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Udham Singh Nagar News: टूटने लगा जनसंख्या का रिकॉर्ड तो याद आ रहा परिवार नियोजन
Wed, 01 Mar 2023 10:15 PM IST
हल्द्वानी ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, ऊधम सिंह नगर
संवाद न्यूज एजेंसी, ऊधम सिंह नगर
Updated Wed, 01 Mar 2023 10:15 PM IST
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टूटने लगा जनसंख्या का रिकॉर्ड तो याद आ रहा परिवार नियोजन
- जिले में स्वास्थ्य विभाग ने परिवार नियोजन कार्यक्रमों पर फोकस बढ़ाया
संवाद न्यूज एजेंसी
रुद्रपुर। विश्व की सर्वाधिक जनसंख्या में ज्यों भारत चीन को पछाड़ने लगा सरकार को जनसंख्या नियंत्रण के लिए परिवार नियोजन कार्यक्रमों की याद आने लगी है। जिले में भी स्वास्थ्य विभाग ने परिवार नियोजन के कार्यक्रमों पर फोकस बढा दिया है। नसबंदी शिविरों के आयोजन के साथ ही डॉक्टरों को नसबंदी की नई तकनीक का प्रशिक्षण दिया गया है। इसके अलावा जिले में परिवार नियोजन कार्यक्रम के तहत दो योजनाएं शुरू कर दी गई हैं।
ऊधम सिंह नगर जिले की भी अनुमानित आबादी वर्तमान में करीब 20 लाख पहुंच गई है। छोटा परिवार सुखी परिवार की अवधारणा को मूर्त रूप देने के लिए स्वास्थ्य विभाग जिले में परिवार नियोजन कार्यक्रम की नई-नई योजनाएं शुरू कर रहा है। जनवरी में रुद्रपुर स्थित यूआईआरडी सभागार में लेप्रोस्कोपिक विधि से महिला नसबंदी को लेकर कुमाऊं के डॉक्टरों को 12 दिवसीय प्रशिक्षण दिया गया था। पिछले दिनों स्वास्थ्य विभाग ने जिले में सास, बहु पति सम्मेलन का आयोजन कर नवदंपती को परिवार नियोजन के लिए जागरूक किया जा रहा है। इसके अलावा परिवार नियोजन कार्यक्रम के तहत नई पहल किट योजना शुरू कर दी है। इसके तहत नवदंपती को घर-घर जाकर परिवार नियोजन को लेकर जागरूक किया जा रहा है। एनएचएम के जिला प्रभारी डॉ. हरेंद्र मलिक ने कहा कि जिले में परिवार नियोजन कार्यक्रम को सफल बनाने के लिए प्रयास किए जा रहे हैं।
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उत्तराखंड में फेल हो गया था नसबंदी पखवाड़ा -2022
रुद्रपुर। उत्तराखंड में पुरुष नसबंदी पखवाड़ा-2022 फेल हो गया था। प्रदेश में सिर्फ 63 लोगों ने ही नसबंदी करवाई थी, इनमें सर्वाधिक 16 नसबंदी ऊधम सिंह नगर जिले में हुई थी। इस कारण नसबंदी पखवाड़ा खत्म होने के बाद इसकी समय सीमा बढ़ा दी थी। पहले यह नसबंदी पखवाड़ा 21 नवंबर से चार दिसंबर तक चला, लेकिन नसबंदी कम होने पर एनएच निदेशक ने पखवाड़े को 12 दिसंबर तक बढ़ा दिया था। संवाद
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नसबंदी में महिलाओं से पीछे हैं पुरुष
रुद्रपुर। नसंबदी करवाने में पुरुष महिलाओं से पीछे हैं। परिवार नियोजन के नाम पर महिलाओं की ही नसबंदी की जा रही है। ऊधम सिंह नगर जिले में पिछले साल जुलाई में विश्व जनसंख्या स्थिरीकरण पखवाड़े में भी पुरुष महिलाओं से पीछे रहे। जिले में जहां 293 महिलाओं ने नसबंदी करवाई, वहीं पुरुषों की संख्या सिर्फ 10 रही। संवाद
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प्रसूता महिलाओं का डाटा एकत्र करने में जुटा स्वास्थ्य विभाग
- प्रसव के बाद अस्पताल में 48 घंटे भर्ती होने पर मिलेंगे 2000 रुपये
संवाद न्यूज एजेंसी
रुद्रपुर। ईजा-बोई शगुन योजना के लिए स्वास्थ्य विभाग ने प्रसूता महिलाओं के आंकड़े जुटाने शुरू कर दिए हैं। इस योजना के तहत प्रसव के बाद अस्पतालों में 48 घंटे भर्ती होने पर महिलाओं को 2000 रुपये मिलेंगे।
एनएचएम के जिला प्रभारी डॉ. हरेंद्र मलिक ने बताया कि मातृ-शिशु मृत्यु दर में कमी लाने के लिए राज्य स्थापना दिवस पर ईजा बोई शगुुन योजना शुरू की गई थी। उन्होंने कहा कि कई बार प्रसव के तुरंत बाद महिलाओं को उनके परिजन अस्पताल से डिस्चार्ज करवा लेते हैं। इसके लिए कई लोग डॉक्टरों पर अपनी पहुंच व स्थानीय राजनीतिक संपर्कों का दबाव भी बनाते हैं। इससे कई बार प्रसूता महिलाओं की मृत्यु भी हो जाती है। ईजा-बोई शगुन योजना को लेकर जिलेभर के अस्पतालों से प्रसूता महिलाओं के आंकड़े जुटाए जा रहे हैं। डॉ. मलिक ने कहा कि इसके अतिरिक्त जननी सुरक्षा योजना के तहत संस्थागत प्रसव कराने के लिए शहरी क्षेत्र की प्रसूता महिलाओं को पूर्व की भांति 1000 रुपये व ग्रामीण क्षेत्र की महिलाओं को 1400 रुपये भी दिए जाएंगे।
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- जिले में स्वास्थ्य विभाग ने परिवार नियोजन कार्यक्रमों पर फोकस बढ़ाया
संवाद न्यूज एजेंसी
रुद्रपुर। विश्व की सर्वाधिक जनसंख्या में ज्यों भारत चीन को पछाड़ने लगा सरकार को जनसंख्या नियंत्रण के लिए परिवार नियोजन कार्यक्रमों की याद आने लगी है। जिले में भी स्वास्थ्य विभाग ने परिवार नियोजन के कार्यक्रमों पर फोकस बढा दिया है। नसबंदी शिविरों के आयोजन के साथ ही डॉक्टरों को नसबंदी की नई तकनीक का प्रशिक्षण दिया गया है। इसके अलावा जिले में परिवार नियोजन कार्यक्रम के तहत दो योजनाएं शुरू कर दी गई हैं।
ऊधम सिंह नगर जिले की भी अनुमानित आबादी वर्तमान में करीब 20 लाख पहुंच गई है। छोटा परिवार सुखी परिवार की अवधारणा को मूर्त रूप देने के लिए स्वास्थ्य विभाग जिले में परिवार नियोजन कार्यक्रम की नई-नई योजनाएं शुरू कर रहा है। जनवरी में रुद्रपुर स्थित यूआईआरडी सभागार में लेप्रोस्कोपिक विधि से महिला नसबंदी को लेकर कुमाऊं के डॉक्टरों को 12 दिवसीय प्रशिक्षण दिया गया था। पिछले दिनों स्वास्थ्य विभाग ने जिले में सास, बहु पति सम्मेलन का आयोजन कर नवदंपती को परिवार नियोजन के लिए जागरूक किया जा रहा है। इसके अलावा परिवार नियोजन कार्यक्रम के तहत नई पहल किट योजना शुरू कर दी है। इसके तहत नवदंपती को घर-घर जाकर परिवार नियोजन को लेकर जागरूक किया जा रहा है। एनएचएम के जिला प्रभारी डॉ. हरेंद्र मलिक ने कहा कि जिले में परिवार नियोजन कार्यक्रम को सफल बनाने के लिए प्रयास किए जा रहे हैं।
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उत्तराखंड में फेल हो गया था नसबंदी पखवाड़ा -2022
रुद्रपुर। उत्तराखंड में पुरुष नसबंदी पखवाड़ा-2022 फेल हो गया था। प्रदेश में सिर्फ 63 लोगों ने ही नसबंदी करवाई थी, इनमें सर्वाधिक 16 नसबंदी ऊधम सिंह नगर जिले में हुई थी। इस कारण नसबंदी पखवाड़ा खत्म होने के बाद इसकी समय सीमा बढ़ा दी थी। पहले यह नसबंदी पखवाड़ा 21 नवंबर से चार दिसंबर तक चला, लेकिन नसबंदी कम होने पर एनएच निदेशक ने पखवाड़े को 12 दिसंबर तक बढ़ा दिया था। संवाद
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नसबंदी में महिलाओं से पीछे हैं पुरुष
रुद्रपुर। नसंबदी करवाने में पुरुष महिलाओं से पीछे हैं। परिवार नियोजन के नाम पर महिलाओं की ही नसबंदी की जा रही है। ऊधम सिंह नगर जिले में पिछले साल जुलाई में विश्व जनसंख्या स्थिरीकरण पखवाड़े में भी पुरुष महिलाओं से पीछे रहे। जिले में जहां 293 महिलाओं ने नसबंदी करवाई, वहीं पुरुषों की संख्या सिर्फ 10 रही। संवाद
प्रसूता महिलाओं का डाटा एकत्र करने में जुटा स्वास्थ्य विभाग
- प्रसव के बाद अस्पताल में 48 घंटे भर्ती होने पर मिलेंगे 2000 रुपये
संवाद न्यूज एजेंसी
रुद्रपुर। ईजा-बोई शगुन योजना के लिए स्वास्थ्य विभाग ने प्रसूता महिलाओं के आंकड़े जुटाने शुरू कर दिए हैं। इस योजना के तहत प्रसव के बाद अस्पतालों में 48 घंटे भर्ती होने पर महिलाओं को 2000 रुपये मिलेंगे।
एनएचएम के जिला प्रभारी डॉ. हरेंद्र मलिक ने बताया कि मातृ-शिशु मृत्यु दर में कमी लाने के लिए राज्य स्थापना दिवस पर ईजा बोई शगुुन योजना शुरू की गई थी। उन्होंने कहा कि कई बार प्रसव के तुरंत बाद महिलाओं को उनके परिजन अस्पताल से डिस्चार्ज करवा लेते हैं। इसके लिए कई लोग डॉक्टरों पर अपनी पहुंच व स्थानीय राजनीतिक संपर्कों का दबाव भी बनाते हैं। इससे कई बार प्रसूता महिलाओं की मृत्यु भी हो जाती है। ईजा-बोई शगुन योजना को लेकर जिलेभर के अस्पतालों से प्रसूता महिलाओं के आंकड़े जुटाए जा रहे हैं। डॉ. मलिक ने कहा कि इसके अतिरिक्त जननी सुरक्षा योजना के तहत संस्थागत प्रसव कराने के लिए शहरी क्षेत्र की प्रसूता महिलाओं को पूर्व की भांति 1000 रुपये व ग्रामीण क्षेत्र की महिलाओं को 1400 रुपये भी दिए जाएंगे।