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Udham Singh Nagar News: कांटों से ज्यादा चुभ रहा कट पुलिया के गांव के रास्ते का पानी

Fri, 21 Jul 2023 12:12 AM IST
हल्द्वानी ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, ऊधम सिंह नगर
संवाद न्यूज एजेंसी, ऊधम सिंह नगर Updated Fri, 21 Jul 2023 12:12 AM IST
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Water Logging disturbed peoples Life
गूलरभोज में जलाशय पार करती आंगवाड़ी  कार्यकर्ता।
कट पुलिया में स्थित है आंगनबाड़ी केंद्र पहुंचने के लिए जान जोखिम में डाल रहीं आंगनबाड़ी कार्यकर्ता और सहायिका
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अजय अरोरा
गूलरभोज। सरकार ने नौनिहाल और उनकी माताओं के सेहत का ख्याल रखने के लिए कट पुलिया में आंगनबाड़ी केंद्र तो बना दिया लेकिन यहां पहुंचा खतरे से खाली नहीं है। आंगनबाड़ी कार्यकर्ता और सहायिका रोजाना करीब 350 मीटर की दूरी जलाशय के पानी से होकर तय करती हैं। कई बार वह पानी में गिरने से वह तो चोटिल होती ही हैं, बच्चों के लिए ले जाया जा रहा पुष्टाहार भी भीगकर खराब हो जाता है। उनका कहना है कि राह में चुभे कांटे उतना दर्द नहीं देते, जितना 350 मीटर के रास्ते में आया पानी दर्द देता है।
हरीपुरा और बौर दोनों जलाशयों के मध्य बने कट के समीप कट पुलिया गांव में आंगनबाड़ी केंद्र संचालित होता है। केंद्र में कार्यरत कार्यकर्ता और सहायिका के साथ ही वहां बच्चों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। केंद्र में 19 बच्चे पंजीकृत है। मानसून सीजन होने के कारण केंद्र में रोजाना आने वाले बच्चों की संख्या मात्र आठ है। बच्चों को घर से केंद्र पहुंचने के लिए कच्चे और कीचड़ भरे रास्ते से गुजरना पड़ता है। दोनों जलाशयों के बीच बने कट में इन दिनों दो-दो फुट पानी रहता है। ऐसे में घुटने तक पहुंचने पानी के बीच से आंगनबाड़ी कार्यकर्ता सुनीता और सहायिका सत्यवती जान जोखिम में डालकर केंद्र पहुंच रही हैं।
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दो जोड़ी कपड़े अतिरिक्त रखते हैं
दोनों बताती हैं कि लगातार पानी रहने से पानी में मौजूद पत्थरों में कायी जम गई है। ऐसे में वह कई बार फिसलकर पानी में गिर चुकी हैं। हमेशा दो जोड़ी कपड़े भी अतिरिक्त रखने पड़ते हैं। इसी प्रकार अन्य ग्रामीणों के साथ भी इस प्रकार की दुर्घटना हो चुकी है। सुनीता ने कहा कि सरकार को कट पर कम से कम एक झूला पुल बनाना चाहिए। या फिर किसी अन्य तरीके से ग्रामीणों के आवागमन की व्यवस्था करनी चाहिए।
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वाहन दूर छोड़ते हैं तो लोग पहुंचा देते हैं नुकसान
सहायिका सत्यवती ने बताया कि प्रतिदिन ड्यूटी पर पहुंचने में उनको बड़ी कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। घर से डैम तक लाए वाहन को भी कट पर लावारिस हालत में छोड़ना पड़ता है। कई बार तो वाहन से पेट्रोल तक निकाल लिया गया और कई बार वाहन से छेड़खानी कर उस को नुकसान पहुंचाया जा चुका है। केंद्र तक पहुंचने में जान जोखिम है। यहां एक पुल की नितांत आवश्यकता है। संवाद


जलाशय में पानी बढ़ता है तो लेते हैं नांव का सहारा

ग्रामीणों ने बताया कि कटपुलिया गांव में करीब 12 परिवार रहते हैं। इसी से लगे एक अन्य गांव ककराला में करीब 25 परिवार रहते हैं। दाेनों गांवों का रास्ता एक ही है। ग्रामीण इसी मार्ग पर जान जोखिम में डालकर आवाजाही करते हैं। आवाजाही के लिए रास्ते में रस्सी या सुरक्षा के अन्य कोई इंतजाम नहीं है। बताया कि गर्मियों में जलस्तर कम होने पर परेशानी नहीं होती है लेकिन अगर जलाशयों में पानी बढ़ता है तो उन्हें आवाजाही के लिए नाव का सहारा लेना पड़ता है।
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