तरकाशी। नमामि गंगे परियोजना को गंगा के उद्गम क्षेत्र में ही झटका लगा है। धरासू से मनेरी तक जहां 15 घाट बनाए जाने थे अब महज आठ मोक्ष और स्नान घाट ही बनाए जा रहे हैं। केंद्रीय जल संसाधन मंत्रालय ने 15 मोक्ष और स्नान घाटों में से 7 के निर्माण पर कैंची चला दी है। अब डुंडा से हीना आठ ही घाट ही बनाए जाएंगे। इतना ही नहीं, मंत्रालय ने दूसरे चरण में मनेरी से गंगोत्री धाम तक सिंचाई विभाग द्वारा भेजे गए 9 घाटों के प्रस्ताव को भी स्वीकृति नहीं दी है।
सिंचाई विभाग ने पहले चरण में धरासू से मनेरी तक 15 मोक्ष और स्नानघाटों को बनाने के लिए सर्वे किया था। इसमें बाकायदा वित्तीय स्वीकृति मिलने के साथ निर्माण के लिए टेंडर भी हो चुके थे, लेकिन इस बीच केंद्रीय मंत्री उमा भारती ने उत्तरकाशी जनपद का दौरा किया तो कुछ समय बाद घाटों की संख्या कम कर दी गई। अब डुंडा से हीना तक महज आठ घाट ही बनाए जाएंगे। इनमें से तीन मोक्ष और पांच स्नानघाट हैं। इसके लिए करीब 15 से 16 करोड़ का बजट निर्धारित किया गया है। कई ऐसे क्षेत्र छूट गए हैं, जहां स्नान और मोक्ष घाटों की जरूरत है।
वहीं दूसरे चरण में भी सिंचाई विभाग ने मनेरी से गंगोत्री धाम तक 9 स्नान व मोक्ष घाटों के निर्माण के लिए डीपीआर भेजी थी, लेकिन मंत्रालय से डीपीआर को अस्वीकृत कर दिया गया है। घाटों की कटौती क्यों की गई इस बारे में कोई भी अधिकारी कुछ नहीं बोल रहा है।
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क्यों है घाटों की जरूरत-
मान्यता है कि हिंदू धर्म में गंगा के जल से स्नान करने से जन्मजन्मांतर का पाप मिट जाता है, जबकि दाह संस्कार होने पर मोक्ष और स्वर्ग की प्राप्ति होती है। उत्तरकाशी जनपद के गोमुख में ही गंगा का उद्गम स्थल माना जाता है। उत्तरकाशी में साल भर में तमाम धार्मिक आयोजन होते हैं, जिसमें लोग गंगा के किनारे स्नान करते हैं। इसके लिए गंगा किनारे सुरक्षित घाटों की जरूरत है, जबकि दाह संस्कार के लिए भी यहां एक भी उचित घाट नहीं है। सुरक्षित घाट न होने के कारण कई मौकों पर स्नान करते हुए कुछ लोग नदी में बह जाते हैं।
इन घाटों के निर्माण को मिली मंजूरी
डुंडा में मोक्ष घाट, नाकुरी के पास स्नान घाट, जड़ भरत में स्नान घाट, मणिकर्णिका में स्नान घाट, केदारघाट में स्नान और मोक्ष घाट, हीना में मोक्ष और स्नान घाट।
चेंजिंग रूम भी बनेंगे
स्नान घाटों में बाकायदा लोहे की चेन सुरक्षा गार्ड के रूप में होगी, जबकि कपड़े बदलने के लिए चेंजिंग रूम भी बनेंगे। घाटों का स्तर नदी से ऊपर और इस तरीके से डिजाइन किया जा रहा है ताकि बाढ़ आने पर इनको अधिक नुकसान न हो।
कोट-
फिलहाल आठ ही घाटों को मंजूरी मिली है। इसमें तीन मोक्ष और पांच स्नान घाट बनाये जाने हैं। इसके लिए टेंडर जारी कर दिए गए हैं। दिसंबर के पहले सप्ताह से काम शुरू हो जाएगा। -पीएस पंवार, अधीक्षण अभियंता, सिंचाई कार्य मंडल उत्तरकाशी
सिंचाई विभाग ने पहले चरण में धरासू से मनेरी तक 15 मोक्ष और स्नानघाटों को बनाने के लिए सर्वे किया था। इसमें बाकायदा वित्तीय स्वीकृति मिलने के साथ निर्माण के लिए टेंडर भी हो चुके थे, लेकिन इस बीच केंद्रीय मंत्री उमा भारती ने उत्तरकाशी जनपद का दौरा किया तो कुछ समय बाद घाटों की संख्या कम कर दी गई। अब डुंडा से हीना तक महज आठ घाट ही बनाए जाएंगे। इनमें से तीन मोक्ष और पांच स्नानघाट हैं। इसके लिए करीब 15 से 16 करोड़ का बजट निर्धारित किया गया है। कई ऐसे क्षेत्र छूट गए हैं, जहां स्नान और मोक्ष घाटों की जरूरत है।
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वहीं दूसरे चरण में भी सिंचाई विभाग ने मनेरी से गंगोत्री धाम तक 9 स्नान व मोक्ष घाटों के निर्माण के लिए डीपीआर भेजी थी, लेकिन मंत्रालय से डीपीआर को अस्वीकृत कर दिया गया है। घाटों की कटौती क्यों की गई इस बारे में कोई भी अधिकारी कुछ नहीं बोल रहा है।
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क्यों है घाटों की जरूरत-
मान्यता है कि हिंदू धर्म में गंगा के जल से स्नान करने से जन्मजन्मांतर का पाप मिट जाता है, जबकि दाह संस्कार होने पर मोक्ष और स्वर्ग की प्राप्ति होती है। उत्तरकाशी जनपद के गोमुख में ही गंगा का उद्गम स्थल माना जाता है। उत्तरकाशी में साल भर में तमाम धार्मिक आयोजन होते हैं, जिसमें लोग गंगा के किनारे स्नान करते हैं। इसके लिए गंगा किनारे सुरक्षित घाटों की जरूरत है, जबकि दाह संस्कार के लिए भी यहां एक भी उचित घाट नहीं है। सुरक्षित घाट न होने के कारण कई मौकों पर स्नान करते हुए कुछ लोग नदी में बह जाते हैं।
इन घाटों के निर्माण को मिली मंजूरी
डुंडा में मोक्ष घाट, नाकुरी के पास स्नान घाट, जड़ भरत में स्नान घाट, मणिकर्णिका में स्नान घाट, केदारघाट में स्नान और मोक्ष घाट, हीना में मोक्ष और स्नान घाट।
चेंजिंग रूम भी बनेंगे
स्नान घाटों में बाकायदा लोहे की चेन सुरक्षा गार्ड के रूप में होगी, जबकि कपड़े बदलने के लिए चेंजिंग रूम भी बनेंगे। घाटों का स्तर नदी से ऊपर और इस तरीके से डिजाइन किया जा रहा है ताकि बाढ़ आने पर इनको अधिक नुकसान न हो।
कोट-
फिलहाल आठ ही घाटों को मंजूरी मिली है। इसमें तीन मोक्ष और पांच स्नान घाट बनाये जाने हैं। इसके लिए टेंडर जारी कर दिए गए हैं। दिसंबर के पहले सप्ताह से काम शुरू हो जाएगा। -पीएस पंवार, अधीक्षण अभियंता, सिंचाई कार्य मंडल उत्तरकाशी