जब अटल जी बोले थे, ‘ऊधमसिंह नगर है तो उधम होगा ही’
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लोकसभा चुनाव को लेकर वर्ष 1996 में गांधी पार्क में हुई जनसभा में पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी को उत्तराखंड राज्य आंदोलन के विरोध का भी सामना करना पड़ा था। उस समय अटल ने अपने ही अंदाज में माहौल को संभाला था।
तत्कालीन भाजपा नगर अध्यक्ष बनारसी दास राणा के पुत्र राजेंद्र राणा बताते हैं कि चुनावी रैली में अटल जी के साथ तत्कालीन भाजपा के पर्वतीय क्षेत्र के प्रभारी मेजर जनरल बीसी खंडूड़ी, तत्कालीन सांसद बलराज पासी, उनके पिता और तत्कालीन जिला अध्यक्ष दान सिंह रावत ने मंच साझा किया था। उस वक्त अलग राज्य की मांग को लेकर आंदोलनरत लोगों ने रैली का विरोध कर काले झंडे दिखाने की कोशिश की थी। राजेंद्र बताते हैं कि अटल जी ने विरोध पर चुटकी लेते हुए कहा था कि ‘यह ऊधमसिंह नगर है तो उधम मचेगा ही।’
बताया कि आपातकाल के समय उनके पिता बनारसी दास को 13 महीने जेल में रखने के साथ ही कड़ी यातनाएं दी गई थीं। इसकी सूचना जब तिहाड़ जेल में बंद अटल जी को मिली तो उन्होंने राणा के परिवार को पत्र लिखकर हौसला अफजाई की थी। पत्र में अटल जी ने कहा था कि भाजपा कार्यकर्ताओं का बलिदान व्यर्थ नहीं जाएगा। इसके बाद 1980 में भाजपा के मुंबई में हुए पहले अधिवेशन में अटल जी ने उनके पिता को गले लगा लिया था।
पूर्व पालिकाध्यक्ष सुभाष चतुर्वेदी बताते हैं कि रुद्रपुर, हल्द्वानी, मथुरा, लखनऊ, दिल्ली आदि जगहों पर पार्टी अधिवेशन और चुनाव प्रचार के दौरान आठ-नौ बार अटल जी से मुलाकात हुई थी। उनकी नजर में सभी कार्यकर्ता और पदाधिकारी एक समान थे।
जनता की सेवा करो, पार्टी को मजबूत बनाओ
रुद्रपुर। पूर्व में भाजपा में सक्रिय रहे यशपाल घई ने भी अटल बिहारी वाजपेयी से हुई मुलाकात को साझा किया। बताया कि वर्ष 1981 में वे भाजपा जिला महामंत्री नैनीताल थे। इसी दौरान बाजपुर में हुई एक जनसभा में उनकी अटल जी से मुलाकात हुई थी। अटल जी ने उनसे कहा था कि जनता की सेवा करो। सभी कार्यकर्ताओं को एकजुट करके पार्टी को मजबूत बनाओ।
‘कार्यकर्ताओं से सहयोग के साथ-साथ थैली भी मिल जाती है’
रुद्रपुर। भाजपा के पूर्व जिला कोषाध्यक्ष और अग्रवाल सभा के अध्यक्ष महेश अग्रवाल बताते हैं कि जनसंघ में सक्रिय उनके दादा स्व. लाला बद्री प्रसाद के गल्ला मंडी स्थित आवास पर वर्ष 1980 में अटल जी ने कार्यकर्ताओं से मुलाकात की थी। उनके लिए नाश्ते की व्यवस्था की गई थी। इस पर उन्होंने मजाकिया लहजे में कहा था कि संपर्क के दौरान कार्यकर्ताओं से सहयोग और थैली (चंदा) भी मिल जाती है। कार्यकर्ताओं की भीड़ जुटने पर उन्होंने जनसभा को संबोधित भी किया था।
महेश बताते हैं कि वे उस समय छोटे थे। उन्होंने और उनके चाचा पवन अग्रवाल ने डायरी आगे बढ़ाते हुए अटल जी से उनके लिखी कविता या आटोग्राफ मांगे थे। इस पर अटल ने कहा कि मेरी कोई कविता या वक्तव्य आपको याद है। इस पर चाचा ने ‘मैं रो लेता हूं जब कोई कहीं नहीं होता, दूर कहीं कोई रोता है।’ उन्हें अच्छी तरीके से याद है कि अटल जी ने उसी के नीचे लिखा कि ‘मैं भी रोता जब कोई कहीं नहीं होता, दूर कहीं कोई रोता है...।’