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चार दिन बाद सूख जाएगा तुमड़िया डैम
ब्यूरो/अमर उजाला, ऊधमसिंह नगर
Updated Thu, 19 May 2016 12:32 AM IST
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तुमड़िया डैम
- फोटो : अमर उजाला
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उत्तराखंड और यूपी की हजारों एकड़ भूमि को सींचने वाला तुमड़िया डैम सूखने की कगार पर पहुंच गया है। डैम से सिंचाई के लिए पानी नहीं छोड़े जाने की वजह से हजारों एकड़ में लगी गन्ना, धान की फसलों के साथ ही चारे के सूखने का खतरा पैदा हो गया है। आलम यह है कि डैम की मुख्य नहर में पशुओं के पीने लायक ही पानी छोड़ा जा रहा है, जो केवल 22 मई तक के लिए ही बचा है।
बुधवार को डैम का जलस्तर 846 से गिरकर 824.1 फिट ही शेष रह गया है। अब डैम में सिंचाई के लिए पानी का स्टॉक खत्म हो गया है। बता दें कि तुमड़िया डैम का निर्माण वर्ष 1962 से शुरु होकर 1969 में पूरा हुआ था। डैम का दायरा 20 किलोमीटर क्षेत्र में फैला हुआ है।
डैम की तुमड़िया, बहला फीडर, मुख्य नहरों से उत्तराखंड में 22 हजार 921 हेक्टेयर और यूपी में धामपुर, मुरादाबाद, रामपुर सिंचाई डिवीजनों में 53 हजार 651 हेक्टेयर जमीन में सिंचाई होती है। डैम में जमा पानी से उत्तराखंड में 37 और यूपी में 63 फीसदी क्षेत्र में सिंचाई की जाती है। वर्तमान में तुमड़िया डैम में पानी सूखने से उस पर सिंचाई के लिए निर्भर यूपी और उत्तराखंड के किसानों में हाहाकार मचा है।
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किसान लगातार सिंचाई विभाग के चक्कर लगाकर डैम से पानी छोड़ने की गुहार लगा रहे हैं। अधिकारी भी मजबूर हैं, पानी तभी छोड़ेंगे, जब डैम में पानी बचा होगा। अधिकारी जब डैम की स्थिति बता रहे है तो किसान निराश होकर लौट रहे हैं। इन दिनों गन्ना, बेमौसमी धान, सब्जियां, चारे के लिए पानी की जरुरत होती है। अब डैम सूखने से हजारों एकड़ में लगी फसलों के सूखने का खतरा हो गया है।
डैम में कम था पानी का स्टॉक
सिंचाई विभाग केअवर अभियंता तरुण बंसल ने बताया कि पिछले साल बारिश कम होने से जलाशय में मात्र 844 फिट पानी भरा गया था। जिस वजह से जलाशय का पानी जल्दी समाप्त हो गया है।
नहरें सूखने से छोटे किसानों को नुकसान
सिंचाई नहरों के भरोसे ज्यादातर छोटा किसान रहता है। उसके पास नलकूप लगाने की की क्षमता नहीं होती है। जबकि बड़े किसान के पास नहरों के अलावा सिंचाई के लिए नलकूप और अन्य विकल्प भी हैं। जब नहरें ही सूख गई हैं तो सबसे ज्यादा नुकसान छोटे किसानों को ही उठाना पड़ेगा।
बिन पानी मर गई हजारों क्विंटल मछलियां
तुमडिय़ा डेम में पानी सूखने का असर पाली जाने वाली मछलियों पर भी पड़ा है। पानी नहीं होने से डैम में हजारों मछलियां तड़पकर मर गई हैं। पानी कम होने का फायदा उठाकर मछलियों का अवैध शिकार करने वाले सक्रिय हो गए हैं।
सिंचाई विभाग के अधिशासी अभियंता आरएस आर्य ने कहा कि तुमड़िया जलाशय में वाटर स्टॉक शून्य हो गया है। मुख्य नहर से पशुओं के लिए पीने लायक मात्र डेढ़ सौ क्यूसिक पानी छोड़ा जा रहा है। जिसमें प्रेशर नहीं है। यह पानी भी 22 मई तक के लिए ही बचा है।
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बुधवार को डैम का जलस्तर 846 से गिरकर 824.1 फिट ही शेष रह गया है। अब डैम में सिंचाई के लिए पानी का स्टॉक खत्म हो गया है। बता दें कि तुमड़िया डैम का निर्माण वर्ष 1962 से शुरु होकर 1969 में पूरा हुआ था। डैम का दायरा 20 किलोमीटर क्षेत्र में फैला हुआ है।
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डैम की तुमड़िया, बहला फीडर, मुख्य नहरों से उत्तराखंड में 22 हजार 921 हेक्टेयर और यूपी में धामपुर, मुरादाबाद, रामपुर सिंचाई डिवीजनों में 53 हजार 651 हेक्टेयर जमीन में सिंचाई होती है। डैम में जमा पानी से उत्तराखंड में 37 और यूपी में 63 फीसदी क्षेत्र में सिंचाई की जाती है। वर्तमान में तुमड़िया डैम में पानी सूखने से उस पर सिंचाई के लिए निर्भर यूपी और उत्तराखंड के किसानों में हाहाकार मचा है।
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किसान लगातार सिंचाई विभाग के चक्कर लगाकर डैम से पानी छोड़ने की गुहार लगा रहे हैं। अधिकारी भी मजबूर हैं, पानी तभी छोड़ेंगे, जब डैम में पानी बचा होगा। अधिकारी जब डैम की स्थिति बता रहे है तो किसान निराश होकर लौट रहे हैं। इन दिनों गन्ना, बेमौसमी धान, सब्जियां, चारे के लिए पानी की जरुरत होती है। अब डैम सूखने से हजारों एकड़ में लगी फसलों के सूखने का खतरा हो गया है।
डैम में कम था पानी का स्टॉक
सिंचाई विभाग केअवर अभियंता तरुण बंसल ने बताया कि पिछले साल बारिश कम होने से जलाशय में मात्र 844 फिट पानी भरा गया था। जिस वजह से जलाशय का पानी जल्दी समाप्त हो गया है।
नहरें सूखने से छोटे किसानों को नुकसान
सिंचाई नहरों के भरोसे ज्यादातर छोटा किसान रहता है। उसके पास नलकूप लगाने की की क्षमता नहीं होती है। जबकि बड़े किसान के पास नहरों के अलावा सिंचाई के लिए नलकूप और अन्य विकल्प भी हैं। जब नहरें ही सूख गई हैं तो सबसे ज्यादा नुकसान छोटे किसानों को ही उठाना पड़ेगा।
बिन पानी मर गई हजारों क्विंटल मछलियां
तुमडिय़ा डेम में पानी सूखने का असर पाली जाने वाली मछलियों पर भी पड़ा है। पानी नहीं होने से डैम में हजारों मछलियां तड़पकर मर गई हैं। पानी कम होने का फायदा उठाकर मछलियों का अवैध शिकार करने वाले सक्रिय हो गए हैं।
सिंचाई विभाग के अधिशासी अभियंता आरएस आर्य ने कहा कि तुमड़िया जलाशय में वाटर स्टॉक शून्य हो गया है। मुख्य नहर से पशुओं के लिए पीने लायक मात्र डेढ़ सौ क्यूसिक पानी छोड़ा जा रहा है। जिसमें प्रेशर नहीं है। यह पानी भी 22 मई तक के लिए ही बचा है।