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Udham Singh Nagar News: लालच की प्लेट में मुनाफा परोसने वाला ठग गिरफ्तार
Tue, 05 Mar 2024 01:36 AM IST
हल्द्वानी ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, ऊधम सिंह नगर
संवाद न्यूज एजेंसी, ऊधम सिंह नगर
Updated Tue, 05 Mar 2024 01:36 AM IST
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रुद्रपुर। साइबर थाना पुलिस ने ऑनलाइन ट्रेडिंग व्यापार का लालच देकर लोगों से ठगी करने वाले शातिर ठग को जयपुर से गिरफ्तार किया है। उसने सहयोगी के साथ मिलकर शिक्षा विभाग के एक अधिकारी को 30 लाख की चपत लगाई थी। पुलिस ने अभियुक्त को न्यायालय में पेश कर न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया है।
18 फरवरी को अल्मोड़ा में शिक्षा विभाग में तैनात लेक्चरर तारा दत्त भट्ट ने अज्ञात के खिलाफ साइबर थाने में धोखाधड़ी का केस दर्ज कराया था। उनका कहना था कि फेसबुक पर ट्रेडिंग बिजनेस का मैसेज देखकर उन्होंने एक लिंक पर क्लिक किया था। इसके बाद एक विदेशी नंबर से बातचीत के बाद उनको एक व्हाट्सएप ग्रुप में जोड़ते हुए डिटीगामैक्स एप डाउनलोड कराकर अच्छा मुनाफा होने का झांसा देकर उनसे 30 लाख की धोखाधड़ी की गई थी। एसएसपी एसटीएफ आयुष अग्रवाल ने मामले की विवेचना साइबर थाना प्रभारी निरीक्षक ललित मोहन जोशी को सौंपी।
सोमवार को एसएसपी अग्रवाल ने बताया कि ठगी की घटना में इस्तेमाल बैंक खातों, मोबाइल नंबर, ईमेल के बारे में संबंधित बैंक, सर्विस प्रदाता कंपनी, मेटा और गूगल से डेटा प्राप्त किया गया। इसके बाद मुख्य आरोपी चंदन कुमार यादव निवासी ग्राम मानिकपुर, मलिकपुर दियारा जिला भागलपुर बिहार को चिह्नित कर उसकी तलाश में कई जगह दबिश दी गई। आरोपी लगातार स्थान बदलकर चकमा देता रहा। रविवार को टीम ने चंदन को डी-162 मुरलीपुरा स्कीम सीकर रोड जयपुर राजस्थान से गिरफ्तार कर लिया। वह कपड़े की दुकान खोले हुए था और इसकी आड़ में ठगी करता था। उसने शिक्षा विभाग के कर्मी से अपने सहयोगी के साथ मिलकर ठगी की थी। आरोपी को चिह्नित करने की कार्रवाई की जा रही है।
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जांच में मिला खातों से एक करोड़ का संदिग्ध लेनदेन
रुद्रपुर। इंस्पेक्टर जोशी ने बताया कि आरोपी के मोबाइल फोन में कई ईमेल एकाउंट, बैंक खाते, फर्जी फर्मों के नाम, फोटो और दस्तावेज मिले हैं। उसके खातों से एक करोड़ का संदिग्ध लेनदेन प्रकाश में आया है। जांच में पता चला कि साइबर ठगों ने पीड़ित से बातचीत करने में दूसरे व्यक्तियों के नाम से आवंटित प्री-एक्टिवेटेड मोबाइल सिम कार्ड और बैंक खातों का प्रयोग किया। दिल्ली, कर्नाटक, गुजरात, उत्तर प्रदेश आदि राज्यों के विभिन्न बैंक खातों में धोखाधड़ी से धनराशि प्राप्त की गई थी। अभियुक्त ठगी के रुपयों के लिए खाते मुहैया कराता था जबकि लोगों को ठगी के जाल में दूसरे अपराधी फंसाते थे।
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फर्जी सिम और खातों का होता है इस्तेमाल
रुद्रपुर। शातिर ठग के कब्जे से तीन मोबाइल फोन, एक लैपटॉप, सात चेक बुक, एक निजी बैंक की चेकबुक, पासबुक, सात डेबिट कार्ड, आधार कार्ड, पैन कार्ड और फर्जी मुहरें बरामद हुईं हैं। आरोपी ने बताया कि उसने कई लोगों के नाम से फर्जी फर्म बनाकर बैंक खाते खोले हैं। इनका वह खुद संचालन करता था। इन बैंक खातों के विरुद्ध कईं राज्यों से साइबर अपराध की शिकायतें दर्ज हैं। बैंक खातों से लिंक मोबाइल नंबर और ईमेल आईडी को इंटरनेट बैंकिंग के लिए प्रयोग करता था। प्राथमिक जांच में आरोपी के खिलाफ दिल्ली, हरियाणा, पंजाब, उत्तर प्रदेश, तेलंगाना, कर्नाटक, झारखंड आदि राज्यों में कुल 11 शिकायतें दर्ज हैं।
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सोशल मीडिया पर विज्ञापन डालकर फेंकते थे ठगी का जाल
रुद्रपुर। इंस्पेक्टर ललित मोहन जोशी ने बताया कि आरोपी सोशल मीडिया के माध्यम से ट्रेडिंग बिजनेस का विज्ञापन प्रसारित करता था। लिंक के माध्यम से पीड़ित को वाट्सअप ग्रुप से जोड़कर ऑनलाइन ट्रेडिंग करने और मोबाइल फोन में डिटीगामैक्स एप डाउनलोड कराता था। इसके बाद नए शेयर के जारी होने वाले आईपीओ में तीन गुना तक का मुनाफा कमाने का झांसा देकर निवेश के नाम पर मेहनत की कमाई डकार जाता था। बताया कि थाने से संबंधित केस में इस्तेमाल बैंक खाता भी आरोपी ने एक दिव्यांग व्यक्ति के नाम से खोला था।
18 फरवरी को अल्मोड़ा में शिक्षा विभाग में तैनात लेक्चरर तारा दत्त भट्ट ने अज्ञात के खिलाफ साइबर थाने में धोखाधड़ी का केस दर्ज कराया था। उनका कहना था कि फेसबुक पर ट्रेडिंग बिजनेस का मैसेज देखकर उन्होंने एक लिंक पर क्लिक किया था। इसके बाद एक विदेशी नंबर से बातचीत के बाद उनको एक व्हाट्सएप ग्रुप में जोड़ते हुए डिटीगामैक्स एप डाउनलोड कराकर अच्छा मुनाफा होने का झांसा देकर उनसे 30 लाख की धोखाधड़ी की गई थी। एसएसपी एसटीएफ आयुष अग्रवाल ने मामले की विवेचना साइबर थाना प्रभारी निरीक्षक ललित मोहन जोशी को सौंपी।
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सोमवार को एसएसपी अग्रवाल ने बताया कि ठगी की घटना में इस्तेमाल बैंक खातों, मोबाइल नंबर, ईमेल के बारे में संबंधित बैंक, सर्विस प्रदाता कंपनी, मेटा और गूगल से डेटा प्राप्त किया गया। इसके बाद मुख्य आरोपी चंदन कुमार यादव निवासी ग्राम मानिकपुर, मलिकपुर दियारा जिला भागलपुर बिहार को चिह्नित कर उसकी तलाश में कई जगह दबिश दी गई। आरोपी लगातार स्थान बदलकर चकमा देता रहा। रविवार को टीम ने चंदन को डी-162 मुरलीपुरा स्कीम सीकर रोड जयपुर राजस्थान से गिरफ्तार कर लिया। वह कपड़े की दुकान खोले हुए था और इसकी आड़ में ठगी करता था। उसने शिक्षा विभाग के कर्मी से अपने सहयोगी के साथ मिलकर ठगी की थी। आरोपी को चिह्नित करने की कार्रवाई की जा रही है।
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जांच में मिला खातों से एक करोड़ का संदिग्ध लेनदेन
रुद्रपुर। इंस्पेक्टर जोशी ने बताया कि आरोपी के मोबाइल फोन में कई ईमेल एकाउंट, बैंक खाते, फर्जी फर्मों के नाम, फोटो और दस्तावेज मिले हैं। उसके खातों से एक करोड़ का संदिग्ध लेनदेन प्रकाश में आया है। जांच में पता चला कि साइबर ठगों ने पीड़ित से बातचीत करने में दूसरे व्यक्तियों के नाम से आवंटित प्री-एक्टिवेटेड मोबाइल सिम कार्ड और बैंक खातों का प्रयोग किया। दिल्ली, कर्नाटक, गुजरात, उत्तर प्रदेश आदि राज्यों के विभिन्न बैंक खातों में धोखाधड़ी से धनराशि प्राप्त की गई थी। अभियुक्त ठगी के रुपयों के लिए खाते मुहैया कराता था जबकि लोगों को ठगी के जाल में दूसरे अपराधी फंसाते थे।
फर्जी सिम और खातों का होता है इस्तेमाल
रुद्रपुर। शातिर ठग के कब्जे से तीन मोबाइल फोन, एक लैपटॉप, सात चेक बुक, एक निजी बैंक की चेकबुक, पासबुक, सात डेबिट कार्ड, आधार कार्ड, पैन कार्ड और फर्जी मुहरें बरामद हुईं हैं। आरोपी ने बताया कि उसने कई लोगों के नाम से फर्जी फर्म बनाकर बैंक खाते खोले हैं। इनका वह खुद संचालन करता था। इन बैंक खातों के विरुद्ध कईं राज्यों से साइबर अपराध की शिकायतें दर्ज हैं। बैंक खातों से लिंक मोबाइल नंबर और ईमेल आईडी को इंटरनेट बैंकिंग के लिए प्रयोग करता था। प्राथमिक जांच में आरोपी के खिलाफ दिल्ली, हरियाणा, पंजाब, उत्तर प्रदेश, तेलंगाना, कर्नाटक, झारखंड आदि राज्यों में कुल 11 शिकायतें दर्ज हैं।
सोशल मीडिया पर विज्ञापन डालकर फेंकते थे ठगी का जाल
रुद्रपुर। इंस्पेक्टर ललित मोहन जोशी ने बताया कि आरोपी सोशल मीडिया के माध्यम से ट्रेडिंग बिजनेस का विज्ञापन प्रसारित करता था। लिंक के माध्यम से पीड़ित को वाट्सअप ग्रुप से जोड़कर ऑनलाइन ट्रेडिंग करने और मोबाइल फोन में डिटीगामैक्स एप डाउनलोड कराता था। इसके बाद नए शेयर के जारी होने वाले आईपीओ में तीन गुना तक का मुनाफा कमाने का झांसा देकर निवेश के नाम पर मेहनत की कमाई डकार जाता था। बताया कि थाने से संबंधित केस में इस्तेमाल बैंक खाता भी आरोपी ने एक दिव्यांग व्यक्ति के नाम से खोला था।