दिग्गजों को धूल चटा चुकी तराई की जनता
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तराई के मतदाताओं ने राजनीति के धुरंधरों को सर आंखों पर बैठने के बाद हार का भी स्वाद चखाया है। जनता की नाराजगी की वजह से ही राजनीति के माहिर नेताओं को कईं बार वोटों के भारी अंतरों से हार का मुंह देखना पड़ा है। तराई में कद्दावर नेता रहे पूर्व मुख्यमंत्री एनडी तिवारी की राजनीति की बात करें तो 1967 में प्रजा सोशलिस्ट पार्टी के रामदत्त जोशी ने एनडी को 1577 वोटों से शिकस्त दी थी। उसके बाद जनता का विश्वास हासिल करने में सफल रहे एनडी लगातार तीन चुनाव जीते थे। काशीपुर सीट पर वे चार बार विधायक रहे थे। पूर्व सांसद केसी बाबा ने 1989 में हुए विधानसभा चुनाव में निर्दलीय प्रत्याशी के रुप में मैदान में उतरकर कांग्रेस के हरगोविंद को हराया था। लेकिन वर्ष 1991 में 1303 और 1993 के चुनाव में 2834 वोटों से उन्हें हार का सामना करना पड़ा था। 1996 में चुनाव जीतने वाले बाबा राज्य गठन के बाद हुए पहले चुनाव में 195 वोटों से हार गए थे।
उत्तराखंड बनने के बाद वे दो बार सांसद निर्वाचित हुए, मगर तीसरी बार उन्हें हार का सामना करना पड़ा। पूर्व काबीना मंत्री यशपाल आर्य ने 1991 में खटीमा सीट से कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़ा था और उन्हें भाजपा प्रत्याशी लाखन सिंह ने 1755 वोटों से शिकस्त दी थी। खटीमा की जनता का विश्वास हासिल करने में नाकाम रहने पर 1996 में भी यशपाल आर्य को हार का सामना करना पड़ा था। पूर्व स्वास्थ्य मंत्री तिलकराज बेहड़ ने 1991 में हल्द्वानी सीट से भाजपा के टिकट से चुनाव लड़ा था। उस वक्त हल्द्वानी सीट में रुद्रपुर, गदरपुर आदि क्षेत्र भी शामिल हुआ करते थे।
कांग्रेस के एनडी तिवारी ने बेहड़ को 3204 वोटों से हराकर था। हालांकि राज्य बनने के बाद बेहड़ एनडी तिवारी की सरकार में स्वास्थ्य मंत्री बने थे। लेकिन वर्ष 2012 के चुनाव में उन्हें फिर हार का सामना करना पड़ा था। 1977 में हल्द्वानी सीट पर हुए चुनाव में जनता पार्टी से मैदान में उतरी डॉ. इंदिरा हृदयेश को कांग्रेस के देव बहादुर सिंह ने 8320 मतों से हराया था। तिवारी सरकार के साथ ही रावत सरकार में भी डॉ. इंदिरा मजबूत पदों पर रही। कुल मिलाकर आंकड़ों से साफ है कि जनता ने ही नेताओं की सियासी जमीन मजबूत करने के साथ ही धूल भी चटाई।
तराई में इस बार भी कईं दिग्गजों की प्रतिष्ठा दांव पर
विधानसभा चुनाव में तराई की सीटों में दिग्गजों की प्रतिष्ठा दांव पर है। भाजपा की बात करें तो बाजपुर सीट पर पार्टी प्रत्याशी यशपाल आर्य, काशीपुर में हरभजन सिंह चीमा, जसपुर में अरविंद पांडे दमखम के साथ मैदान में हैं। सितारगंज सीट पर बेटे को चुनाव लड़ा रहे पूर्व सीएम विजय बहुगुणा की प्रतिष्ठा दांव पर है। कांग्रेस की बात करें तो किच्छा में प्रत्याशी और मुख्यमंत्री हरीश रावत, रुद्रपुर में पूर्व स्वास्थ्य मंत्री तिलकराज बेहड़ दिग्गज जनता की अदालत में हैं। इन सीटों पर मुकाबला बेहद रोचक और फंसा हुआ है। दिग्गज अपनी सीट बचाने के लिए पूरी मेहनत से जुटे हैं।