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हर ओर सन्नाटा, कराह रही है फूलों की घाटी

Wed, 31 Jul 2013 12:17 AM IST
गोपेश्वर/राजा तिवारी
गोपेश्वर/राजा तिवारी Updated Wed, 31 Jul 2013 12:17 AM IST
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uttarakhand disaster pushpawati valley of flowers

उत्तराखंड आपदा ने नाजुक फूलों पर भी सितम ढाए हैं।

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विश्व के धरोहरों में शुमार फूलों की घाटी कराह रही है पर इसकी कराह सुनने वाला कोई नहीं है। चारधाम यात्रा के साथ जून के पहले हफ्ते से गुलजार रहने वाली फूलों की घाटी में सन्नाटा पसरा है। रास्ते टूटे-फूटे हैं।

टिपरा ग्लेशियर की कोख से निकल कर घाटी में बहने वाली पुष्पावती नदी ने कितना कहर ढाया है, फूलों और यहां की जैव विविधता को कितना नुकसान पहुंचा है इसका आंकलन करना तो दूर, यहां तक पहुंचा भी नहीं जा सका है। इससे प्रकृति प्रेमी और वनस्पति विज्ञानी आहत हैं।
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उत्तराखंड में आई आपदा के दौरान पुष्पावती नदी 17 जून की सुबह रौद्र रूप के साथ कई पेड़ों को उखाड़ कर ले गई। भ्यूंडार और पुलना गांव पूरी तरह बर्बाद हो गए। उनकी तबाही सबने देखी।
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फूलों की घाटी में इस त्रासदी से कितना नुकसान हुआ है, इसका डेढ़ माह गुजरने के बाद भी वन विभाग आंकलन नहीं कर पाया है। फूलों की घाटी में विविध फूलों की कई प्रजातियों और इसके प्राकृतिक सौंदर्य को देखते हुए 2005 में यूनेस्को द्वारा 87.5 वर्ग किमी में फैली इस घाटी को विश्व धरोहर का दर्जा दिया था।

घाटी को 1 जून से पर्यटकों के लिए खोल दिया जाता था। जिससे यह घाटी पर्यटकों से गुलजार रहती थी। लेकिन इस वर्ष 16/17 जून को आए जल प्रलय के बाद घाटी को जाने वाले सभी रास्ते बह गए।

इस वर्ष 15 जून तक 484 ही पयर्टक यहां पहुंच पाए। सर्वोदयी नेता चक्रधर तिवारी का कहना है कि प्राकृतिक संतुलन के लिए फूलों की घाटी को सहेजकर रखना बेहद जरूरी है।

फूलों की घाटी विश्व धरोहर है। यहां बेशकीमती वनस्पति मौजूद हैं। जो यदि आपदा के चलते विलुप्त होती हैं, तो ये बड़ी क्षति होगी।--विश्वपति भट्ट, वनस्पति विज्ञानी


आपदा के बाद घाटी तक जाने वाले सभी मार्ग, पुल क्षतिग्रस्त होने के चलते अभी घाटी में पहुंचना संभव नहीं हो पाया है। कितना नुकसान हुआ है इसकी जानकारी नहीं है। बादल घिरे रहने से सेटेलाइट से भी स्पष्ट जानकारी नहीं मिल पा रही है। मार्ग खुलने पर ही स्थिति पता चल पाएगी।--सर्वेश कुमार दुबे, प्रभागीय वनाधिकारी, नंदा देवी राष्ट्रीय पार्क, चमोली

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