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जनजातिय काश्तकारों को विशेषज्ञों ने बताये सेब की पैदावार बढ़ाने के तरीके
Updated Sat, 16 Sep 2017 10:03 PM IST
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उत्तरकाशी। उपला टकनौर के जनजातीय परिवार के काश्तकारों के लिए सेब की पैदावार बढ़ाने को लेकर एनआरडीएमएस केंद्र सरकार और संकल्प सामाजिक संस्था की ओर से हर्षिल में उच्च संघन सेब की बागवानी पर कार्यशाला का आयोजन किया।
कृषि विज्ञान केंद्र चिन्यालीसौड़ से आए कृषि विशेषज्ञ डा. पंकज नौटियाल ने बताया कि जहां हम एक नाली पर छह पेड़ लगाते हैं, वहां हम 55 पेड़ लगा सकते हैं। पेड़ों को लगाने के लिए केंद्र से लाइन बनानी चाहिए। 3 बाई 3 मीटर के क्षेत्रफल में और 6 फिट की दूरी पर पेड़ लगाने चाहिए। इससे करीब 2 से 3 पेटी सेब एक पेड़ से मिलेंगे। संघन खेती छोटी व लंबी अवधि वाले फलों के लिए उपयोगी होती है। इस दौरान डा. महेंद्रपाल सिंह परमार ने बताया कि सर्वप्रथम संघन खेती का कार्य सेब के बागीचों में यूरोप में किया गया था, लेकिन अब उपला टकनौर के जनजातीय गांव में संघन बागवानी की ओर गेलगाला स्पर प्रजाति के सेब की खेती होगी। काश्तकारों की आय में भी बढ़ोत्तरी होगी, जबकि प्रवेंद्र सिंह रावत ने काश्तकारों को जैविक खेती अपनाने के लिए प्रेरित किया।
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कृषि विज्ञान केंद्र चिन्यालीसौड़ से आए कृषि विशेषज्ञ डा. पंकज नौटियाल ने बताया कि जहां हम एक नाली पर छह पेड़ लगाते हैं, वहां हम 55 पेड़ लगा सकते हैं। पेड़ों को लगाने के लिए केंद्र से लाइन बनानी चाहिए। 3 बाई 3 मीटर के क्षेत्रफल में और 6 फिट की दूरी पर पेड़ लगाने चाहिए। इससे करीब 2 से 3 पेटी सेब एक पेड़ से मिलेंगे। संघन खेती छोटी व लंबी अवधि वाले फलों के लिए उपयोगी होती है। इस दौरान डा. महेंद्रपाल सिंह परमार ने बताया कि सर्वप्रथम संघन खेती का कार्य सेब के बागीचों में यूरोप में किया गया था, लेकिन अब उपला टकनौर के जनजातीय गांव में संघन बागवानी की ओर गेलगाला स्पर प्रजाति के सेब की खेती होगी। काश्तकारों की आय में भी बढ़ोत्तरी होगी, जबकि प्रवेंद्र सिंह रावत ने काश्तकारों को जैविक खेती अपनाने के लिए प्रेरित किया।
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