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Hindi News ›   Uttarakhand ›   Uttarakhand Agriculture Production and Marketing Board. 

अब शराब से नहीं हो पाएगी मंडी परिषदों की मोटी कमाई

Tue, 19 Apr 2016 09:30 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, देहरादून
ब्यूरो/अमर उजाला, देहरादून Updated Tue, 19 Apr 2016 09:30 PM IST
सार

  • शराब कारोबार से परिषद को होती थी मोटी कमायी
  • कुल मुनाफे में से 50 फीसदी कमायी पर मंडी परिषद का कब्जा
  • 25 -25 फीसदी मुनाफा केएमवीएन, जीएमवीएन के खाते में 

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Uttarakhand Agriculture Production and Marketing Board. 
- फोटो : demo

विस्तार

शासन की ओर से आबकारी नीति एफएल - टू में बदलाव किए जाने के बाद उत्तराखंड कृषि उत्पादन एवं विपणन बोर्ड यानी मंडी परिषद को करारा वित्तीय झटका लगा है। उल्लेखनीय है कि एफएल टू नीति लागू होने और शराब कारोबार का जिम्मा मंडी परिषद के पास होने की वजह से परिषद को मोटी कमायी होती थी। 

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आंकड़ों पर नजर डाले तो शराब कारोबार से होने वाली आय में से 50 फीसदी मुनाफा मंडी परिषद के खाते में जाता था जबकि बाकी 25 -25 फीसदी कमायी गढ़वाल मंडल विकास निगम और कुमाऊं मंडल विकास निगम को होती थी। राज्य सरकार की ओर से आबकारी नीति एफएल टू लागू किए जाने के प्रदेश में शराब कारोबार का जिम्मा मंडी परिषद के पास था। 
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मंडी परिषद के जरिए पूरे प्रदेश में बेची जाती थी शराब
मंडी परिषद के जरिए पूरे प्रदेश में शराब बेची जाती थी। परिषद की ओर से गढ़ृ़वाल और कुमाऊं में दो बड़े स्टोर खोले गए थे। इन स्टोरों से दोनों मंडलों के सभी 13 जिलों में शराब की आपूर्ति की जाती थी। 
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मंडी परिषद ने शराब के कारोबार के लिए ठीकठाक तंत्र भी विकसित कर लिया था जिसमें विभागीय अफसरों, कर्मचारियों की तैनाती के साथ ही गढ़वाल मंडल विकास निगम (जीएमवीएन) और कुमाऊं मंडल विकास निगम (केएमवीएन) से बड़े बड़े गोदाम किराए पर लिए गए थे। 

कांग्रेस सरकार की ओर से शराब कारोबार का जिम्मा मंडी परिषद को सौंपे जाने के बाद इससे होने वाले लाभ से परिषद ने विकास की तमाम योजनाएं तैयार की थी जिन्हें अब किसी भी सूरत में मूर्तरूप नही दिया जा सकेगा। 

सरकार ने शराब कारोबार की जिम्मेदारी बेशक मंडी परिषद को थी लेकिन इससे कारोबारियों को कई परेशानियां भी थी। जिसे कारोबारी खुलकर बोल नहीं पाते थे।

एफएल टू नीति से सरकार की कमायी को झटका

Uttarakhand Agriculture Production and Marketing Board. 
उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत - फोटो : amar ujala

आबकारी विभाग के ही आंकड़ों पर नजर डाले तो साल 2015-16 में सरकार की ओर से एफएल टू नीति लागू किए जाने के बाद कमायी को करारा झटका लगा। सरकार ने शराब कारोबार से 1800 करोड़ कमाने का लक्ष्य निर्धारित किया। लेकिन तमाम प्रयासों के बावजूद 1720 करोड़ का लक्ष्य हासिल किया जा सका। 

चालू वित्तीय वर्ष में सरकार ने 2100 करोड़ की कमायी का लक्ष्य निर्धारित किया है। विभागीय अधिकारी इस आंकड़े को कहां तक छू पाते हैं यह देखने वाली बात होगी। 

बाजार से गायब हो गए थे नामीगिरामी ब्रांड 
एफएल टू नीति लागू होने के बाद नामीगिरामी शराब कंपनियों के ब्रांड बाजार से गायब ही हो गए थे। शराब के शौकीन अपनी मनपसंद ब्रांड की शराब से महरूम थे। 

ऐसे में स्थिति यह थी कि शौकीनों को घटिया क्वालिटी की शराब से गला तर करना पड़ रहा था या फिर दिल्ली, हिमालच प्रदेश या हरियाणा से तस्करी कर लायी शराब के भरोसे अपना शौक पूरा करना पड़ रहा था जो उनकी जेब पर भारी पड़ रहा था। शराब तस्करी के कारोबार से सरकारी मुलाजिमों और तस्करों समेत कई लोग मालामाल हो रहे थे। 

बाजार से नामीगिरामी ब्रांड के नदारद होने की वजह से कई कंपनियों ने अदालत का भी दरवाजा खटखटाया था। आखिरकार अदालत के हस्तक्षेप के बाद उन कंपनियों के ब्रांड बाजार में उतारे गए थे। 

अब जबकि शासन ने आबकारी नीति में बदलाव कर दिया है तो शराब के शौकीनों को इस बात की उम्मीद जगी है कि उन्हें अब मनपसंद ब्रांड से गला तर करने का पूरा मौका मिलेगा।

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