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यहां से जाएं भी तो जाएं कहां
अमर उजाला ब्यूरो खटीमा।
Updated Wed, 10 Oct 2018 12:27 AM IST
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ग्रामीणों बैठक को संबोधित करते विधायक पुष्कर सिंह धामी।
- फोटो : amar ujala
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बग्घा चौवन का अस्तित्व बरकरार रखने के लिए हुई आम सभा में ग्रामीणों का दर्द छलक पड़ा। उजड़ने की आशंका से डरे ग्रामीणों ने कहा कि बग्घा चौवन में उनकी तीन पीढ़ियां निवास कर चुकी हैं। ऐसे में अब वह जाएं भी तो कहां जाएं। संघर्ष समिति के आह्वान पर मंगलवार को विधायक पुष्कर सिंह धामी की मौजूदगी आयोजित बैठक में वक्ताओं ने कहा कि अभी उनके लिये न्याय के दरवाजे खुले हैं। कहा कि यदि इसके बाद भी उन्हें हटाया जाता है तो वह इस भूमि पर जान दे देंगे। विधायक धामी ने कहा कि वह बग्घावासियों के साथ खड़े रहकर संघर्ष करेंगे।
कहा कि सरकार शासनादेशों का अध्ययन कर रही है कि किस तरह से न्यायालय के आदेश का अनुपालन हो और बग्घा भी सुरक्षित रह सके। बताया कि मामले को लेकर सांसद भगत सिंह कोश्यारी भी केंद्र सरकार से संपर्क में हैं। प्रदेश कार्यकारिणी सदस्य नंदन सिंह खड़ायत ने कहा कि वह इस कठिन समय में जनता के साथ खड़े हैं। वहां हिमांशु बिष्ट, देवेंद्र चंद, गंभीर धामी, मोहन चुफाल, धर्म सिंह दसौनी, त्रिभुवन सिंह, भरत बोरा, खीम सिंह चौहान, हयात सिंह धामी, सतीश भट्ट आदि थे।
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बच्चा हो बुजुर्ग सभी को सता रहा बिछड़ने का डर
खटीमा। बग्घा चौवन को खाली कराने के आदेश से बच्चा हो या बुजुर्ग सभी डरे सहमे हैं। राजकीय इंटर कॉलेज के छात्र करन, लक्ष्मी चौहान और श्वेता का कहना है कि हाईकोर्ट के आदेश के बाद से उनके परिजन काफी परेशान है। इस कारण उनका पढ़ाई में भी मन नहीं लग रहा है। परिवार कहां जाएगा, उनकी पढ़ाई का क्या होगा, इसको लेकर वह चिंतित हैं।
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भुड़िया निवासी साठ वर्षीय रेशमा, 70 वर्षीय सरस्वती देवी, सुंदर दसौनी और विसन सिंह का कहना है कि उनका कहीं और ठिकाना नहीं है। उनका जीना या मरना अब बग्घा में ही होगा। नब्बे वर्षीय पार्वती का कहना है कि न्यायालय के खाली कराने के आदेश से पूर्व सरकार ने राजस्व ग्राम घोषित कराने में लापरवाही की। इसके अलावा गुलाबी, धनेश्वरी, उमा देवी, ओमवती, रामधारी, शिवलाल और भीम सिंह धामी का कहना है कि उनकी आधी जिंदगी यहां बीत चुकी है, ऐसे में अब कहीं और जाना संभव नहीं है।
अतिक्रमणकारियों से वनभूमि खाली कराई जाएंगी: डा. धकाते
खटीमा। कुमाऊं रेंज के वन संरक्षक डॉ. पराग मधुकर धकाते ने कहा कि उच्च न्यायालय के आदेश के अनुपालन में बग्घा चौवन को खाली कराने संबंधी कार्रवाई की जा रही है। सुरई विश्राम गृह में उन्होंने मुख्य वन संरक्षक देहरादून के निर्देशों की जानकारी देते हुए कहा कि विभाग जिन स्थानों पर कब्जे हुए हैं, वहां से शीघ्र अतिक्रमण हटाया जाएगा। उन्होंने कहा कि न्यायालय के आदेश पर हुई कार्रवाई के तहत बग्घा चौवन की मौजूदा स्थिति की सर्वे रिपोर्ट तैयार हो चुकी है।
पुराने अतिक्रमणकारियों के खिलाफ लंबित बेदखली वाद पर कार्यवाही की जा रही है। इसके लिये लगभग पांच दर्जन से अधिक लोगों को नोटिस जारी कर विहित अधिकारी कार्यालय में तलब कर बेदखली कार्रवाई की जा रही है। वह यहां नेपाल सीमा पर निर्माणाधीन 1200 मीटर नहर के निरीक्षण के लिए पहुंचे थे। यह नहर जंगल सीमा से होकर नेपाल को जोड़ेगी। वन संरक्षक डॉ. धकाते के इस दौरान यूपी बार्डर पर टाईगर प्रोजेक्ट की देखरेख में लगे कर्मचारियों को गश्त एवं नवरात्रि पर्व पर बाघों की सुरक्षा के लिए दिशा निर्देश दिए। वहां उप प्रभागीय वनाधिकारी बाबू लाल, रेंजर आरके मौर्य, उप डिप्टी रेंजर बाबू राम, डिप्टी रेंजर सतीश रेखाड़ी आदि थे।