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सामूहिक दुष्कर्म के तीन आरोपियों को 20-20 साल की सजा, पांच आरोपी बरी
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काशीपुर। प्रथम अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश ने युवती से सामूहिक दुष्कर्म के मामले में तीन अभियुक्तों को 20-20 साल के कठोर कारावास और 20-20 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई है। दोषी ठहराए गए अभियुक्तों को अन्य धाराओं में भी सजा सुनाई गई है।
अदालत ने रमेश सैनी, संजय उर्फ संजीव और गोविंदा को सामूहिक दुष्कर्म एवं छेड़खानी का दोषी पाया। अदालत ने साक्ष्यों के अभाव में नौ जुलाई को पांच आरोपियों नरेश, सोनू, मुकुल, महेश और राजू को बरी कर दिया था। हालांकि, अदालत ने आईटी एक्ट की धारा 66 के आरोप से आठों को दोषमुक्त करार दिया।
यह था मामला
23 सितंबर 2016 को एक व्यक्ति ने काशीपुर कोतवाली में रिपोर्ट दर्ज कराई थी कि 22 सितंबर की शाम करीब 5:30 कुछ युवक उसकी बेटी को ले गए और उसके साथ छेड़छाड़ और सामूहिक दुष्कर्म का प्रयास किया। विरोध करने पर अभियुक्तों ने उसका सिर दीवार से पटक दिया और उसके साथ मारपीट की। बिटिया अभियुक्तोें के सामने गिड़गिड़ाई, लेकिन उन्होंने उसे नहीं बख्शा। आरोपियों ने मोबाइल से उसका वीडियो बनाकर वायरल भी किया।
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इन धाराओं में दर्ज हुआ था मुकदमा
पुलिस ने अभियुक्तों के खिलाफ पहले धारा 354 ख, 342, 323 और 66 आईटी एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज किया था। मामले की विवेचना तत्कालीन कोतवाल ओमप्रकाश शर्मा ने की। पुलिस ने धारा 164 के तहत पीड़िता के बयान दर्ज कराए जिसके आधार पर सामूहिक दुष्कर्म की धारा 376 डी और 34 पुलिस एक्ट की धारा बढ़ाई गई।
आठ के खिलाफ दाखिल की गई थी चार्जशीट
विवेचनाधिकारी निरीक्षक ओमप्रकाश शर्मा ने आठ आरोपियों के खिलाफ सत्र न्यायालय में चार्जशीट दाखिल की थी। इस वाद का परीक्षण प्रथम अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश प्रीतू शर्मा की अदालत में हुआ। अभियोजन पक्ष की ओर से मुकदमे के वादी के अलावा विवेचना अधिकारी इंस्पेक्टर शर्मा, उपनिरीक्षक धीरेंद्र कुमार, जसविंदर सिंह, सरोज कांबोज, महिला चिकित्सक देविका सारस्वत के अलावा घटना के चश्मदीदों को परीक्षित कराया गया। अभियोजन पक्ष की ओर से पैरवी एडीजीसी संतोष नकवी और बचाव पक्ष की ओर से पैरवी अधिवक्ता संजीव आकाश एवं सिंधु आकाश ने की।
दोषियों को इन धाराओं में मिली सजा
1. धारा 376 डी में 20-20 वर्ष के कारावास व 20-20 हजार रुपये जुर्माने की सजा
2. धारा 354 क में 03-03 वर्ष के कारावास व 05-05 हजार रुपये के जुर्माने की सजा
3. धारा 354 ख में 05-05 वर्ष के कारावास व 05-05 हजार रुेपये जुर्माने की सजा
4. धारा 342 में एक-एक वर्ष के कारावास
5. धारा 323, 34 पुलिस एक्ट में एक-एक वर्ष के कारावास
6. धारा 66 डी- सभी आठों आरोपी दोषमुक्त।
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अदालत ने रमेश सैनी, संजय उर्फ संजीव और गोविंदा को सामूहिक दुष्कर्म एवं छेड़खानी का दोषी पाया। अदालत ने साक्ष्यों के अभाव में नौ जुलाई को पांच आरोपियों नरेश, सोनू, मुकुल, महेश और राजू को बरी कर दिया था। हालांकि, अदालत ने आईटी एक्ट की धारा 66 के आरोप से आठों को दोषमुक्त करार दिया।
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यह था मामला
23 सितंबर 2016 को एक व्यक्ति ने काशीपुर कोतवाली में रिपोर्ट दर्ज कराई थी कि 22 सितंबर की शाम करीब 5:30 कुछ युवक उसकी बेटी को ले गए और उसके साथ छेड़छाड़ और सामूहिक दुष्कर्म का प्रयास किया। विरोध करने पर अभियुक्तों ने उसका सिर दीवार से पटक दिया और उसके साथ मारपीट की। बिटिया अभियुक्तोें के सामने गिड़गिड़ाई, लेकिन उन्होंने उसे नहीं बख्शा। आरोपियों ने मोबाइल से उसका वीडियो बनाकर वायरल भी किया।
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इन धाराओं में दर्ज हुआ था मुकदमा
पुलिस ने अभियुक्तों के खिलाफ पहले धारा 354 ख, 342, 323 और 66 आईटी एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज किया था। मामले की विवेचना तत्कालीन कोतवाल ओमप्रकाश शर्मा ने की। पुलिस ने धारा 164 के तहत पीड़िता के बयान दर्ज कराए जिसके आधार पर सामूहिक दुष्कर्म की धारा 376 डी और 34 पुलिस एक्ट की धारा बढ़ाई गई।
आठ के खिलाफ दाखिल की गई थी चार्जशीट
विवेचनाधिकारी निरीक्षक ओमप्रकाश शर्मा ने आठ आरोपियों के खिलाफ सत्र न्यायालय में चार्जशीट दाखिल की थी। इस वाद का परीक्षण प्रथम अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश प्रीतू शर्मा की अदालत में हुआ। अभियोजन पक्ष की ओर से मुकदमे के वादी के अलावा विवेचना अधिकारी इंस्पेक्टर शर्मा, उपनिरीक्षक धीरेंद्र कुमार, जसविंदर सिंह, सरोज कांबोज, महिला चिकित्सक देविका सारस्वत के अलावा घटना के चश्मदीदों को परीक्षित कराया गया। अभियोजन पक्ष की ओर से पैरवी एडीजीसी संतोष नकवी और बचाव पक्ष की ओर से पैरवी अधिवक्ता संजीव आकाश एवं सिंधु आकाश ने की।
दोषियों को इन धाराओं में मिली सजा
1. धारा 376 डी में 20-20 वर्ष के कारावास व 20-20 हजार रुपये जुर्माने की सजा
2. धारा 354 क में 03-03 वर्ष के कारावास व 05-05 हजार रुपये के जुर्माने की सजा
3. धारा 354 ख में 05-05 वर्ष के कारावास व 05-05 हजार रुेपये जुर्माने की सजा
4. धारा 342 में एक-एक वर्ष के कारावास
5. धारा 323, 34 पुलिस एक्ट में एक-एक वर्ष के कारावास
6. धारा 66 डी- सभी आठों आरोपी दोषमुक्त।