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72 घंटे में कोरोना संक्रमण के फैलने का हो रहा खतरा
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रुद्रपुर के रामपुर सीमा पर यात्रियों की सैंपल लेती स्वास्थ्य विभाग की टीम।
- फोटो : RUDRAPUR
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रुद्रपुर। रामपुर सीमा पर कोरोना जांच के नाम पर खानापूर्ति की जा रही है। दिल्ली से आने वाले वाहन चालकों और यात्रियों की आरटीपीसीआर जांच की जा रही है। सैंपल लेने के बाद लोगों को उनके गंतव्य को भेज दिया जा रहा है। सैंपल लेने के 72 घंटे बाद उन्हें रिपोर्ट के बारे में अवगत कराया जा रहा है। ऐसे में यदि कोई व्यक्ति या महिला संक्रमित पाए गए तोे कोरोना संक्रमण के फैलने से इनकार नहीं किया जा सकता है।
यूपी की रामपुर सीमा से रुद्रपुर आने वाली दिल्ली से आने वाली रोडवेज बस और निजी वाहनों में सवार लोगों की कोरोना जांच की जा रही है। मेडिकल टीम रैपिड एंटीजन टेस्ट के बजाय आरटीपीसीआर जांच कर रही है। लोगों के सैंपल लेकर कर्मचारी दोपहर दो बजे बाद अपनी रिपोर्ट जिला अस्पताल में आकर सौंपते हैं। इसके बाद लैब में सैंपलों की जांच की जाती है। वहीं सैंपल लेने के बाद मेडिकल टीम लोगों के नाम को नोट बुक में दर्ज कर उन्हें जाने की खुली छूट दे रही है। सैंपल देने के बाद लोग हल्द्वानी से होते हुए अल्मोड़ा, चंपावत, बागेश्वर, पिथौरागढ़ के लिए रवाना हो रहे हैं। लोग यदि कोरोना संक्रमित भी पाए गए तो उन्हें तीन दिन बाद पता चल पाएगा।
स्वास्थ्य कर्मी हिमांशु बिष्ट ने बताया कि जांच में कोरोना संक्रमित आने पर संबंधित व्यक्ति को कॉल पर सूचना दी जाती है। साथ ही उस जगह की पुलिस को भी इस संदर्भ में जानकारी दी जाती है। हैरानी की बात यह है कि सीमा पर कोरोना के सैंपल लेने वाली टीम दोपहर दो बजे तक ही जांच कर रही है जबकि दो बजे के बाद भी सैकड़ों वाहन दिल्ली से रुद्रपुर होते हुए कई शहरों के लिए निकल रहे हैं।
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वाहनों को रोकने के लिए नहीं हैं पुलिस कर्मी
रुद्रपुर। रामपुर सीमा पर दिल्ली से आने वाले वाहनों को रोकने के लिए पर्याप्त पुलिस कर्मी नहीं हैं। सीमा पर दो कांस्टेबल और दो पीआरडी जवानों को तैनात किया गया है जबकि ट्रैफिक के हिसाब से वहां पर 10 से अधिक पुलिस कर्मियों की जरूरत है। वाहनों का दबाव बढ़ने पर कई रोडवेज बसें और वाहन बिना जांच के ही सीमा को पार कर रहे हैं।
रुद्रपुर। सीमा पर बुधवार को 300 लोगों की कोरोना जांच की गई। मेडिकल टीम के हिमांशु बिष्ट व गुरमीत सिंह ने बताया कि सुबह नौ बजे से दोपहर दो बजे तक ही कोरोना जांच के लिए सैंपल लेने के आदेश दिए गए हैं। उन्होंने बताया कि पुलिस कर्मियों की कमी होने पर कई लोग बिना जांच कराए उन्हें धमकाते हुए चले जाते हैं।
रुद्रपुर। सीमा पर एक व्यक्ति के सैंपल लेने में 15 मिनट का समय खर्च हो रहा है। एक बस में सवार 20 लोगों की जांच करने में घंटों बीत जा रहे हैं। ऐसे में अधिकांश लोग सीमा पर कोरोना जांच नहीं कराना चाहते हैं। उनका कहना है कि टीम को रैपिड एंटीजन टेस्ट करना चाहिए ताकि समय रहते लोगों को कोरोना के बारे में पता चल सके।
पंतनगर। पंतनगर एयरपोर्ट में यात्रियों की केवल थर्मल स्क्रीनिंग हो रही है। कोरोना की दूसरी लहर को देखते हुए जहां विभिन्न हवाई अड्डों सहित देहरादून के जौलीग्रांट एयरपोर्ट पर भी यात्रियों की आरटीपीसीआर जांच प्रारंभ हो चुकी है। ऐसे में यदि कोई संक्रमित यात्री फ्लाइट से पंतनगर पहुंचा, तो उसके संपर्क में आए अन्य यात्रियों सहित एएआई स्टाफ भी संक्रमण की चपेट में आ सकता है। एयरपोर्ट के निदेशक राजीव पुनेठा ने बताया कि एयरपोर्ट के टर्मिनल भवन में यात्रियों के आने और जाते समय दो बार थर्मल स्क्रीनिंग से गुजरना पड़ता है। यदि किसी का तापमान मानक से अधिक होता है तो स्वास्थ्य विभाग की टीम उसे जिला अस्पताल में आरटीपीसीआर जांच के लिए ले जाती है। संवाद
सीमा पर रैपिड एंटीजन टेस्ट कराने में एक व्यक्ति को लगभग आधे घंटे का समय लगेगा। आरटीपीसीआर जांच के दौरान ही लोगों को सावधानी बरतने के लिए कहा जाता है। लोग खुद ही घर पहुंचकर होम क्वारंटीन हो जाते हैं।
-डॉ. हरेंद्र मलिक, एसीएमओ।
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यूपी की रामपुर सीमा से रुद्रपुर आने वाली दिल्ली से आने वाली रोडवेज बस और निजी वाहनों में सवार लोगों की कोरोना जांच की जा रही है। मेडिकल टीम रैपिड एंटीजन टेस्ट के बजाय आरटीपीसीआर जांच कर रही है। लोगों के सैंपल लेकर कर्मचारी दोपहर दो बजे बाद अपनी रिपोर्ट जिला अस्पताल में आकर सौंपते हैं। इसके बाद लैब में सैंपलों की जांच की जाती है। वहीं सैंपल लेने के बाद मेडिकल टीम लोगों के नाम को नोट बुक में दर्ज कर उन्हें जाने की खुली छूट दे रही है। सैंपल देने के बाद लोग हल्द्वानी से होते हुए अल्मोड़ा, चंपावत, बागेश्वर, पिथौरागढ़ के लिए रवाना हो रहे हैं। लोग यदि कोरोना संक्रमित भी पाए गए तो उन्हें तीन दिन बाद पता चल पाएगा।
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स्वास्थ्य कर्मी हिमांशु बिष्ट ने बताया कि जांच में कोरोना संक्रमित आने पर संबंधित व्यक्ति को कॉल पर सूचना दी जाती है। साथ ही उस जगह की पुलिस को भी इस संदर्भ में जानकारी दी जाती है। हैरानी की बात यह है कि सीमा पर कोरोना के सैंपल लेने वाली टीम दोपहर दो बजे तक ही जांच कर रही है जबकि दो बजे के बाद भी सैकड़ों वाहन दिल्ली से रुद्रपुर होते हुए कई शहरों के लिए निकल रहे हैं।
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वाहनों को रोकने के लिए नहीं हैं पुलिस कर्मी
रुद्रपुर। रामपुर सीमा पर दिल्ली से आने वाले वाहनों को रोकने के लिए पर्याप्त पुलिस कर्मी नहीं हैं। सीमा पर दो कांस्टेबल और दो पीआरडी जवानों को तैनात किया गया है जबकि ट्रैफिक के हिसाब से वहां पर 10 से अधिक पुलिस कर्मियों की जरूरत है। वाहनों का दबाव बढ़ने पर कई रोडवेज बसें और वाहन बिना जांच के ही सीमा को पार कर रहे हैं।
रुद्रपुर। सीमा पर बुधवार को 300 लोगों की कोरोना जांच की गई। मेडिकल टीम के हिमांशु बिष्ट व गुरमीत सिंह ने बताया कि सुबह नौ बजे से दोपहर दो बजे तक ही कोरोना जांच के लिए सैंपल लेने के आदेश दिए गए हैं। उन्होंने बताया कि पुलिस कर्मियों की कमी होने पर कई लोग बिना जांच कराए उन्हें धमकाते हुए चले जाते हैं।
रुद्रपुर। सीमा पर एक व्यक्ति के सैंपल लेने में 15 मिनट का समय खर्च हो रहा है। एक बस में सवार 20 लोगों की जांच करने में घंटों बीत जा रहे हैं। ऐसे में अधिकांश लोग सीमा पर कोरोना जांच नहीं कराना चाहते हैं। उनका कहना है कि टीम को रैपिड एंटीजन टेस्ट करना चाहिए ताकि समय रहते लोगों को कोरोना के बारे में पता चल सके।
पंतनगर। पंतनगर एयरपोर्ट में यात्रियों की केवल थर्मल स्क्रीनिंग हो रही है। कोरोना की दूसरी लहर को देखते हुए जहां विभिन्न हवाई अड्डों सहित देहरादून के जौलीग्रांट एयरपोर्ट पर भी यात्रियों की आरटीपीसीआर जांच प्रारंभ हो चुकी है। ऐसे में यदि कोई संक्रमित यात्री फ्लाइट से पंतनगर पहुंचा, तो उसके संपर्क में आए अन्य यात्रियों सहित एएआई स्टाफ भी संक्रमण की चपेट में आ सकता है। एयरपोर्ट के निदेशक राजीव पुनेठा ने बताया कि एयरपोर्ट के टर्मिनल भवन में यात्रियों के आने और जाते समय दो बार थर्मल स्क्रीनिंग से गुजरना पड़ता है। यदि किसी का तापमान मानक से अधिक होता है तो स्वास्थ्य विभाग की टीम उसे जिला अस्पताल में आरटीपीसीआर जांच के लिए ले जाती है। संवाद
सीमा पर रैपिड एंटीजन टेस्ट कराने में एक व्यक्ति को लगभग आधे घंटे का समय लगेगा। आरटीपीसीआर जांच के दौरान ही लोगों को सावधानी बरतने के लिए कहा जाता है। लोग खुद ही घर पहुंचकर होम क्वारंटीन हो जाते हैं।
-डॉ. हरेंद्र मलिक, एसीएमओ।