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बाबा विश्वनाथ और कंडारदेवता के नाम पर बाजार में मिलेगी बिना कैमिकल की धूप और अगरबती
Updated Tue, 12 Sep 2017 10:15 PM IST
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उत्तरकाशी। जल्द ही बाजार में विश्वनाथ के नाम की धूप और कंडार देवता के नाम की अगरबत्ती दिखाई देगी। ये धूप, अगरबत्ती जिले की महिलाएं तैयार करेंगी। इसके लिए दीन दयाल अंत्योदय राष्ट्रीय शहरी आजीविका मिशन (सूडा) की मदद से महिलाओं को स्वरोजगार के प्रति आत्मनिर्भर बनाने के लिए प्रशिक्षण दिया जा रहा है।
जिले के विश्वनाथ मंदिर में हर दिन करीब डेढ़ से दो क्विंटल पुष्प चढ़ते हैं, जो बाद में सफाई के दौरान वेस्ट हो जाते हैं। लेकिन अब इन बर्बाद हो रहे फूलों से धूप और अगरबत्तियां बनेंगी। इसके लिए दीन दयाल अंत्योदय राष्ट्रीय शहरी आजीविका मिशन के तहत क्षेत्र की महिलाओं को विशेष प्रशिक्षण दिया जा रहा है। सूडा के सिटी मिशन मैनेजर जगदीश रतूड़ी ने बताया कि फूलों से बनाए जाने वाले धूप-अगरबत्ती के लिए जिले के प्रमुख मंदिरों के पुजारियों से संपर्क किया जा रहा है। सूडा की ओर से 21 सेल्प हेल्प ग्रुप बनाए गए हैं, जिनको पालिका सभागार में सात दिन का प्रशिक्षण दिया जा रहा है। जिसे नवरात्रों में बाजार में उतारने की कोशिश की जा रही है। ये धूप-अगरबत्ती बिना केमिकल के बनाई जाएगी। इसमें सबसे पहले फूलों को सुखाकर उनका बारिक पाउडर बनाया जाएगा, जिसके बाद पाउडर में खुशबू के लिए नैर के पत्ते मिलाए जाएंगे। नैर एक विशेष प्रकार का पौधा होता है, जिसके पत्ते काफी खुशबूदार होते हैं। बाजार में जो भी उत्पाद बिकेगा उसका पूरा शत प्रतिशत मेहनताना स्वयं सहायता ग्रुप का होगा। प्रत्येक स्वयं सहायता ग्रुप को सूडा की ओर से 10 हजार प्रोत्साहन राशि के तौर पर दी जा रही है, जिससे ग्रुप उत्पाद तैयार करने के लिए रॉ मट्रीरियल खरीदेगा।
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जिले के विश्वनाथ मंदिर में हर दिन करीब डेढ़ से दो क्विंटल पुष्प चढ़ते हैं, जो बाद में सफाई के दौरान वेस्ट हो जाते हैं। लेकिन अब इन बर्बाद हो रहे फूलों से धूप और अगरबत्तियां बनेंगी। इसके लिए दीन दयाल अंत्योदय राष्ट्रीय शहरी आजीविका मिशन के तहत क्षेत्र की महिलाओं को विशेष प्रशिक्षण दिया जा रहा है। सूडा के सिटी मिशन मैनेजर जगदीश रतूड़ी ने बताया कि फूलों से बनाए जाने वाले धूप-अगरबत्ती के लिए जिले के प्रमुख मंदिरों के पुजारियों से संपर्क किया जा रहा है। सूडा की ओर से 21 सेल्प हेल्प ग्रुप बनाए गए हैं, जिनको पालिका सभागार में सात दिन का प्रशिक्षण दिया जा रहा है। जिसे नवरात्रों में बाजार में उतारने की कोशिश की जा रही है। ये धूप-अगरबत्ती बिना केमिकल के बनाई जाएगी। इसमें सबसे पहले फूलों को सुखाकर उनका बारिक पाउडर बनाया जाएगा, जिसके बाद पाउडर में खुशबू के लिए नैर के पत्ते मिलाए जाएंगे। नैर एक विशेष प्रकार का पौधा होता है, जिसके पत्ते काफी खुशबूदार होते हैं। बाजार में जो भी उत्पाद बिकेगा उसका पूरा शत प्रतिशत मेहनताना स्वयं सहायता ग्रुप का होगा। प्रत्येक स्वयं सहायता ग्रुप को सूडा की ओर से 10 हजार प्रोत्साहन राशि के तौर पर दी जा रही है, जिससे ग्रुप उत्पाद तैयार करने के लिए रॉ मट्रीरियल खरीदेगा।
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