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उत्तराखण्ड : पापा यह साल की आखिरी ट्रेकिंग है...यह कहकर हर्षिल-छितकुल ट्रेकिंग पर निकली थी दिल्ली निवासी अनीता, असमय मौत

Sun, 24 Oct 2021 07:10 AM IST
Kuldeep Singh न्यूज डेस्क, अमर उजाला, उत्तरकाशी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, उत्तरकाशी Published by: Kuldeep Singh Updated Sun, 24 Oct 2021 07:10 AM IST
सार

हर्षिल-छितकुल ट्रेकिंग के दौरान दिल्ली निवासी अनीता रावत की असमय मौत से उनका परिवार सदमे में है। मूलरूप से टिहरी के बैल गांव निवासी ज्योति सिंह रावत की मंझली बेटी अनीता (37) हर्षिल-छितकुल ट्रेकिंग पर गए 17 सदस्यीय दल में शामिल थी। 21 अक्तूबर को अनीता के परिवार को उसके लापता होने की खबर मिली। बाद में उसका शव बरामद हुआ।

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Uttarakhand: Untimely death of Anita Rawat, a resident of Delhi, who had gone out on Harshil Chitkul trekking,
बर्फ - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

हर्षिल-छितकुल ट्रेकिंग के दौरान दिल्ली निवासी अनीता रावत की असमय मौत से उनका परिवार सदमे में है। वह कुछ दिन पहले ही मोरी-सांकरी क्षेत्र में ट्रेकिंग कर घर लौटी थीं। उनके घरवालों ने उसे इस ट्रेक पर जाने से मना किया था लेकिन अनीता ने इसे साल का अंतिम ट्रेक बताते हुए जाने की जिद की। क्या पता था ये ट्रेकिंग साल की नहीं बल्कि जीवन की अंतिम ट्रेकिंग होगी। 

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आखिरी साबित हुआ सफर
मूलरूप से टिहरी के बैल गांव निवासी ज्योति सिंह रावत की मंझली बेटी अनीता (37) हर्षिल-छितकुल ट्रेकिंग पर गए 17 सदस्यीय दल में शामिल थी। 21 अक्तूबर को अनीता के परिवार को उसके लापता होने की खबर मिली। बाद में उसका शव बरामद हुआ। तभी से मां के आंसू नहीं थम रहे हैं।
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पेशे से थीं दंत चिकित्सक, बिजनेस में बंटाती थीं पिता का हाथ
पेशे से दंत चिकित्सक अनीता दिल्ली के एक नामी अस्पताल में भी सेवाएं दे चुकी थीं। कुछ समय से वह पिता के दिल्ली स्थित मिठाई व बेकरी के बिजनेस में हाथ बंटा रही थीं। शनिवार को जिला अस्पताल की मोर्चरी में शव लेने पहुंचे पिता ज्योति सिंह ने बताया कि अनीता बहुत होनहार थी। वह बिजनेस के हिसाब-किताब से लेकर ड्राइविंग तक सभी काम काम कर लेती थी। उसे ट्रेकिंग का बहुत शौक था। 
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पिता ने सिस्टम पर उठाए सवाल
ज्योति सिंह ने ट्रेकिंग और माउंटेनियरिंग के दौरान होने वाले हादसों के बाद सिस्टम की भूमिका पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि हर्षिल-छितकुल ट्रेक पर गए 17 सदस्यीय दल के छह पोर्टर हिमाचल के सांगला पहुंच गए थे। उनकी सूचना पर तत्काल हेली रेस्क्यू शुरू हो जाता तो उनकी बेटी समेत सभी लोगों को बचाया जा सकता था। उन्होंने ट्रेकिंग के दौरान सेटेलाइट फोन अनिवार्य करने को भी आवश्यक बताया।

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