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Udham Singh Nagar News: पानी की कमी बढ़ा रही वन्यजीव और मानव संघर्ष
Sat, 04 May 2024 02:41 AM IST
हल्द्वानी ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, ऊधम सिंह नगर
संवाद न्यूज एजेंसी, ऊधम सिंह नगर
Updated Sat, 04 May 2024 02:41 AM IST
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जसपुर। बढ़ती गर्मी के साथ मानव वन्यजीव संघर्ष की घटनाओं में वृद्धि हो रही है। तपिश भरी गर्मी से मानव-जीवन सहित वन्यजीव भी बुरी तरह प्रभावित हैं। भूख और प्यास बुझाने के लिए वन्यप्राणी इधर-उधर भटक रहें हैं। वन्यजीव के बढ़ते हमलों से किसान व वनक्षेत्र की सीमावर्ती ग्रामीण अपनी सुरक्षा को लेकर चिंतित हैं। वन विभाग के तमाम प्रयासों के बावजूद भी इस प्रकार की घटनाएं थमने का नाम नहीं ले रही। शिकारी वन्यजीवों का आबादी की ओर मूवमेंट खतरे की घंटी हैं। वन विभाग प्रचुर मात्रा में पानी होने का दावा कर रहा हैं, जबकि तालाब खत्म हो गए हैं।
एक दशक पूर्व तक गांवों के नजदीक खूब तालाब देखने को मिलते थे। समय के साथ यह सिर्फ राजस्व अभिलेखों तक सिमट कर रह गए हैं। इन तालाबों से पशु-पक्षी अपनी प्यास बुझाते थे। पेड़ पौधों के कटान ने भी जीवों का आश्रय स्थल को प्रभावित किया है।
वन्यजीव विशेषज्ञ ज्ञानेश सरन खुशारिया कहते हैं कि तेंदुआ बेहद ही शर्मिला शिकारी हैं, जिसे छिपकर शिकार करने में महारथ हासिल हैं। इसकी मौजूदगी का अहसास लोगों को नहीं हो पाता है। लेकिन वर्तमान में तेंदुआ आक्रामक हो रहा है। तेंदुए में हो रहा बदलाव भी लोगों के लिए खतरे की घंटी है।
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तेंदुआ अक्सर लावारिस पशुओं व कुत्तों की तलाश में भी आबादी में आ जाता हैं और इंसानों पर हमला कर देता हैं। यह बच्चों, महिलाओं और बुजुर्गों को अपना निशाना बनाता हैं। हमलों से बचने के लिए तेंदुआ प्रभावित क्षेत्र में अकेले न जाएं। बच्चों को अकेला ना छोड़े। - राजेंद्र सिंह राणा, वन दरोगा पतरामपुर रेंज
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एक दशक पूर्व तक गांवों के नजदीक खूब तालाब देखने को मिलते थे। समय के साथ यह सिर्फ राजस्व अभिलेखों तक सिमट कर रह गए हैं। इन तालाबों से पशु-पक्षी अपनी प्यास बुझाते थे। पेड़ पौधों के कटान ने भी जीवों का आश्रय स्थल को प्रभावित किया है।
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वन्यजीव विशेषज्ञ ज्ञानेश सरन खुशारिया कहते हैं कि तेंदुआ बेहद ही शर्मिला शिकारी हैं, जिसे छिपकर शिकार करने में महारथ हासिल हैं। इसकी मौजूदगी का अहसास लोगों को नहीं हो पाता है। लेकिन वर्तमान में तेंदुआ आक्रामक हो रहा है। तेंदुए में हो रहा बदलाव भी लोगों के लिए खतरे की घंटी है।
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तेंदुआ अक्सर लावारिस पशुओं व कुत्तों की तलाश में भी आबादी में आ जाता हैं और इंसानों पर हमला कर देता हैं। यह बच्चों, महिलाओं और बुजुर्गों को अपना निशाना बनाता हैं। हमलों से बचने के लिए तेंदुआ प्रभावित क्षेत्र में अकेले न जाएं। बच्चों को अकेला ना छोड़े। - राजेंद्र सिंह राणा, वन दरोगा पतरामपुर रेंज