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रुद्रपुर: धरने से उठे किसान...आज प्रशासन से होगी से वार्ता, दून कूच की चेतावनी; क महीने का अल्टीमेटम दिया

Mon, 24 Aug 2026 06:25 AM IST
Heera अमर उजाला नेटवर्क, ऊधम सिंह नगर
अमर उजाला नेटवर्क, ऊधम सिंह नगर Published by: Heera Updated Mon, 24 Aug 2026 06:25 AM IST
सार

रुद्रपुर कलक्ट्रेट में भारतीय किसान यूनियन (टिकैत) का तीन दिवसीय धरना रविवार शाम को समाप्त हो गया। किसानों ने प्रशासन को एक महीने का अल्टीमेटम देते हुए चेतावनी दी कि अगर इस अवधि में उनकी मांगों पर ठोस निर्णय नहीं लिया गया, तो वे देहरादून कूच करेंगे।

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Three-day farmers protest ends in rudrapur
कलेक्ट्रट परिसर में धरने पर बैठे किसानों से बातचीत करते सीडीओ, एडीएम समेत अन्य। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

रुद्रपुर कलक्ट्रेट के मुख्य गेट पर तीन दिन से चल रहा भारतीय किसान यूनियन (टिकैत) का धरना रविवार शाम समाप्त हो गया। किसानों ने शासन-प्रशासन को एक महीने का अल्टीमेटम देते हुए कहा कि इस अवधि में उनकी आठ सूत्री मांगों पर ठोस निर्णय नहीं हुआ तो किसानों को जुटाकर देहरादून कूच किया जाएगा।

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किसानों और प्रशासन के बीच रविवार को कई दौर की वार्ता के बाद सहमति बनी। एडीएम पंकज उपाध्याय से हुई वार्ता में किसानों को सोमवार दोपहर तीन बजे डीएम से मिलने का समय दिया गया है। इसके बाद किसान नेताओं ने आपस में बैठक कर आगे की रणनीति तय करने का निर्णय लिया।

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किसान नेताओं ने कहा कि फिलहाल धरना समाप्त किया जा रहा है लेकिन आंदोलन खत्म नहीं हुआ है। किसानों का कहना है कि ट्यूबवेलों का बिजली बिल माफ करने, घरेलू उपभोक्ताओं को 300 यूनिट मुफ्त बिजली, संपूर्ण कर्जमाफी, गन्ने का मूल्य 700 रुपये प्रति क्विंटल करने, स्मार्ट मीटर पर रोक लगाने, बाजपुर के 20 गांवों की भूमि पर किसानों को अधिकार देने समेत आठ मांगों पर सरकार को गंभीरता से निर्णय लेना होगा।

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किसान नेताओं ने चेताया कि एक महीने में मांगें नहीं मानी गईं तो आंदोलन को जिला स्तर से उठाकर प्रदेश स्तर पर ले जाया जाएगा। किसानों ने कहा कि अगला आंदोलन पहले से बड़ा होगा और ट्रैक्टर-ट्रॉलियों के साथ राजधानी पहुंचकर सरकार पर दबाव बनाया जाएगा।

तीन वार्ताएं हुईं विफल, चौथी में बनी बात
किसानों और प्रशासन के बीच धरने के दौरान तीन दौर की वार्ता बेनतीजा रही। शुरुआत में एसडीएम मनीष बिष्ट के साथ किसानों की वार्ता हुई लेकिन मांगों पर सहमति नहीं बन सकी। इसके बाद सीडीओ दिवेश शाशनी के साथ बातचीत हुई। वह भी विफल रही। तीसरे दौर में एडीएम के साथ वार्ता की गई लेकिन किसान ठोस आश्वासन की मांग पर अड़े रहे। चौथे दौर की बातचीत में प्रशासन ने किसानों को डीएम से सोमवार दोपहर तीन बजे मुलाकात का समय दिया।

नहीं चाहते कि बेटी को छोड़कर आने पर मजबूर हो पिता
धरने के दौरान युवा प्रदेश अध्यक्ष जितेंद्र सिंह जीतू ने कहा कि किसान नहीं चाहते कि भविष्य में किसी पिता को अपनी बेटी और परिवार को छोड़कर आंदोलन के लिए मजबूर होकर घर से निकलना पड़े। उन्होंने कहा कि किसानों की समस्याएं केवल खेती तक सीमित नहीं हैं बल्कि उनके परिवार और बच्चों के भविष्य से भी जुड़ीं हैं।

आपसी सहमति के दौरान किसानों में हुई बहस
धरना समाप्त करने और एक महीने का समय देने को लेकर किसानों के बीच भी काफी देर तक चर्चा हुई। कुछ किसान मांगें पूरी होने तक धरना जारी रखने के पक्ष में थे जबकि किसान नेताओं ने प्रशासन की ओर से दिए गए आश्वासन और डीएम से सोमवार को होने वाली मुलाकात को देखते हुए फिलहाल धरना समाप्त करने की बात कही। इसी दौरान कुछ मुद्दों पर किसानों के बीच बहस भी हुई।

भीड़ बढ़ने पर अलर्ट हुई पुलिस, बुलाई गई पीएसी
रविवार को धरनास्थल पर किसानों की संख्या बढ़ने के साथ पुलिस भी अलर्ट हो गई। यूपी के बिलासपुर और रामपुर से किसानों के पहुंचने के बाद पुलिस ने कलक्ट्रेट के आसपास सुरक्षा बढ़ाई। स्थिति को नियंत्रित रखने के लिए पीएसी भी बुलाई गई। कुछ पुलिसकर्मियों ने किसानों के टेंट के पास ही तंबू लगाकर डेरा डाल लिया। पुलिस अधिकारियों ने जवानों को किसी भी स्थिति से निपटने के लिए तैयार रहने के निर्देश दिए।

 

डायलिसिस करा रहे किसान भी पहुंचे
कलक्ट्रेट में रविवार को धरने के दौरान एक बीमार किसान भी पहुंचे। किसान ने बताया कि वह अपनी डायलिसिस करा रहे हैं। उनकी समस्या को एसडीएम मनीष बिष्ट और तहसीलदार दिनेश कुटैला ने समझा। पानी पिलाने के बाद किसान को बैठने के लिए कुर्सी दिलाई।

गेट तोड़ने की चेतावनी, सुरक्षा बढ़ाई गई
दोपहर 12 बजे से किसान संबोधन के दौरान बार-बार गेट तोड़ने की चेतावनी देने लगे। इससे खलबली मच गई और पुलिस अलर्ट हो गई। सीओ ने पीएससी को मौके पर बुलाया। प्रशासन की टीम ने भी डेरा डाल लिया। हालांकि, ऐसा कोई भी विवाद नहीं हुआ।

छह जिलों में किसानों का प्रदर्शन सफल रहा है। आठ सूत्री मांगपत्र मुख्यमंत्री तक भेजा गया है। सरकार को मांगों पर विचार के लिए एक महीने का समय दिया गया है। इसके बाद किसान नेता राकेश टिकैत से तारीख तय कर पूरे उत्तराखंड से ट्रैक्टर-ट्रॉलियों के साथ देहरादून कूच करने का फैसला लिया गया है। जरूरत पड़ी तो जहां रोकेंगे, वहीं धरना देंगे। - प्रेम सिंह सहोता, प्रदेश अध्यक्ष, भाकियू टिकैत

भारतीय किसान यूनियन टिकैत गुट की ओर से धरने के दौरान मांगपत्र सौंपा गया है जिसे शासन को भेजा जा रहा है। किसानों की समस्याओं पर चर्चा के लिए सोमवार को कलक्ट्रेट सभागार में डीएम की मौजूदगी में बैठक होगी। जिला स्तर की समस्याओं के समाधान का सकारात्मक प्रयास किया जाएगा। - पंकज उपाध्याय, एडीएम

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