हल्की सी बारिश में छोड़ देते हैं गांव
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आपदा के कहर को भले ही एक माह से अधिक समय बीत गया हो, लेकिन प्रभावित गांवों में अभी भी हालात सामान्य नहीं हो पाए। सिरोर गांव के बयाणा तोक के पंद्रह परिवार हल्की बारिश में घर छोड़ने को मजबूर हैं। प्रशासन द्वारा प्रभावितों को शिफ्ट करना तो दूर की बात अभी तक सिर ढकने के लिए तिरपाल नहीं दिए गए।
बृहस्पतिवार को मैं जिला मुख्यालय से सात किलोमीटर वाहन से नेताला पहुंचा और यहां से एक किलोमीटर पैदलकर भागीरथी के तट पर बसे भटवाड़ी प्रखंड के सिरोर गांव पहुंचा। यहां बयाणा तोक में 16 व 17 जून की बाढ़ से भारी तबाही मची हुई है। गांव के दो घर मलबे में दबे हुए है, जबकि 15 से अधिक घरों को बाढ़ का खतरा बना हुआ है।
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कला देवी ने बताया कि इस बार की बाढ़ को वे कभी भूल नहीं पाएगी। जीवन के 56 वर्षा ऋतु देख चुकी हूं, लेकिन ऐसी तबाही कभी नहीं देखी। बाढ़ से खुद मेरा घर मलबे में दब गया था। हमने किसी तरह भाग कर जान बचाई। अब मैं अपने 18 वर्षीय बेटे के साथ गांव से दूर कच्ची झोपड़ी में रह रही हूं।
गांव के चंद्रलाल शाह ने बताया कि अब तो आसमान में बादल मंडराते ही डर लगने लगता है, जिस दिन बारिश होती है उस दिन गांव के 15 से अधिक परिवार घर छोड़कर स्कूल में चले जाते हैं। दलेब सिंह बताते हैं कि प्रशासन की ओर से अभी तक उन्हें 15-15 किलो चावल-गेंहू के अलावा और कोई मदद नहीं मिल पाई। लालटेन व तिरपाल की मांग की गई, लेकिन उन्हें नहीं दी गई।
प्रशासन ने दिया था आश्वासन
सिरोर गांव के ग्रामीणों ने बाढ़ के कुछ दिन बाद जिला मुख्यालय पहुंचकर खतरे की जद में आए गांव के प्रभावित परिवारों को शिफ्ट करने की मांग की थी, जिस पर भटवाड़ी एसडीएम केके सिंह ने नेताला में खाली पड़े अस्पताल के भवनों में प्रभावित परिवारों को शिफ्ट करने का आश्वासन दिया था, लेकिन आज तक भी प्रभावितों को शिफ्ट नहीं किया गया।
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