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क्या वीरेंद्र और आनंद पार लगा पाएंगे हरदा की चुनावी नैय्या
अमर उजाला ब्यूरो, रुद्रपुर
Updated Mon, 06 Feb 2017 12:37 AM IST
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ऊधमसिंह नगर जिले की सबसे हॉट सीट किच्छा से चुनावी मैदान में उतरे कांग्रेस प्रत्याशी सीएम हरीश रावत ने अपने पुत्र आनंद और वीरेंद्र को चुनावी रण की कमान सौंप दी है। लेकिन सीएम की खुद इस सीट पर गैरमूजदगी कार्यकर्ताओं को असमंजस में डाल रही है। सीएम पुत्र आनंद रावत का जहां यह कहना है कि उनके पिता किच्छा सीट से प्रत्याशी होने के साथ ही कांग्रेस के स्टार प्रचारक हैं, वहीं कार्यकर्ताओं में आशंका बनी हुई है कि हरदा के दोनों सीट पर चुनाव जीतने के बाद अगर किच्छा सीट पर उपचुनाव की संभावना बनती है तो वह अपने पुत्र को लांच कर किच्छा सीट पर बैठा सकते हैं।
चुनावी बिगुल बजने के बाद ऊधमसिंह नगर की किच्छा विधानसभा सीट पर कांग्रेस पार्टी से अधिक दावेदारों के खड़े होने पर सीएम हरीश रावत ने खुद ही इस सीट से चुनाव लडने का ऐलान कर इस सीट को सबसे हॉट बना दिया था। हरदा के ऐलान से नाराज कुछ दावेदारों ने जब अपने वर्षो के सपने को चकनाचूर होते देखा तो उनमें बगावत के शुर पनपने लगे जिसे कई हथकंडे अपनाकर हरदा ने शांत करा दिया। लेकिन फिर भी कुछ कार्यकर्ताओं और दावेदारों के अंदर का आक्रोश शांत नहीं हुआ और उन्होंने हरदा के नामांकन के समय अपने इस आक्रोश का अहसास भी करा दिया था।
अभी हरदा ने अपने बेटे आनंद और विरेंद्र को किच्छा सीट की कमान सौंप दी है। आनंद की मानें तो अभी कांग्रेस की लड़ाई भाजपा से नहीं बल्कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से है और भाजपा जहां मोदी को स्टार प्रचारक बनाकर ऊधमसिंह नगर पर कब्जा करना चाहती है वहीं कांग्रेस पार्टी भी हरीश रावत को अपना स्टार प्रचारक मानती है लेकिन कार्यकर्ताओं का दर्द यह है कि जिस प्रत्याशी के नाम से वह लोगों के बीच जाकर वोट की अपील कर रहे हैं जब वहीं उन्हें उपलब्ध नहीं हो पा रहे हैं तो वह आम मतदाता को कैसे उनके नाम पर वोट डालने के लिए प्रेरित करें और मतदाताओं को यह भ्रम है कि जब प्रत्याशी के रूप में हरदा उनसे रुबरु नहीं हो पा रहे हैं तो क्या प्रमाण है कि हरदा को चुनाव जिताने के बाद वह उन्हें अपनी समस्या बता पाएंगे।
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इसके साथ ही कार्यकर्ताओं को यह भी आशंका है कि आनंद और विरेंद्र को पूरी तरह से चुनावी रण की बागडोर सौंपने के पीछे कहीं सीएम की मंशा उपचुनाव के माध्यम से उन्हें लांच करने की तो नहीं है। हालांकि आनंद रावत इस बात को पूरी तरह से नकार रहे हैं उनका कहना है कि फिलहाल पार्टी का लक्ष्य चुनावी रणनीति का सफल करना है और जहां तक बात है सीएम कौन सी सीट छोड़ेंगे तो अनुमान लगाया जा रहा है कि जिस सीट पर सीएम को अधिक मत मिलेंगे उस सीट को वह किसी और कार्यकर्ता की झोली में डालेंगे और कार्यकर्ता के चुनाव के लिए उन्होंने किच्छा सीट को सेक्टरों में बांट कर नाराज कार्यकर्ताओं और दावेदारों को वहां की कमान सौंपी है। सूत्रों के अनुसार जिस सेक्टर का प्रभारी सबसे अधिक वोट लाएगा उसे उपचुनाव की कमान सौंपी जा सकती है। लेकिन फिर एक बार उपचुनाव के आधार पर टिकट मिलने की आश जताये कार्यकर्ताओं के मन के इस संशय को निकलना कि कहीं बेटों की लांचिग तो नहीं होगी अभी भी हरदा और उनके बेटों के लिए टेड़ी खीर साबित हो रही है।
किच्छा हॉट सीट पर चुनाव जीतने के लिए जहां कांग्रेस प्रत्याशी हरीश रावत अपने समर्थकों को एकजुट होकर काम करने के लिए हर हथकंडे को अपना रहे हैं वहीं भाजपा कार्यकर्ता चुनावों में मैदानी और पहाड़ी प्रत्याशी के फैक्टर को हथियार बनाने की भी कोशिश कर रहे हैं। आम जन की राय मानें तो किच्छा सीट पर जहां शहरी क्षेत्र में कांग्रेस आगे है वहीं ग्रामीण क्षेत्र में भाजपा कांग्रेस को पछाड़ रही है और अब शहरी क्षेत्र में भी अपनी बढ़त बनाने के लिए भाजपा मैदानी और पहाड़ी प्रत्याशी के फैक्टर को भी अपना हथियार बना रही है।
किच्छा सीट पर चुनाव लड़ रहे कांग्रेस प्रत्याशी हरीश रावत ने अपने कार्यकर्ताओं द्वारा क्षेत्र की विकास के लिए की गई पुरानी मांगों को ही अपना चुनावी मुद्दा बनाया है। कार्यकर्ताओं और दावेदारों की मानें तो हरदा के पास मुख्य चुनावी मुद्दे क्षेत्र में जीजीआईसी के उच्चीकरण, सरकारी अस्पताल की स्थापना के साथ ही डिग्री कॉलेज में विष्य बड़ाने और सड़कों का निर्माण हैं और इन सभी मुद्दों को कार्यकर्ता पहले से उठाते आये है लेकिन बतौर मुख्यमंत्री हरीश रावत ने कभी इन पर अमल नहीं किया। वहीं इस मामले में आनंद रावत की मानें तो सीएम का मुद्दें पर विचार करना महत्वपूर्ण है लेंकिन इससे कहीं अधिक जिम्मेदारी क्षेत्रीय विधायक की होती है।
किच्छा विधानसभा हॉट सीट पर हरीश रावत के मैदान में उतरने से कांग्रेसियों का उत्साह बड़ रहा है लेकिन कांग्रेस से बगावत कर भाजपा में आये यशपाल आर्य किच्छा सीट से शुक्ला को जीताने के लिए अपना कोई योगदान नहीं दे पा रहे हैं। कार्यकर्ताओं की मानें तो अगर यशपाल इस सीट पर राजेश शुक्ला के समर्थन में आयें तो उन्हें हरीश रावत की रणनीति समझने का विकल्प मिल सकता है।
चुनावी बिगुल बजने के बाद ऊधमसिंह नगर की किच्छा विधानसभा सीट पर कांग्रेस पार्टी से अधिक दावेदारों के खड़े होने पर सीएम हरीश रावत ने खुद ही इस सीट से चुनाव लडने का ऐलान कर इस सीट को सबसे हॉट बना दिया था। हरदा के ऐलान से नाराज कुछ दावेदारों ने जब अपने वर्षो के सपने को चकनाचूर होते देखा तो उनमें बगावत के शुर पनपने लगे जिसे कई हथकंडे अपनाकर हरदा ने शांत करा दिया। लेकिन फिर भी कुछ कार्यकर्ताओं और दावेदारों के अंदर का आक्रोश शांत नहीं हुआ और उन्होंने हरदा के नामांकन के समय अपने इस आक्रोश का अहसास भी करा दिया था।
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अभी हरदा ने अपने बेटे आनंद और विरेंद्र को किच्छा सीट की कमान सौंप दी है। आनंद की मानें तो अभी कांग्रेस की लड़ाई भाजपा से नहीं बल्कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से है और भाजपा जहां मोदी को स्टार प्रचारक बनाकर ऊधमसिंह नगर पर कब्जा करना चाहती है वहीं कांग्रेस पार्टी भी हरीश रावत को अपना स्टार प्रचारक मानती है लेकिन कार्यकर्ताओं का दर्द यह है कि जिस प्रत्याशी के नाम से वह लोगों के बीच जाकर वोट की अपील कर रहे हैं जब वहीं उन्हें उपलब्ध नहीं हो पा रहे हैं तो वह आम मतदाता को कैसे उनके नाम पर वोट डालने के लिए प्रेरित करें और मतदाताओं को यह भ्रम है कि जब प्रत्याशी के रूप में हरदा उनसे रुबरु नहीं हो पा रहे हैं तो क्या प्रमाण है कि हरदा को चुनाव जिताने के बाद वह उन्हें अपनी समस्या बता पाएंगे।
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इसके साथ ही कार्यकर्ताओं को यह भी आशंका है कि आनंद और विरेंद्र को पूरी तरह से चुनावी रण की बागडोर सौंपने के पीछे कहीं सीएम की मंशा उपचुनाव के माध्यम से उन्हें लांच करने की तो नहीं है। हालांकि आनंद रावत इस बात को पूरी तरह से नकार रहे हैं उनका कहना है कि फिलहाल पार्टी का लक्ष्य चुनावी रणनीति का सफल करना है और जहां तक बात है सीएम कौन सी सीट छोड़ेंगे तो अनुमान लगाया जा रहा है कि जिस सीट पर सीएम को अधिक मत मिलेंगे उस सीट को वह किसी और कार्यकर्ता की झोली में डालेंगे और कार्यकर्ता के चुनाव के लिए उन्होंने किच्छा सीट को सेक्टरों में बांट कर नाराज कार्यकर्ताओं और दावेदारों को वहां की कमान सौंपी है। सूत्रों के अनुसार जिस सेक्टर का प्रभारी सबसे अधिक वोट लाएगा उसे उपचुनाव की कमान सौंपी जा सकती है। लेकिन फिर एक बार उपचुनाव के आधार पर टिकट मिलने की आश जताये कार्यकर्ताओं के मन के इस संशय को निकलना कि कहीं बेटों की लांचिग तो नहीं होगी अभी भी हरदा और उनके बेटों के लिए टेड़ी खीर साबित हो रही है।
किच्छा हॉट सीट पर चुनाव जीतने के लिए जहां कांग्रेस प्रत्याशी हरीश रावत अपने समर्थकों को एकजुट होकर काम करने के लिए हर हथकंडे को अपना रहे हैं वहीं भाजपा कार्यकर्ता चुनावों में मैदानी और पहाड़ी प्रत्याशी के फैक्टर को हथियार बनाने की भी कोशिश कर रहे हैं। आम जन की राय मानें तो किच्छा सीट पर जहां शहरी क्षेत्र में कांग्रेस आगे है वहीं ग्रामीण क्षेत्र में भाजपा कांग्रेस को पछाड़ रही है और अब शहरी क्षेत्र में भी अपनी बढ़त बनाने के लिए भाजपा मैदानी और पहाड़ी प्रत्याशी के फैक्टर को भी अपना हथियार बना रही है।
किच्छा सीट पर चुनाव लड़ रहे कांग्रेस प्रत्याशी हरीश रावत ने अपने कार्यकर्ताओं द्वारा क्षेत्र की विकास के लिए की गई पुरानी मांगों को ही अपना चुनावी मुद्दा बनाया है। कार्यकर्ताओं और दावेदारों की मानें तो हरदा के पास मुख्य चुनावी मुद्दे क्षेत्र में जीजीआईसी के उच्चीकरण, सरकारी अस्पताल की स्थापना के साथ ही डिग्री कॉलेज में विष्य बड़ाने और सड़कों का निर्माण हैं और इन सभी मुद्दों को कार्यकर्ता पहले से उठाते आये है लेकिन बतौर मुख्यमंत्री हरीश रावत ने कभी इन पर अमल नहीं किया। वहीं इस मामले में आनंद रावत की मानें तो सीएम का मुद्दें पर विचार करना महत्वपूर्ण है लेंकिन इससे कहीं अधिक जिम्मेदारी क्षेत्रीय विधायक की होती है।
किच्छा विधानसभा हॉट सीट पर हरीश रावत के मैदान में उतरने से कांग्रेसियों का उत्साह बड़ रहा है लेकिन कांग्रेस से बगावत कर भाजपा में आये यशपाल आर्य किच्छा सीट से शुक्ला को जीताने के लिए अपना कोई योगदान नहीं दे पा रहे हैं। कार्यकर्ताओं की मानें तो अगर यशपाल इस सीट पर राजेश शुक्ला के समर्थन में आयें तो उन्हें हरीश रावत की रणनीति समझने का विकल्प मिल सकता है।