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शिक्षकों की मेहनत से छात्रों में बन रहा पढ़ाई से जुड़ाव
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देवेंद्र कुमार पांडेय
- फोटो : KASHIPUR
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काशीपुर। कोरोना के दौरान स्कूल-कॉलेज बंद रहे हैं लेकिन शिक्षकों ने मेहनत करके छात्रों को पढ़ाई से जोड़े रखा।
सरकारी स्कूल और निजी स्कूलों के शिक्षकों ने छात्रों की सहूलियत के आधार पर घर बैठे पढ़ाई से जोड़ा और सीखने की प्रक्रिया के अंतर को भरने का प्रयास किया। शिक्षकों की इसी मुहिम और नवाचारों का फायदा अब ऑफलाइन मोड में आने के बाद दिख रहा है। अधिकतर बच्चों में पढ़ने को लेकर दिलचस्पी बनी हुई है। दो साल तक घर में रहकर पढ़ाई करने से छात्रों में अनुशासनहीनता, वर्तनी की गलतियों के साथ ही लर्निंग गैप दिख रहा है।
इन सब खामियों में सुधार लाने के लिए शिक्षक छात्रों से संयमित व्यवहार, तनाव नहीं लेने और गुस्सा नहीं करने आदि की बात समझा रहे हैं। वहीं बच्चों में जो लर्निंग गैप दिखाई दे रहा है उसे भी धीरे-धीरे दूर करने का शिक्षक प्रयास कर रहे हैं। जब महामारी का दौर था तब सरकारी स्कूलों में ऐसे कई छात्र थे जिनके परिवार में एक ही मोबाइल फोन था। उक्त सदस्य के बाहर जाने पर छात्रों को दिक्कत हो रही थी।
तब शिक्षकों ने व्हाट्सएप ग्रुप बनाकर उससे अभिभावकों को जोड़ा और उन्हें पढ़ाई की सामग्री उपलब्ध कराई ताकि बच्चा जब घर में मोबाइल पर हो तब वह अपनी पढ़ाई कर सके। साथ ही यूट्यूब सेशन के अलावा वीडियो बनाकर पढ़ने में मदद कराई। यही वजह है कि आज भी सरकारी स्कूल के छात्रों में पढ़ाई के प्रति दिलचस्पी है।
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-ऑनलाइन पढ़ाई में छात्र भावनात्मक रूप से नहीं जुड़ पाता है। ऑफलाइन शिक्षा से छात्रों के पठन-पाठन के साथ-साथ अन्य गतिविधियों पर नजर रखी जा सकती है। शिक्षा का उद्देश्य मात्र विषय का पठन-पाठन ही नहीं बल्कि छात्र के संपूर्ण व्यक्तित्व का विकास करना है और उसे अच्छा नागरिक बनने के लिए प्रेरित करना है। आर्थिक संसाधन के अभाव के कारण सरकारी विद्यालयों के छात्र पूरी तरह से लाभ ले नहीं पा रहे हैं।
मुनीश कांत शर्मा, प्रवक्ता, उदयराज हिंदू इंटर कॉलेज
-छात्रों को कक्षा कक्ष में पठन-पाठन की ओर अग्रसर करने के लिए उनकी पारिवारिक पृष्ठभूमि की जानकारी जरूरी है। छात्रों की शैक्षिक गतिविधियों की जानकारी अभिभावकों तक समय से पहुंचे, इसके लिए हम सभी को भरसक प्रयास करने के साथ-साथ उनकी समस्याओं के समाधान के लिए सहयोग करना चाहिए।
संगीता जैन, प्रवक्ता, किसान इंटर कॉलेज
-छात्रों के बेहतर भविष्य के लिए अभिभावकों का सहयोग बेहद जरूरी है। समय और नियमित रूप से छात्रों को विद्यालय भेजने की उनकी नैतिक जिम्मेदारी है। भरण-पोषण या पारिवारिक आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए विभिन्न कार्यों में लगे छात्रों को अपनी पढ़ाई पर विशेष ध्यान देना चाहिए।
नितिन चौहान, सहायक अध्यापक, जीबी पंत इंटर कॉलेज
-ऑनलाइन शिक्षण से छात्रों में लिखने की जो कमी पाई गई है। उसके लिए छात्रों को नियमित रूप से गृह कार्य और उसका मूल्यांकन बहुत जरूरी है। इसके साथ ही लेखन कार्य के अंतर्गत कहानियां, कविता समेत विभिन्न विधाओं पर अधिक ध्यान देने की जरूरत है। छात्रों को विद्यालय से जुड़ाव की ओर अग्रसर होने के लिए पढ़ाई के साथ-साथ आनंदम गतिविधियों, खेलकूद और रोचक क्रियाकलापों को विद्यालयों में प्रभावी ढंग से लागू करना चाहिए।
देवेंद्र कुमार पांडेय, सहायक अध्यापक, अटल उत्कृष्ट राजकीय इंटर कॉलेज प्रतापपुर।
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सरकारी स्कूल और निजी स्कूलों के शिक्षकों ने छात्रों की सहूलियत के आधार पर घर बैठे पढ़ाई से जोड़ा और सीखने की प्रक्रिया के अंतर को भरने का प्रयास किया। शिक्षकों की इसी मुहिम और नवाचारों का फायदा अब ऑफलाइन मोड में आने के बाद दिख रहा है। अधिकतर बच्चों में पढ़ने को लेकर दिलचस्पी बनी हुई है। दो साल तक घर में रहकर पढ़ाई करने से छात्रों में अनुशासनहीनता, वर्तनी की गलतियों के साथ ही लर्निंग गैप दिख रहा है।
इन सब खामियों में सुधार लाने के लिए शिक्षक छात्रों से संयमित व्यवहार, तनाव नहीं लेने और गुस्सा नहीं करने आदि की बात समझा रहे हैं। वहीं बच्चों में जो लर्निंग गैप दिखाई दे रहा है उसे भी धीरे-धीरे दूर करने का शिक्षक प्रयास कर रहे हैं। जब महामारी का दौर था तब सरकारी स्कूलों में ऐसे कई छात्र थे जिनके परिवार में एक ही मोबाइल फोन था। उक्त सदस्य के बाहर जाने पर छात्रों को दिक्कत हो रही थी।
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तब शिक्षकों ने व्हाट्सएप ग्रुप बनाकर उससे अभिभावकों को जोड़ा और उन्हें पढ़ाई की सामग्री उपलब्ध कराई ताकि बच्चा जब घर में मोबाइल पर हो तब वह अपनी पढ़ाई कर सके। साथ ही यूट्यूब सेशन के अलावा वीडियो बनाकर पढ़ने में मदद कराई। यही वजह है कि आज भी सरकारी स्कूल के छात्रों में पढ़ाई के प्रति दिलचस्पी है।
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-ऑनलाइन पढ़ाई में छात्र भावनात्मक रूप से नहीं जुड़ पाता है। ऑफलाइन शिक्षा से छात्रों के पठन-पाठन के साथ-साथ अन्य गतिविधियों पर नजर रखी जा सकती है। शिक्षा का उद्देश्य मात्र विषय का पठन-पाठन ही नहीं बल्कि छात्र के संपूर्ण व्यक्तित्व का विकास करना है और उसे अच्छा नागरिक बनने के लिए प्रेरित करना है। आर्थिक संसाधन के अभाव के कारण सरकारी विद्यालयों के छात्र पूरी तरह से लाभ ले नहीं पा रहे हैं।
मुनीश कांत शर्मा, प्रवक्ता, उदयराज हिंदू इंटर कॉलेज
-छात्रों को कक्षा कक्ष में पठन-पाठन की ओर अग्रसर करने के लिए उनकी पारिवारिक पृष्ठभूमि की जानकारी जरूरी है। छात्रों की शैक्षिक गतिविधियों की जानकारी अभिभावकों तक समय से पहुंचे, इसके लिए हम सभी को भरसक प्रयास करने के साथ-साथ उनकी समस्याओं के समाधान के लिए सहयोग करना चाहिए।
संगीता जैन, प्रवक्ता, किसान इंटर कॉलेज
-छात्रों के बेहतर भविष्य के लिए अभिभावकों का सहयोग बेहद जरूरी है। समय और नियमित रूप से छात्रों को विद्यालय भेजने की उनकी नैतिक जिम्मेदारी है। भरण-पोषण या पारिवारिक आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए विभिन्न कार्यों में लगे छात्रों को अपनी पढ़ाई पर विशेष ध्यान देना चाहिए।
नितिन चौहान, सहायक अध्यापक, जीबी पंत इंटर कॉलेज
-ऑनलाइन शिक्षण से छात्रों में लिखने की जो कमी पाई गई है। उसके लिए छात्रों को नियमित रूप से गृह कार्य और उसका मूल्यांकन बहुत जरूरी है। इसके साथ ही लेखन कार्य के अंतर्गत कहानियां, कविता समेत विभिन्न विधाओं पर अधिक ध्यान देने की जरूरत है। छात्रों को विद्यालय से जुड़ाव की ओर अग्रसर होने के लिए पढ़ाई के साथ-साथ आनंदम गतिविधियों, खेलकूद और रोचक क्रियाकलापों को विद्यालयों में प्रभावी ढंग से लागू करना चाहिए।
देवेंद्र कुमार पांडेय, सहायक अध्यापक, अटल उत्कृष्ट राजकीय इंटर कॉलेज प्रतापपुर।

नितिन चौहान- फोटो : KASHIPUR

संगीता जैन- फोटो : KASHIPUR

मुनीशकांत शर्मा- फोटो : KASHIPUR