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जिला पंचायत में अध्यक्ष और सीडीओ आमने-सामने
Updated Thu, 24 Aug 2017 10:43 PM IST
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उत्तरकाशी। जिला पंचायत में 666 योजनाओं के लिए जारी हुए पौने दो करोड़ रुपये के मामले को लेकर जिला पंचायत अध्यक्ष और सीडीओ आमने-सामने आ गए हैं। अध्यक्ष जशोदा राणा ने मामले में सीडीओ सहित बोर्ड के कुछ सदस्यों पर दबाव बनाने का आरोप लगाया है। वहीं सीडीओ विनीत कुमार ने अध्यक्ष के बयानों को बेबुनियाद करार देते हुए आरोपों का खंडन किया है। उधर मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत द्वारा अपर सचिव को मामले की जांच करने के आदेश दे दिए गए हैं।
जिला पंचायत बोर्ड की 28-29 जून को हुई बैठक में कुछ कर्मचारियों को हटाने के बाद से ये मामला शुरू हुआ था, जिसके बाद जिला पंचायत में सहायक अभियंता नहीं होने पर सिंचाई विभाग से एक अधिशासी अभियंता को जेई के काम के लिए लाया गया। इसके बाद ही राज्य वित्त की करीब सात करोड़ रुपये की 666 योजनाओं को अवस्थापना खंड के जरिए कार्य कराने के लिए प्रस्ताव बनाया गया, जिसकी पहली किस्त के तौर पर एक करोड़ 94 लाख 66 हजार रुपये की अग्रिम राशि देने के लिए चेक तैयार किया गया था। मामले की भनक लगते ही कर्मचारी संगठन की ओर से इसके विरोध में हड़ताल की गई थी।
हफ्तेभर चली हड़ताल के बाद बृहस्पतिवार को अध्यक्ष ने पत्रकार वार्ता कर अपना पक्ष रखा। अध्यक्ष जशोदा राणा ने कहा कि बोर्ड के कुछ सदस्यों द्वारा उन पर प्रस्ताव-16 के जरिए अविश्वास मत लाकर पद से हटाने का दबाव बनाया गया था। इसी बीच सीडीओ ने अपने अधिकारों से बाहर जाकर बिना सूचित किए कर्मचारियों को कार्यमुक्त कर दिया। इसके बाद उन्होंने बाहरी विभाग के अधिकारी को सहायक अभियंता के तौर पर नियुक्त कर दिया। नवनियुक्त अधिकारी द्वारा एक ही दिन में 666 योजनाओं के लिए बिना कोई तकनीकी एवं वित्त स्वीकृति के प्रस्ताव बना दिए गए। जिसके लिए करीब पौने दो करोड़ रुपये का चेक भी तैयार कर दिए गए थे। हालांकि मेरे द्वारा हस्ताक्षर न करने से पैसा नहीं निकल पाया है। उन्होंने कहा कि मामले को लेकर मुख्यमंत्री से शिकायत तथा सबूत पेश किए हैं, जिसके बाद सीएम ने अपर सचिव को मामले की जांच के आदेश दे दिए हैं। वहीं जरूरत पड़ने पर कोर्ट में भी सभी सबूत पेश किए जाएंगे।
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वहीं सीडीओ विनीत कुमार ने कहा कि यह सभी पिछले तीन सालों के रुके कार्य थे, जिनके प्रस्ताव मेरे कार्यकाल से पहले ही तैयार किए जा चुके थे। अध्यक्ष द्वारा भी इन कार्यों को जल्द कराने का दबाव बनाया जा रहा था। उनके हस्ताक्षर एवं स्वीकृति के आधार पर ही कार्रवाई यहां तक पहुंची थी। वहीं कर्मचारियों को हटाने एवं उनके वेतन की राशि के मामले को लेकर प्रमुख सचिव से जांच की मांग की गई है।
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जिला पंचायत बोर्ड की 28-29 जून को हुई बैठक में कुछ कर्मचारियों को हटाने के बाद से ये मामला शुरू हुआ था, जिसके बाद जिला पंचायत में सहायक अभियंता नहीं होने पर सिंचाई विभाग से एक अधिशासी अभियंता को जेई के काम के लिए लाया गया। इसके बाद ही राज्य वित्त की करीब सात करोड़ रुपये की 666 योजनाओं को अवस्थापना खंड के जरिए कार्य कराने के लिए प्रस्ताव बनाया गया, जिसकी पहली किस्त के तौर पर एक करोड़ 94 लाख 66 हजार रुपये की अग्रिम राशि देने के लिए चेक तैयार किया गया था। मामले की भनक लगते ही कर्मचारी संगठन की ओर से इसके विरोध में हड़ताल की गई थी।
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हफ्तेभर चली हड़ताल के बाद बृहस्पतिवार को अध्यक्ष ने पत्रकार वार्ता कर अपना पक्ष रखा। अध्यक्ष जशोदा राणा ने कहा कि बोर्ड के कुछ सदस्यों द्वारा उन पर प्रस्ताव-16 के जरिए अविश्वास मत लाकर पद से हटाने का दबाव बनाया गया था। इसी बीच सीडीओ ने अपने अधिकारों से बाहर जाकर बिना सूचित किए कर्मचारियों को कार्यमुक्त कर दिया। इसके बाद उन्होंने बाहरी विभाग के अधिकारी को सहायक अभियंता के तौर पर नियुक्त कर दिया। नवनियुक्त अधिकारी द्वारा एक ही दिन में 666 योजनाओं के लिए बिना कोई तकनीकी एवं वित्त स्वीकृति के प्रस्ताव बना दिए गए। जिसके लिए करीब पौने दो करोड़ रुपये का चेक भी तैयार कर दिए गए थे। हालांकि मेरे द्वारा हस्ताक्षर न करने से पैसा नहीं निकल पाया है। उन्होंने कहा कि मामले को लेकर मुख्यमंत्री से शिकायत तथा सबूत पेश किए हैं, जिसके बाद सीएम ने अपर सचिव को मामले की जांच के आदेश दे दिए हैं। वहीं जरूरत पड़ने पर कोर्ट में भी सभी सबूत पेश किए जाएंगे।
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वहीं सीडीओ विनीत कुमार ने कहा कि यह सभी पिछले तीन सालों के रुके कार्य थे, जिनके प्रस्ताव मेरे कार्यकाल से पहले ही तैयार किए जा चुके थे। अध्यक्ष द्वारा भी इन कार्यों को जल्द कराने का दबाव बनाया जा रहा था। उनके हस्ताक्षर एवं स्वीकृति के आधार पर ही कार्रवाई यहां तक पहुंची थी। वहीं कर्मचारियों को हटाने एवं उनके वेतन की राशि के मामले को लेकर प्रमुख सचिव से जांच की मांग की गई है।