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वनकर्मियों पर हमला करने के तीन अभियुक्तों को दो-दो साल की कैद
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काशीपुर। उपखनिज लदे वाहनों की धरपकड़ में गई वन कर्मियों की टीम पर हमला करने के तीन आरोपियों को सिविल जज (सी.डि.) ने दो-दो वर्ष के कारावास और दो-दो हजार रुपये के जुर्माने की सजा सुनाई है। इसके अलावा वन अधिनियम में भी अभियुक्तों को तीन माह का कारावास भोगना होगा।
20 जनवरी 2012 को शाम करीब छह बजे वन दरोगा हरीश चंद्र आर्य, वन रक्षक इंद्रपाल सिंह, माधवानंद तिवारी ब्रह्मा पाल आदि लोअर कोसी नदी आरक्षित क्षेत्र में गश्त कर रहे थे। इसी दौरान वहां से उपखनिज लदा एक डंपर और ट्रैक्टर गुजरा। उन्होंने दोनों वाहनों को रोककर चालकों से खनन संबंधी दस्तावेज दिखाने को कहा।
इसी दौरान हरदीप सिंह उसका भाई हरजीत सिंह व संदीप सिंह समेत सात-आठ लोग हाथों में लाठी-डंडे लेकर वहां पहुंच गए। इन लोगों ने हवाई फायरिंग कर वन कर्मियों के साथ मारपीट की और उपखनिज लदे दोनों वाहन छुड़ा ले गए। मामले में कुंडेश्वरी चौकी में केस दर्ज कराया गया। मामले की विवेचना तत्कालीन चौकी प्रभारी खीम सिंह अधिकारी ने की।
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आरोप पत्र दायर होने के बाद वाद का सत्र परीक्षण सिविल जज (सि.डि.) की अदालत में हुआ। अभियोजन पक्ष की ओर से मौके पर मौजूद वन कर्मियों के भी बयान कराए गए। अभियोजन पक्ष की ओर से पैरवी सहायक अभियोजन अधिकारी अनुज कुमार साहनी ने की। दोनों पक्षों को सुनने और पत्रावली का परीक्षण करने पर सिविल जज (सि.डि.) विनोद कुमार वर्मन ने तीनों आरोपियों को धारा 147, 148, 149 व 42 वन अधिनियम के तहत दोषी पाया।
अदालत ने तीनों आरोपियों हरदीप, हरजीत एवं संदीप सिंह को धारा 148, 149 में दो-दो वर्ष के कठोर कारावास व दो-दो हजार रुपए के जुर्माने की सजा सुनाई है। वहीं धारा 147 में एक वर्ष के कारावास व एक-एक हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई है। 42 वन अधिनियम में उन्हें तीन-तीन माह की जेल काटनी होगी।
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20 जनवरी 2012 को शाम करीब छह बजे वन दरोगा हरीश चंद्र आर्य, वन रक्षक इंद्रपाल सिंह, माधवानंद तिवारी ब्रह्मा पाल आदि लोअर कोसी नदी आरक्षित क्षेत्र में गश्त कर रहे थे। इसी दौरान वहां से उपखनिज लदा एक डंपर और ट्रैक्टर गुजरा। उन्होंने दोनों वाहनों को रोककर चालकों से खनन संबंधी दस्तावेज दिखाने को कहा।
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इसी दौरान हरदीप सिंह उसका भाई हरजीत सिंह व संदीप सिंह समेत सात-आठ लोग हाथों में लाठी-डंडे लेकर वहां पहुंच गए। इन लोगों ने हवाई फायरिंग कर वन कर्मियों के साथ मारपीट की और उपखनिज लदे दोनों वाहन छुड़ा ले गए। मामले में कुंडेश्वरी चौकी में केस दर्ज कराया गया। मामले की विवेचना तत्कालीन चौकी प्रभारी खीम सिंह अधिकारी ने की।
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आरोप पत्र दायर होने के बाद वाद का सत्र परीक्षण सिविल जज (सि.डि.) की अदालत में हुआ। अभियोजन पक्ष की ओर से मौके पर मौजूद वन कर्मियों के भी बयान कराए गए। अभियोजन पक्ष की ओर से पैरवी सहायक अभियोजन अधिकारी अनुज कुमार साहनी ने की। दोनों पक्षों को सुनने और पत्रावली का परीक्षण करने पर सिविल जज (सि.डि.) विनोद कुमार वर्मन ने तीनों आरोपियों को धारा 147, 148, 149 व 42 वन अधिनियम के तहत दोषी पाया।
अदालत ने तीनों आरोपियों हरदीप, हरजीत एवं संदीप सिंह को धारा 148, 149 में दो-दो वर्ष के कठोर कारावास व दो-दो हजार रुपए के जुर्माने की सजा सुनाई है। वहीं धारा 147 में एक वर्ष के कारावास व एक-एक हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई है। 42 वन अधिनियम में उन्हें तीन-तीन माह की जेल काटनी होगी।