{"_id":"580519dd4f1c1bf132702fc2","slug":"uttarakhand-hill-farmers-research-scientist","type":"story","status":"publish","title_hn":"उत्तराखंड के पर्वतीय किसानों के लिए शोध करें वैज्ञानिक : डा. पाल","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
उत्तराखंड के पर्वतीय किसानों के लिए शोध करें वैज्ञानिक : डा. पाल
अमर उजाला ब्यूरो रुद्रपुर
Updated Tue, 18 Oct 2016 12:05 AM IST
विज्ञापन
स्टाल का िननिरीक्ष्ाण्ा करते राज्यपाल डा. पाल
- फोटो : अमर उजाला
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विज्ञापन
पंतनगर। राज्यपाल डा. केके पाल ने कहा कि पंतनगर विश्वविद्यालय के वैज्ञानिक उत्तराखंड के पर्वतीय क्षेत्रों के किसानों के लिए शोध करें, तभी प्रदेश की खेती में नई क्रांति लाई जा सकेगी। पर्वतीय क्षेत्रों में किसान विषम परिस्थितियों में खेती करते हैं। खेती की आधुनिक तकनीक उन तक पहुंचाई जाए।
राज्यपाल सोमवार को पंडित गोविंद बल्लभ पंत कृषि एवं प्रौद्योगिकी विवि के 100वें अखिल भारतीय किसान मेले के उद्घाटन समारोह को संबोधित कर रहे थे। गांधी हाल सभागार में आयोजित कार्यक्रम में राज्यपाल ने कहा पंतनगर विवि के वैज्ञानिकों द्वारा विकसित आधुनिक तकनीक और नई प्रजातियों के गुणवत्तायुक्त बीज पर्वतीय क्षेत्र के किसानों तक पहुंचना बेहद जरूरी है, ताकि पर्वतीय कृषि को अधिक उत्पादक और लाभकारी बनाया जा सके। पर्वतीय युवाओं को कृषि से जोड़ा जा सके।
डा. पाल ने कहा कि वैज्ञानिकों को उत्तराखंड के सुदूर क्षेत्रों के किसानों से संपर्क कर वहां की परिस्थितियों और किसानों के सुझावों के अनुसार अपने शोधों को दिशा देनी चाहिए। साथ ही कम पानी की आवश्यकता और अधिक प्रोटीन वाली एवं रोगरोधी पोषक प्रजातियों के विकास पर ध्यान केंद्रित किया जाना चाहिए। डा. पाल ने सेब, अखरोट, औषधीय, सगंधी और अन्य पर्वतीय फसलों की उच्च गुणवत्तायुक्त एवं गन्ने की कम पानी में अच्छा उत्पादन देने वाली प्रजातियों के विकास पर बल दिया। नई प्रजातियां जलवायु परिवर्तन से प्रभावित नहीं होनी चाहिए।
विज्ञापन
कुलपति डा. जे कुमार ने राज्यपाल को मेले में लगे इन्नोवेशन स्टाल, पर्वतीय कृषि पर लगाये गये विशेष स्टाल और उद्यान प्रदर्शनी के स्टालों का भ्रमण कराया, जिनमें प्रदर्शित की गई विभिन्न तकनीकों और उत्पादों में राज्यपाल ने गहरी रुचि दिखाई। इसके बाद राज्यपाल ने खुली जीप बैठकर मेला परिसर का भ्रमण किया। राज्यपाल ने 100वें किसान मेले का स्मृति चिन्ह विमोचित किया गया।
इस दौरान प्रदेश के विभिन्न जिलों से चयनित किए गए 10 किसानों को खेती में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने के लिए सम्मानित किया गया। स्थानीय विधायक राजेश शुक्ला ने पंतनगर विश्वविद्यालय को प्रदेश स्तर से पूर्ण सहयोग दिए जाने की बात कही, जिससे प्रदेश और देश के किसानों का विश्वविद्यालय पर विश्वास बना रहे। इस अवसर पर डीएम चंद्रेश कुमार यादव, एसएसपी सैंथिल अबुदई, सीडीओ आलोक कुमार पांडेय, निदेशक प्रसार वाईपीएस डा. डबास, निदेशक शोध डा. जेपी सिंह, प्रबंध परिषद सदस्या शिल्पी अरोरा और पूर्व सदस्य राजेंद्रपाल सिंह आदि थे।
किसाने मेले के उद्घाटन समारोह में कुलपति डा. जे कुमार ने अपने संबोधन में कहा कि वर्ष 1965 में शुरू किए गए किसान मेले की संकल्पना काफी सफल हुई, जिसके बाद से किसान मेला प्रत्येक वर्ष दो बार आयोजित किया जा रहा है। देश में हुई हरित क्रांति, श्वेत क्रांति, नीली क्रांति की कृषि एवं संबंधित क्षेत्रों में उम्मीद के मुताबिक वृद्धि हुई। फिर भी कई चुनौतियां भी हैं, जिनमें वातावरण में बदलाव और छोटे व सीमांत किसानों की अधिक संख्या आदि है।
राज्यपाल सोमवार को पंडित गोविंद बल्लभ पंत कृषि एवं प्रौद्योगिकी विवि के 100वें अखिल भारतीय किसान मेले के उद्घाटन समारोह को संबोधित कर रहे थे। गांधी हाल सभागार में आयोजित कार्यक्रम में राज्यपाल ने कहा पंतनगर विवि के वैज्ञानिकों द्वारा विकसित आधुनिक तकनीक और नई प्रजातियों के गुणवत्तायुक्त बीज पर्वतीय क्षेत्र के किसानों तक पहुंचना बेहद जरूरी है, ताकि पर्वतीय कृषि को अधिक उत्पादक और लाभकारी बनाया जा सके। पर्वतीय युवाओं को कृषि से जोड़ा जा सके।
विज्ञापन
डा. पाल ने कहा कि वैज्ञानिकों को उत्तराखंड के सुदूर क्षेत्रों के किसानों से संपर्क कर वहां की परिस्थितियों और किसानों के सुझावों के अनुसार अपने शोधों को दिशा देनी चाहिए। साथ ही कम पानी की आवश्यकता और अधिक प्रोटीन वाली एवं रोगरोधी पोषक प्रजातियों के विकास पर ध्यान केंद्रित किया जाना चाहिए। डा. पाल ने सेब, अखरोट, औषधीय, सगंधी और अन्य पर्वतीय फसलों की उच्च गुणवत्तायुक्त एवं गन्ने की कम पानी में अच्छा उत्पादन देने वाली प्रजातियों के विकास पर बल दिया। नई प्रजातियां जलवायु परिवर्तन से प्रभावित नहीं होनी चाहिए।
विज्ञापन
कुलपति डा. जे कुमार ने राज्यपाल को मेले में लगे इन्नोवेशन स्टाल, पर्वतीय कृषि पर लगाये गये विशेष स्टाल और उद्यान प्रदर्शनी के स्टालों का भ्रमण कराया, जिनमें प्रदर्शित की गई विभिन्न तकनीकों और उत्पादों में राज्यपाल ने गहरी रुचि दिखाई। इसके बाद राज्यपाल ने खुली जीप बैठकर मेला परिसर का भ्रमण किया। राज्यपाल ने 100वें किसान मेले का स्मृति चिन्ह विमोचित किया गया।
इस दौरान प्रदेश के विभिन्न जिलों से चयनित किए गए 10 किसानों को खेती में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने के लिए सम्मानित किया गया। स्थानीय विधायक राजेश शुक्ला ने पंतनगर विश्वविद्यालय को प्रदेश स्तर से पूर्ण सहयोग दिए जाने की बात कही, जिससे प्रदेश और देश के किसानों का विश्वविद्यालय पर विश्वास बना रहे। इस अवसर पर डीएम चंद्रेश कुमार यादव, एसएसपी सैंथिल अबुदई, सीडीओ आलोक कुमार पांडेय, निदेशक प्रसार वाईपीएस डा. डबास, निदेशक शोध डा. जेपी सिंह, प्रबंध परिषद सदस्या शिल्पी अरोरा और पूर्व सदस्य राजेंद्रपाल सिंह आदि थे।
किसाने मेले के उद्घाटन समारोह में कुलपति डा. जे कुमार ने अपने संबोधन में कहा कि वर्ष 1965 में शुरू किए गए किसान मेले की संकल्पना काफी सफल हुई, जिसके बाद से किसान मेला प्रत्येक वर्ष दो बार आयोजित किया जा रहा है। देश में हुई हरित क्रांति, श्वेत क्रांति, नीली क्रांति की कृषि एवं संबंधित क्षेत्रों में उम्मीद के मुताबिक वृद्धि हुई। फिर भी कई चुनौतियां भी हैं, जिनमें वातावरण में बदलाव और छोटे व सीमांत किसानों की अधिक संख्या आदि है।