{"_id":"68b2794b1727c8569a93a060346b7556","slug":"uttarakhand-s-village-are-in-danger","type":"story","status":"publish","title_hn":"इस गांव में जमीन के अंदर हो रही 'हलचल'","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
इस गांव में जमीन के अंदर हो रही 'हलचल'
अमर उजाला, गोपेश्वर/पीपलकोटी
Updated Sun, 25 Aug 2013 11:16 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
बदरीनाथ हाईवे से एक किलोमीटर की दूरी पर स्थित चमेली गांव का अस्तित्व खतरे में पड़ गया है। गांव के बीचोंबीच कई जगहों पर जमीन फट रही है।
विज्ञापन
एक के बाद एक मकान जमीदोज हो रहे हैं। ग्रामीण जहां टेंट लगाकर रह रहे थे, वहां भी दरारें पड़ने लगी हैं। अब पीड़ित ग्रामीण जाएं तो जाएं कहां।
अलकनंदा नदी के ठीक ऊपर बसे चमेली गांव को गढ़वाल के नैनीताल के रुप में भी जाना जाता है। यहां भोटिया जनजाति के 118 परिवार निवास कर रहे हैं। आज यह गांव भी भूस्खलन की गिरफ्त में आ गया है।
विज्ञापन
मकानों में कमरों के अंदर जमीन में दो-दो इंच की दरारें आ गई हैं। दरारें लगातार बढ़ती जा रही हैं। दहशतजदा ग्रामीण अपने घरों को छोड़कर टेंटों में रात गुजारने को मजबूर हैं। चमेली गांव की महिला मंगल दल अध्यक्ष रूपा देवी और कमला देवी बताती हैं कि समस्या वर्ष 2011 से बनी हुई है।
विज्ञापन
तब गांव के ऊपरी क्षेत्र में भूस्खलन होने पर जिला प्रशासन को अवगत कराया गया। तत्कालीन जिलाधिकारी डा. रंजीत सिन्हा ने मौका मुआयना कर भूस्खलन को रोकने के लिए जरूरी कदम उठाने की बात भी कही थी, लेकिन इस पर अमल नहीं हुआ। सरकारी हीलाहवाली के चलते आज पूरे गांव का अस्तित्व खतरे में पड़ गया है।
वे अपने मकानों को अपनी आंखों के सामने टूटते देख रहे हैं, लेकिन प्रशासन का एक नुमाइंदा भी गांव में नहीं पहुंचा है। गांव के जीत सिंह, खड़क सिंह, मोहन सिंह, महेंद्र सिंह, गजेंद्र सिंह, लाल सिंह राणा, महिपाल सिंह, प्रताप सिंह, महेंद्र सिंह, चंद्र सिंह, नरेंद्र सिंह, रघुवीर सिंह, सेन सिंह, भीम सिंह, मनोज कुंवर, अवतार सिंह, एस कुंवर, प्रिंस कुंवर, इंद्र सिंह, वीरेंद्र सिंह, केशर सिंह और राजेंद्र सिंह के मकान जमीदोज हो गए हैं।
ग्राम प्रधान धीरेंद्र गरोड़िया और सतेश्वर प्रसाद सती का कहना है कि गांव को जल्द ही विस्थापित नहीं किया गया तो यहां कभी भी कोई बड़ा हादसा हो सकता है।
चमेली गांव वर्ष 2011 से विस्थापन की श्रेणी में है। गांव के विस्थापन के लिए फिर से शासन को लिखा गया है। देवर खडोरा नामक स्थान पर गांव के लिए भूमि भी चयनित की गई है। शीघ्र गांव को विस्थापित कर दिया जाएगा।
- एसए मुरुगेशन, डीएम, चमोली
चमेली गांव में एक भी आवासीय भवन रहने लायक नहीं हैं। मैं गांव का स्थलीय निरीक्षण कर आ गया हूं। गांव को विस्थापित करना बेहद जरुरी है। इसके लिए डीएम चमोली और शासन से गांव के विस्थापन की प्रक्रिया तत्काल पूर्ण करने के लिए लिखा गया है।
- राजेंद्र भंडारी, विधायक, बदरीनाथ विधान सभा क्षेत्र
चमोली जिले के घिंघराण क्षेत्र के अधिकांश गांव सैकड़ों वर्ष पूर्व हुए भूस्खलन के मलबे के ढेर में बसे हुए हैं। इनमें से चमेली गांव भी शामिल है। अब क्षेत्र में अनियोजित निर्माण और गांव के निचले क्षेत्र से अलकनंदा नदी से हो रहे भूक्षरण से गांव में भू-धंसाव की स्थिति पैदा हो गई है। हो सकता है यहां भूमि के भीतर पुराना गदेरा फिर विकसित हो रहा हो, जिससे भारी बारिश होने के बाद जमीन के भीतर उथल-पुथल मच रही है।
- डा. एसपी सती, भूगर्भ वैज्ञानिक, गढ़वाल विवि, श्रीनगर
भूस्खलन को रोकने के लिए उपाय
-गांव में बरसाती पानी के ड्रेनेज की व्यवस्था सुचारु हो
-अलकनंदा नदी साइड में भूस्खलन रोकने के लिए सुरक्षा दीवार का निर्माण किया जाए
-गदेरों के इर्द-गिर्द निर्माण कार्यों पर रोक लगे
-क्षेत्र में पौधरोपण पर विशेष ध्यान दिया जाए
फेसबुक पर अपनी राय देने के लिए यहां क्लिक करें