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पेटेंट, जीआई टैग से हो सकता है हिमालयी क्षेत्र के लोगों का विकास: यूकॉस्ट
Updated Wed, 15 Nov 2017 10:42 PM IST
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उत्तरकाशी। राजकीय महाविद्यालय के वनस्पति विज्ञान विभाग व उत्तराखंड स्टेट काउंसिल फॉर साइंस एंड टेक्नोलॉजी (यूकॉस्ट) की ओर से बौद्धिक संपदा अधिकार विषय पर एक कार्यशाला का आयोजन किया गया। महाविद्यालय सभागार में आयोजित कार्यक्रम का शुभारंभ प्रधानाचार्य प्रो. पीएस मखलोगा ने किया, जिसमें यूकॉस्ट व प्रौद्योगिकी सूचना पूर्वानुमान एवं मूल्यांकन परिषद के विशेषज्ञों द्वारा बौद्धिक संपदा से जुड़े कानूनों के बारे में जानकारी दी गई।
कार्यक्रम में डा. अंजू रावत ने बताया कि हम आमतौर पर पैसे व जमीन को ही संपदा के तौर पर देखते हैं, लेकिन मनुष्य के कुछ अनोखे विचार, अविष्कार तथा उसके क्षेत्र में पाए जाने वाली कोई खास वस्तु बौद्धिक संपदा में आते हैं। अगर संरक्षित नहीं किया गया तो कोई अन्य व्यक्ति इसकी चोरी कर सकता है। इस संपदा को बचाने के लिए ही ट्रेड मार्क, पेटेंट, भौगोलिक उपदर्शन आदि कानूनों का प्रयोग किया जाता है। डा. एमपीएस परमार ने कहा कि हिमालयी राज्यों में कई ऐसे घरेलू नुस्खे, औषधियां व कलाएं हैं, जिनका पेटेंट या जीआई टैग कराने से लोगों को फायदा हो सकता है। कुमाऊं क्षेत्र में तेजपत्ता को जीआई टैग मिलने से वहां के किसानों को बहुत लाभ मिल रहा है। लेकिन हमारे यहां इसके प्रति कोई कार्य नहीं किया जा रहा है, जबकि पड़ोसी देश चीन इन्हीं हिमालयी वस्तुओं को अपना नाम देकर बहुत मुनाफा कमा कर रहा है। इस मौके पर डा. हिमांशु गोयल, स्वाती रावत, डा. एके अग्रवाल आदि मौजूद थे।
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कार्यक्रम में डा. अंजू रावत ने बताया कि हम आमतौर पर पैसे व जमीन को ही संपदा के तौर पर देखते हैं, लेकिन मनुष्य के कुछ अनोखे विचार, अविष्कार तथा उसके क्षेत्र में पाए जाने वाली कोई खास वस्तु बौद्धिक संपदा में आते हैं। अगर संरक्षित नहीं किया गया तो कोई अन्य व्यक्ति इसकी चोरी कर सकता है। इस संपदा को बचाने के लिए ही ट्रेड मार्क, पेटेंट, भौगोलिक उपदर्शन आदि कानूनों का प्रयोग किया जाता है। डा. एमपीएस परमार ने कहा कि हिमालयी राज्यों में कई ऐसे घरेलू नुस्खे, औषधियां व कलाएं हैं, जिनका पेटेंट या जीआई टैग कराने से लोगों को फायदा हो सकता है। कुमाऊं क्षेत्र में तेजपत्ता को जीआई टैग मिलने से वहां के किसानों को बहुत लाभ मिल रहा है। लेकिन हमारे यहां इसके प्रति कोई कार्य नहीं किया जा रहा है, जबकि पड़ोसी देश चीन इन्हीं हिमालयी वस्तुओं को अपना नाम देकर बहुत मुनाफा कमा कर रहा है। इस मौके पर डा. हिमांशु गोयल, स्वाती रावत, डा. एके अग्रवाल आदि मौजूद थे।
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